{"_id":"5dc1d2128ebc3e5b4d2e624e","slug":"feaver-bareilly-news-bly3828292126","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण की मार- हवा खराब हुई तो आंखों में जलन और गले में खराश बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण की मार- हवा खराब हुई तो आंखों में जलन और गले में खराश बढ़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों की आंखों में जलन की समस्या पैदा कर दी है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग और युवा तक इससे प्रभावित है। डॉक्टरों का कहना है कि वायु प्रदूषण से शरीर का हर अंग प्रभावित हो रहा है। ऐसे में आंखों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिला अस्पताल में इस समय आंखों में जलन, गले में खराश और सांस रोगी 100-120 की संख्या में पहुंच रहे हैं। सीएमएस टीएस आर्या ने बताया कि कंस्ट्रक्शन एक्टीविटीज के चलते हवा में धूल मिट्टी जमा हो गई है। खतरनाक गैसों के कणों के साथ मिलकर धूल के कण पर्यावरण में ठहर जाते हैं। यही स्मॉग का रूप ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण आंखों में परेशानी तो बढ़ी है, लेकिन इसे बार-बार साफ करना भी खतरनाक है। क्योंकि जितनी बार पानी से आंखों को साफ किया जाता है, आंखों को फायदा पहुंचाने वाली लेयर कम होे जाती है। वहीं प्रदूषण के चलते सांस, अस्थमा, निमोनिया, खांसी और जुकाम व चक्कर आने जैसे मरीज भी बढ़े हैं। इस समय रोजाना ऐसे ही करीब 400-450 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकाें का कहना है कि पर्यावरण में गैस का आवरण छाया हुआ है। यह स्मॉग है, जो सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा रहा है। दूषित हवा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है। चिकित्सकों की सलाह है कि ऐसे में बिना मॉस्क के बाहर न निकले और सुबह-शाम टहलने से बचें।
बचाव
बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा लगाएं। बिना डाक्टर की सलाह के आंखों में कोई दवा न डालें। अधिक प्रदूषण हो तो घर से निकलने से बचें और जलन, खुजली, सूजन की समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल में इस समय आंखों में जलन, गले में खराश और सांस रोगी 100-120 की संख्या में पहुंच रहे हैं। सीएमएस टीएस आर्या ने बताया कि कंस्ट्रक्शन एक्टीविटीज के चलते हवा में धूल मिट्टी जमा हो गई है। खतरनाक गैसों के कणों के साथ मिलकर धूल के कण पर्यावरण में ठहर जाते हैं। यही स्मॉग का रूप ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण आंखों में परेशानी तो बढ़ी है, लेकिन इसे बार-बार साफ करना भी खतरनाक है। क्योंकि जितनी बार पानी से आंखों को साफ किया जाता है, आंखों को फायदा पहुंचाने वाली लेयर कम होे जाती है। वहीं प्रदूषण के चलते सांस, अस्थमा, निमोनिया, खांसी और जुकाम व चक्कर आने जैसे मरीज भी बढ़े हैं। इस समय रोजाना ऐसे ही करीब 400-450 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकाें का कहना है कि पर्यावरण में गैस का आवरण छाया हुआ है। यह स्मॉग है, जो सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा रहा है। दूषित हवा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है। चिकित्सकों की सलाह है कि ऐसे में बिना मॉस्क के बाहर न निकले और सुबह-शाम टहलने से बचें।
विज्ञापन
बचाव
बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा लगाएं। बिना डाक्टर की सलाह के आंखों में कोई दवा न डालें। अधिक प्रदूषण हो तो घर से निकलने से बचें और जलन, खुजली, सूजन की समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
विज्ञापन