भूमि अधिग्रहण घोटाला: घोटालेबाजों पर दर्ज हो सकती है एफआईआर, वसूली भी होगी
बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में करीब 50 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। इस मामले में एनएचएआई के दो अफसरों को निलंबित कर दिया गया है। अब विस्तृत जांच में पता चलेगा कि फर्जीवाड़े की फाइलों पर किसके-किसके हस्ताक्षर थे।
विस्तार
बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में 50 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब सभी को मुख्य सचिव के आदेश पर होने वाली विस्तृत जांच की प्रतीक्षा है। मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
दोषियों पर एफआईआर, निलंबन से लेकर सेवाएं समाप्त होने तक की कार्रवाई हो सकती है। जिन लोगों ने अधिक मुआवजा लिया है, उनसे वसूली भी हो सकती है। अगर वे रुपये जमा नहीं करते हैं तो एफआईआर में आरोपी बनेंगे।
एनएचएआई मुख्यालय की टीम ने अगस्त में प्रारंभिक जांच की थी। सात मामले पकड़े हैं। साइट इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और राजस्व विभाग के लेखपाल, भूमि अध्याप्ति अधिकारी के अमीन व कई राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने अपने दो अधिकारियों को निलंबित करने के साथ ही 23 अगस्त को मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विस्तृत जांच का आग्रह किया है। सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी आरपी सिंह का कहना है कि अगर सख्ती दिखाई गई तो गाजियाबाद की तर्ज पर यहां भी वसूली हो सकती है।
किसानों का 23 करोड़ रुपये का भुगतान फंसा
बरेली-सितारगंज हाईवे पर एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण के लिए बजट तो दिया, लेकिन किसानों के 23 करोड़ रुपये के भुगतान फंस गए। कहीं जमीन का अंश निर्धारित नहीं है तो कहीं किसान के खाते का नंबर सही अंकित नहीं है। कुछ मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस वजह से भुगतान में विलंब हो रहा है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के एक हिस्से के चौड़ीकरण के लिए नवाबगंज और सदर तहसील में जमीन का अधिग्रहण किया जाना था। भूमि अधिग्रहण के लिए 243 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इतने रुपये की जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है, लेकिन 23 करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं किया जा सका है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि जो मामले विवादित नहीं थे, उनका भुगतान कर दिया गया है।
घोटाले से जुड़ रहे क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय के तार
भू-अधिग्रहण घोटाले के तार क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय से यूं ही नहीं जुड़े हैं। तत्कालीन परियोजना निदेशक (पीडी) बीपी पाठक ने अधिग्रहण के मामलों में संविदा पर तैनात एक साइट इंजीनियर की भूमिका पर संदेह होने के बाद क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र भेजा था।
इसके बाद उन्हें हटाया गया था, लेकिन इसके बाद भी उन्हें क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय में तैनाती दे दी गई थी। क्षेत्रीय कार्यालय में सेवारत होने की वजह से वह बरेली-सितारगंज हाईवे परियोजना में भी दखल देते रहे।
इसके पीछे विभागीय अधिकारी कयास लगा रहे हैं कि क्षेत्रीय अधिकारी से कुछ न कुछ उनकी करीबी रही होगी। इसीलिए उनके बरेली से हटने के बाद क्षेत्रीय अधिकारी ने लखनऊ स्थित अपने कार्यालय में तैनात करा लिया था।
अब विधिक प्रक्रिया में फंसा रिंग रोड का सबसे बड़ा भुगतान
रिंग रोड के जिस सबसे बड़े भुगतान को लेकर फर्जीवाड़े की बात कही जा रही थी, अब वह विधिक प्रक्रिया में अटक गया है। सरनिया में गाटा संख्या 156 के अधिग्रहण के बदले 12 करोड़ रुपये मुआवजा बनने का मामला एनएचएआई की ओर से आर्बिटेशन दाखिल होने से डीएम की अदालत तक पहुंच गया।
झुमका तिराहे से रामगंगा तिराहे तक 18 और रजऊ परसपुर से लाल फाटक तक 12 किलोमीटर रिंग रोड बनना प्रस्तावित है। दोनों हिस्सों को मिलाकर 21 गांवों की जमीन ली जानी है। इसमें सरनिया गांव के गाटा संख्या 156 की छह बीघा जमीन के बदले 12 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित था। एनएचएआई इससे सहमत नहीं है। इसीलिए आर्बिटेशन दाखिल किया है।