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फिलहाल तो हवा में लटक कर रह गया झुमका
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:40 AM IST
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दशकों पहले फिल्म ‘मेरा साया’ में अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गया गीत ‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में’ ने बरेली को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई थी। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने बरेली को झुमके के शहर के रूप में पहचान दिलाने के लिए झुमका थीम पर आधारित चौराहा विकसित करने की योजना बनाई। डेलापीर चौराहा को चुना गया लेकिन उपाध्यक्ष डा. शशांक विक्रम सिंह का तबादला हो जाने के बाद इस चौराहे पर झुमका लटकाने का विचार छोड़ दिया गया। बाद में मिनी बाईपास पर जगह तय हुई। अब वह प्लान भी स्थगित है।
नौ जून को बीडीए ने डेलापीर चौराहे पर लटकने वाले झुमके की डिजाइन फाइनल की थी। डेलापीर चौराहे पर मुख्य फोकस में झुमका और साइड में सुरमा दानी और जरदोजी के लैंडस्कोप लटकाए जाने थे। 15 जून को वीसी डा. शशांक विक्रम सिंह के जाने के बाद बीडीए ने जगह कम बताकर डेलापीर चौराहे पर झुमका लटकाने का प्रस्ताव स्थगित कर दिया। बरेली-रामपुर हाइवे पर मिनी बाईपास पर झुमका चौराहा के रूप में विकसित करने की योजना बनी। बाद में ये भी रास नहीं आई। अब ये विचार भी स्थगित हो गया। बीडीए तय नहीं कर पा रहा है कि कौन से चौराहे को झुमका चौराहा के रूप में विकसित किया जाए। सेटेलाइट चौराहा, बीसलपुर चौराहा, सौ फुटा चौराहा, कर्मचारी नगर और रजऊ परसपुर चौराहे में किसी एक पर झुमका लटकाने का विचार चल रहा है। फिलहाल असमंजस के चलते बीडीए का झुमका किसी चौराहे पर लटकने के बजाय हवा में लटककर रह गया है।
‘डेलापीर चौराहे पर झुमके की रोटरी बनाने के लिए जगह कम पड़ गई थी। कर्मचारी नगर चौराहे पर भी अभी निर्णय नहीं हो पाया है। जल्द ही किसी चौराहे को झुमका चौराहा के रूप में विकसित करने के लिए तय कर लिया जाएगा।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए
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नौ जून को बीडीए ने डेलापीर चौराहे पर लटकने वाले झुमके की डिजाइन फाइनल की थी। डेलापीर चौराहे पर मुख्य फोकस में झुमका और साइड में सुरमा दानी और जरदोजी के लैंडस्कोप लटकाए जाने थे। 15 जून को वीसी डा. शशांक विक्रम सिंह के जाने के बाद बीडीए ने जगह कम बताकर डेलापीर चौराहे पर झुमका लटकाने का प्रस्ताव स्थगित कर दिया। बरेली-रामपुर हाइवे पर मिनी बाईपास पर झुमका चौराहा के रूप में विकसित करने की योजना बनी। बाद में ये भी रास नहीं आई। अब ये विचार भी स्थगित हो गया। बीडीए तय नहीं कर पा रहा है कि कौन से चौराहे को झुमका चौराहा के रूप में विकसित किया जाए। सेटेलाइट चौराहा, बीसलपुर चौराहा, सौ फुटा चौराहा, कर्मचारी नगर और रजऊ परसपुर चौराहे में किसी एक पर झुमका लटकाने का विचार चल रहा है। फिलहाल असमंजस के चलते बीडीए का झुमका किसी चौराहे पर लटकने के बजाय हवा में लटककर रह गया है।
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‘डेलापीर चौराहे पर झुमके की रोटरी बनाने के लिए जगह कम पड़ गई थी। कर्मचारी नगर चौराहे पर भी अभी निर्णय नहीं हो पाया है। जल्द ही किसी चौराहे को झुमका चौराहा के रूप में विकसित करने के लिए तय कर लिया जाएगा।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए
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