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नोटबंदी के पांच साल पूरे, कैशलेस ट्रांजेक्शन की पहुंच मुश्किल से 20 फीसदी तक
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नोटबंदी
- फोटो : SELF
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आठ नवंबर 2016 को बंद हुए थे 500 और 1000 के नोट, पढ़े लिखों को रास आ रही कैशलेस अर्थव्यवस्था
बैंकों की तरफ से वसूले जा रहे सर्विस चार्ज ने रोकी रफ्तार, अधिकतम दो प्रतिशत तक लगता है सर्विस टैक्स
लखीमपुर खीरी। नोटबंदी के आज पूरे पांच साल हो गए हैं। आज ही के दिन आठ नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने रात आठ बजे विमुद्रीकरण का एलान किया था। बताया गया था कि वित्तीय पारदर्शिता और कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया था, लेकिन इस चर्चित फैसले के बाद भी जनपद में कैशलेस अर्थव्यवस्था सफल नहीं हो पाई। अब भी कुल कारोबार का महज 15 से 20 फीसदी ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होता है। नोटबंदी के एलान के वक्त तो यह कुछ बेहतर चला, लेकिन कुछ महीने बाद ही ट्रांजेक्शन के नाम पर अधिकतम 2 प्रतिशत सर्विस टैक्स वसूलती हुई तो कैशलेस व्यवस्था फेल होने लगी।
जिले में नोटबंदी के पांच साल पूरे होने के बाद भी कैशलेश ट्रांजेक्शन सिर्फ 15 से 20 फीसदी ही पहुंच सका है। जनपद के बड़े कारोबारी बताते हैं कि नोटबंदी के एलान के बाद कुछ समय तक तो कैशलेस ट्रांजेक्शन में बूम रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रतिशत गिरता गया।
नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेश अर्थ व्यवस्था पर जोर दिया था, इसका असर भी हुआ। कैश क्त्रसइसेस की वजह से लोगों ने डिजिटल बैंकिंग अपनानी शुरू की, लेकिन कोविड काल में लॉकडाउन के दौरान डिजिटल बैंकिंग को नए आयाम मिले। आज स्थिति यह है कि देश की करीब 60 फीसदी अर्थ व्यवस्था कैशलेश यानी डिजिटल बैंकिंग पर आधारित हो चुकी है। डिजिटल बैंकिंग कैश लेन/देन की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित है। - बीएस राना, लीड बैंक, जिला प्रबंधक, लखीमपुर खीरी
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ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में सर्विस टैक्स कटकर आता है कैशबैक
नौरंगाबाद में आईओसी पेट्रोल पंप पर बतौर मैनेजर कार्यरत वीरेंद्र वर्मा बताते हैं कि उनके यहां हर दिन करीब डेढ़ लाख रुपयेे की सेल होती है, लेकिन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन महज 10/12 हजार तक ही पहुंच पाता है। वह बताते हैं कि ग्राहकों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के बाद जो कैशबेक मिलता है वह सर्विस टैक्स कटने के बाद मिलता है। यह सर्विस टैक्स अलग-अलग बैंक का अलग-अलग होता है। उन्होंने बताया कि ग्राहकों को अधिक सुविधा देने के लिए आईओसी ने खुद ही अपनी स्वाइप कार्ड मशीन लांच की है, जिससे ग्राहक से सर्विस टैक्स न लिया जाएगा और उसे फायदा होगा।
मूसाराम इंटरप्राइजेज के देशदीपक अग्रवाल बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से ऑनलाइन पेमेंट को लेकर लोग जागरूक हुए हैं। फिलहाल अभी इनका प्रतिशत बेहद कम है। पेट्रोल पंप पर करीब आठ से दस प्रतिशत और वाहन बिक्त्रस्ी पर पांच प्रतिशत लोग ही ई-पेमेंट करते हैं, जबकि अधिकतर लोग कैश पेमेंट ही करते हैं।
शिवम रेस्टोरेंट के रिषि नागर बताते हैं कि युवा वर्ग ई-पेमेंट को ज्यादा तवज्जो देते हैं। फिलहाल ई-पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए अभी लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। हमारे यहां करीब 25 प्रतिशत लोग ऑनलाइन पेमेंट करते हैं। इसमें आराम भी है।
फूलचंद्र गुप्ता प्रापर्टी डीलर के गौरव गुप्ता का कहना है कि हमारे कारोबार में अधिकतर लोग ऑनलाइन भुगतान ही करते हैं। कोई चेक से तो कोई आरटीजीएस के माध्यम से। नगद भुगतान सिर्फ प्रॉपटी खरीदने के लिए एडवांस के रूप में ही मिलती है। ई-पेमेंट से काफी सहूलियत मिली है।
शीतल प्रापर्टी डीलर के आशीष कुमार गुप्ता बताते हैं कि लोगों में ऑनलाइन भुगतान को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसी वजह से लोग ई- पेमेंट को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। वैसे भी यह बेहद सुविधा जनक है। हालांकि इसमें प्रति अभी लोगों में और जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
लाला काशीनाथ ज्वैलर्स के मैनेजर विमलेश भदौरिया बताते हैं कि ई- पेमेंट ज्यादा सुविधाजनक है। इसमें कैश लेकर चलने का झंझट नहीं है। करीब 40 प्रतिशत ग्राहक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि नेटवर्क समस्या के कारण कभी कभार दिक्कत आती है। इसमें सुधार की जरूरत है।
कैशलेस प्रणाली से लेन/देन में सुगमता है। पढ़े/लिखे लोग कार्ड से ही लेनदेन करने लगे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षा को देखते हुए कैशलेस प्रणाली बेहतर है। स्थानीय स्तर पर अधिकांश ग्राहक ग्रामीण है और डिजिटल की अच्छी जानकारी न होने से कैशलेस लेनदेन को रफ्तार नहीं मिल पाई है। - राजेश पुरवार, केमिस्ट एसोसिएशन महामंत्री गोला
बैंक जाकर लेनदेन करने में रिस्क रहता है। यूपीआई के काफी फायदे हैं। कोविड-19 के संक्त्रस्मण से बचाव में कैशलेस काफी अहम है। पढ़े-लिखे युवा गूगल पे, फोन पे, पेटीएम, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से लेनदेन कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद पांच वर्षों में 20 तक कैशलेस लेनदेन होने लगा है।
- संजय बंसल, प्रोपराइटर एसबी होंडा गोला
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बैंकों की तरफ से वसूले जा रहे सर्विस चार्ज ने रोकी रफ्तार, अधिकतम दो प्रतिशत तक लगता है सर्विस टैक्स
लखीमपुर खीरी। नोटबंदी के आज पूरे पांच साल हो गए हैं। आज ही के दिन आठ नवंबर 2016 को पीएम मोदी ने रात आठ बजे विमुद्रीकरण का एलान किया था। बताया गया था कि वित्तीय पारदर्शिता और कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया था, लेकिन इस चर्चित फैसले के बाद भी जनपद में कैशलेस अर्थव्यवस्था सफल नहीं हो पाई। अब भी कुल कारोबार का महज 15 से 20 फीसदी ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होता है। नोटबंदी के एलान के वक्त तो यह कुछ बेहतर चला, लेकिन कुछ महीने बाद ही ट्रांजेक्शन के नाम पर अधिकतम 2 प्रतिशत सर्विस टैक्स वसूलती हुई तो कैशलेस व्यवस्था फेल होने लगी।
जिले में नोटबंदी के पांच साल पूरे होने के बाद भी कैशलेश ट्रांजेक्शन सिर्फ 15 से 20 फीसदी ही पहुंच सका है। जनपद के बड़े कारोबारी बताते हैं कि नोटबंदी के एलान के बाद कुछ समय तक तो कैशलेस ट्रांजेक्शन में बूम रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रतिशत गिरता गया।
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नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेश अर्थ व्यवस्था पर जोर दिया था, इसका असर भी हुआ। कैश क्त्रसइसेस की वजह से लोगों ने डिजिटल बैंकिंग अपनानी शुरू की, लेकिन कोविड काल में लॉकडाउन के दौरान डिजिटल बैंकिंग को नए आयाम मिले। आज स्थिति यह है कि देश की करीब 60 फीसदी अर्थ व्यवस्था कैशलेश यानी डिजिटल बैंकिंग पर आधारित हो चुकी है। डिजिटल बैंकिंग कैश लेन/देन की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित है। - बीएस राना, लीड बैंक, जिला प्रबंधक, लखीमपुर खीरी
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ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में सर्विस टैक्स कटकर आता है कैशबैक
नौरंगाबाद में आईओसी पेट्रोल पंप पर बतौर मैनेजर कार्यरत वीरेंद्र वर्मा बताते हैं कि उनके यहां हर दिन करीब डेढ़ लाख रुपयेे की सेल होती है, लेकिन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन महज 10/12 हजार तक ही पहुंच पाता है। वह बताते हैं कि ग्राहकों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के बाद जो कैशबेक मिलता है वह सर्विस टैक्स कटने के बाद मिलता है। यह सर्विस टैक्स अलग-अलग बैंक का अलग-अलग होता है। उन्होंने बताया कि ग्राहकों को अधिक सुविधा देने के लिए आईओसी ने खुद ही अपनी स्वाइप कार्ड मशीन लांच की है, जिससे ग्राहक से सर्विस टैक्स न लिया जाएगा और उसे फायदा होगा।
मूसाराम इंटरप्राइजेज के देशदीपक अग्रवाल बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से ऑनलाइन पेमेंट को लेकर लोग जागरूक हुए हैं। फिलहाल अभी इनका प्रतिशत बेहद कम है। पेट्रोल पंप पर करीब आठ से दस प्रतिशत और वाहन बिक्त्रस्ी पर पांच प्रतिशत लोग ही ई-पेमेंट करते हैं, जबकि अधिकतर लोग कैश पेमेंट ही करते हैं।
शिवम रेस्टोरेंट के रिषि नागर बताते हैं कि युवा वर्ग ई-पेमेंट को ज्यादा तवज्जो देते हैं। फिलहाल ई-पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए अभी लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। हमारे यहां करीब 25 प्रतिशत लोग ऑनलाइन पेमेंट करते हैं। इसमें आराम भी है।
फूलचंद्र गुप्ता प्रापर्टी डीलर के गौरव गुप्ता का कहना है कि हमारे कारोबार में अधिकतर लोग ऑनलाइन भुगतान ही करते हैं। कोई चेक से तो कोई आरटीजीएस के माध्यम से। नगद भुगतान सिर्फ प्रॉपटी खरीदने के लिए एडवांस के रूप में ही मिलती है। ई-पेमेंट से काफी सहूलियत मिली है।
शीतल प्रापर्टी डीलर के आशीष कुमार गुप्ता बताते हैं कि लोगों में ऑनलाइन भुगतान को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसी वजह से लोग ई- पेमेंट को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। वैसे भी यह बेहद सुविधा जनक है। हालांकि इसमें प्रति अभी लोगों में और जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
लाला काशीनाथ ज्वैलर्स के मैनेजर विमलेश भदौरिया बताते हैं कि ई- पेमेंट ज्यादा सुविधाजनक है। इसमें कैश लेकर चलने का झंझट नहीं है। करीब 40 प्रतिशत ग्राहक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि नेटवर्क समस्या के कारण कभी कभार दिक्कत आती है। इसमें सुधार की जरूरत है।
कैशलेस प्रणाली से लेन/देन में सुगमता है। पढ़े/लिखे लोग कार्ड से ही लेनदेन करने लगे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षा को देखते हुए कैशलेस प्रणाली बेहतर है। स्थानीय स्तर पर अधिकांश ग्राहक ग्रामीण है और डिजिटल की अच्छी जानकारी न होने से कैशलेस लेनदेन को रफ्तार नहीं मिल पाई है। - राजेश पुरवार, केमिस्ट एसोसिएशन महामंत्री गोला
बैंक जाकर लेनदेन करने में रिस्क रहता है। यूपीआई के काफी फायदे हैं। कोविड-19 के संक्त्रस्मण से बचाव में कैशलेस काफी अहम है। पढ़े-लिखे युवा गूगल पे, फोन पे, पेटीएम, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से लेनदेन कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद पांच वर्षों में 20 तक कैशलेस लेनदेन होने लगा है।
- संजय बंसल, प्रोपराइटर एसबी होंडा गोला