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शरीर में मौजूद जीवाणुओं पर निर्भर होती कोविड 19 से लड़ने की क्षमता
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बरेली। शरीर में मौजूद जीवाणुओं पर निर्भर होता है कि किसी व्यक्ति में कोविड-19 जैसी महामारी से लड़ने की कितनी क्षमता है। सोमवार को जीवाणु जनित रोगों के वैज्ञानिक संगठन इंडियन एसोसिएशन ऑफ वेटेरिनरी माइक्रोबायोलॉजिस्ट एंड स्पेशलिस्ट इन्फेक्शन यानी आईएवीएमए के तत्वावधान में रोग प्रतिरोधकता एवं टीकाकरण विषय पर आयोजित वेबिनार में वैज्ञानिकों ने इस महत्वपूर्ण रिसर्च को साझा किया। इस दौरान भारत में जल्द ही कोरोना वैक्सीन बनने की उम्मीद भी जताई गई। कोरोना से बचाने के लिए बाजार में मौजूद सैनिटाइजर की गुणवत्ता की जांच करने का भी सुझाव दिया गया।
वेबिनार में शामिल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिक डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने कहा कि शरीर में मौजूद अच्छे जीवाणु रोग प्रतिरोधक क्षमता तय करते हैं, इसीलिए लोगों पर रोग का प्रभाव भिन्न-भिन्न होता है। जीवाणु व्यक्ति के पेट, आंतों और आमाशय में पाए जाते हैं। इनकी संख्या एवं प्रकार मनुष्य के खानपान से प्रभावित होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता इन जीवाणुओं से ही प्रभावित होती है। वेबिनार में वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता एवं निर्यातक देश है। शीघ्र ही भारत में कोरोना प्रतिरोधी स्वदेशी टीका उपलब्ध हो जाएगा।
इस दौरान पशुओं में गलाघोटू, खुरपका और मुंहपका की संयुक्त वैक्सीन के लिए समिति के गठन की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता के मानक भी तय किए जा रहे हैं। इसके लिए आयुष और पशुपालन मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। वेबिनार के अंत में सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व कुलपति डॉ. एमपी यादव ने कोविड के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने और इसके लिए प्रयुक्त हो रहे सैनिटाइजर की गुणवत्ता तय करने का सुझाव दिया। वेबिनार के मुख्य अतिथि डॉ. पीके उप्पल एवं सह मुख्य अतिथि एनिमल हसबेंडरी कमिश्नर डॉ. प्रवीण मलिक रहे।
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वेबिनार में शामिल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिक डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने कहा कि शरीर में मौजूद अच्छे जीवाणु रोग प्रतिरोधक क्षमता तय करते हैं, इसीलिए लोगों पर रोग का प्रभाव भिन्न-भिन्न होता है। जीवाणु व्यक्ति के पेट, आंतों और आमाशय में पाए जाते हैं। इनकी संख्या एवं प्रकार मनुष्य के खानपान से प्रभावित होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता इन जीवाणुओं से ही प्रभावित होती है। वेबिनार में वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता एवं निर्यातक देश है। शीघ्र ही भारत में कोरोना प्रतिरोधी स्वदेशी टीका उपलब्ध हो जाएगा।
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इस दौरान पशुओं में गलाघोटू, खुरपका और मुंहपका की संयुक्त वैक्सीन के लिए समिति के गठन की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता के मानक भी तय किए जा रहे हैं। इसके लिए आयुष और पशुपालन मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। वेबिनार के अंत में सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व कुलपति डॉ. एमपी यादव ने कोविड के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने और इसके लिए प्रयुक्त हो रहे सैनिटाइजर की गुणवत्ता तय करने का सुझाव दिया। वेबिनार के मुख्य अतिथि डॉ. पीके उप्पल एवं सह मुख्य अतिथि एनिमल हसबेंडरी कमिश्नर डॉ. प्रवीण मलिक रहे।
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