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पिता ने चाय का ठेला लगाया, खुद ने ट्यूशन पढ़ाया, यूपीएससी में परचम लहराया

Thu, 06 Aug 2020 02:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2020 02:05 AM IST
सार

आईपीएस बनकर देश सेवा करना चाहते हैं हिमांशु गुप्ता
 

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Father bargains for tea, teaches tuition on his own, hoists high in UPSC
अपने परिवार के साथ हिमांशु। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विस्तार

अपने लाल की कामयाबी पर खुशी में झूमा सिरौली, हिमांशु ने छोटे से गांव से लिखी कामयाबी की इबारत

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 बरेली/ सिरौली। यूूपीएससी तक का सफर हिमांशु के लिए आसान नहीं था। बचपन का दौर पिता चाय का ठेला लगाते देखते गुजरा जिसमें पांच सदस्यों के परिवार का खर्च पूरा होना ही मुश्किल था लेकिन खराब हालात में भी हिमांशु ने हार नहीं मानी और अपनी प्रतिभा के दम पर दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला पाया। यहां मिली स्कालरशिप के साथ ट्यूशन पढ़ाकर उन्होंने न सिर्फ स्नातक की पढ़ाई की, सिविल सर्विसेज की तैयारी भी करते रहे। 2016 में डीयू से स्नातक में गोल्ड मेडल लिया और 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास की। कम रैंक की वजह से चयन भारतीय रेल सेवा में हुआ तो हिमांशु संतुष्ट नहीं हुए। 2019 में दोबारा परीक्षा दी और रिजल्ट आया तो 588 वीं रैंक के साथ उनका आईपीएस बनने का सपना भी पूरा हो गया।
देश की प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा में लगातार दो बार सफलता हासिल करने वाले हिमांशु इन दिनों भारतीय रेल सेवा का प्रशिक्षण ले रहे हैं। मंगलवार को रिजल्ट आया तो वह बड़ी बहन दीक्षा की ससुराल में रामपुर में थे। बुधवार को गांव लौटे हिमांशु ने बताया कि पिछली बार उनका चयन भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन सेवा में हुआ था। वह बनना तो आईएएस या आईपीएस चाहते थे लेकिन फिर भी भारतीय रेल सेवा का प्रशिक्षण लेने के साथ फिर यूपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी। उनके पिता संतोष गुप्ता अब गांव में ही जनरल स्टोर चलाते हैं। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए हिमांशु ने बताया कि उनका बहुत कठिन दौर से गुजरा है। बचपन उत्तराखंड के सितारगंज में गुजरा लेकिन करीब 16 साल पहले परिवार सिरौली में आकर बस गया। यहां पिता को चाय का ठेला लगाना पड़ा। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई। इसके बाद कक्षा नौ से इंटर तक आंवला के बाल विद्या पीठ में पढ़े। इसके लिए उन्हें रोज 70 किमी का सफर करना पड़ता था।
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इंटर में अच्छे प्रदर्शन के बाद हिमांशु को दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला मिल गया। वहां भी हिमांशु ने बीए में गोल्ड मेडल हासिल किया। यूपीएससी में हिमांशु को 2018 में सफलता मिली। इससे पहले उन्होंने तीन बार नेट की परीक्षा पास की। हिमांशु के मुताबिक उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के लिए कोई कोचिंग नहीं ली। स्वाध्याय को ही प्रमुख अस्त्र बनाया। रोजाना छह से आठ घंटे तक वह पूरी मेहनत और एकाग्रता के साथ अध्ययन करते थे। अब यूपीएससी में 588 वीं रैंक हासिल करने पर वह खुश हैं। उनकी सफलता पर पिता संतोष गुप्ता, मां चंचल और बहनें दीक्षा व मुस्कान बेहद खुश हैं।
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