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Bareilly News: सीने में जज्बा... हाथों में भाला, आलोक ने फेंका संघर्ष का ''''''''गोल्डन थ्रो''''''''
Sat, 13 Jun 2026 01:53 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 13 Jun 2026 01:53 AM IST
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बरेली। हौसले बुलंद हों और सीने में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो तंगहाली भी रास्ता नहीं रोक सकती। इसे सच कर दिखाया है अयोध्या के रहने वाले जेवलिन थ्रोअर (भाला फेंक) आलोक वर्मा ने। आलोक ने अभावों के बीच रहते हुए राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और अब तक एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया है। अब वह नेशनल प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं।
आलोक के पिता का आठ साल पहले निधन हो गया था। इससे घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। खेल प्रशिक्षण के लिए फीस भरना उनके लिए संभव नहीं था। उन्होंने यूट्यूब पर बरेली के कोच अजय कश्यप के निशुल्क प्रशिक्षण का वीडियो देखा। तीन महीने पहले वह बरेली आए और कोच की देखरेख में अभ्यास शुरू किया। घर से मिलने वाले दो-ढाई हजार रुपये से गुजारा मुश्किल था। इसलिए आलोक ने मजदूरी भी की। बरेली आने के बाद उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले भी उन्होंने राज्य स्तर पर एक रजत और एक कांस्य पदक जीता था। आलोक वर्मा का वर्तमान रिकॉर्ड 66 मीटर है। वह अब नेशनल प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि, उनके पास केवल 800 रुपये का कामचलाऊ भाला है। इस सस्ते भाले के कारण वह सही तकनीक से अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं।
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आलोक के पिता का आठ साल पहले निधन हो गया था। इससे घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। खेल प्रशिक्षण के लिए फीस भरना उनके लिए संभव नहीं था। उन्होंने यूट्यूब पर बरेली के कोच अजय कश्यप के निशुल्क प्रशिक्षण का वीडियो देखा। तीन महीने पहले वह बरेली आए और कोच की देखरेख में अभ्यास शुरू किया। घर से मिलने वाले दो-ढाई हजार रुपये से गुजारा मुश्किल था। इसलिए आलोक ने मजदूरी भी की। बरेली आने के बाद उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले भी उन्होंने राज्य स्तर पर एक रजत और एक कांस्य पदक जीता था। आलोक वर्मा का वर्तमान रिकॉर्ड 66 मीटर है। वह अब नेशनल प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि, उनके पास केवल 800 रुपये का कामचलाऊ भाला है। इस सस्ते भाले के कारण वह सही तकनीक से अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं।
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