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Bareilly News: पिता और भाई थे भट्ठा मजदूर, जाफरी ने बनाया करोड़ों का साम्राज्य
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नेताओं के वरद हस्त ने बनाया शिक्षा माफिया, अब सामने आ रहे काले कारनामे
बरेली। शेर अली जाफरी के अतीत के पन्ने पलटें तो बेहद स्याह तस्वीर सामने आती है। मुफलिसी के दौर में शुरुआती संघर्ष और फिर जुगाड़ व नेताओं के वरदहस्त से वह शिक्षा माफिया बन बैठा। अब उसके काले कारनामे सामने आ रहे हैं।
मीरगंज क्षेत्र के मूल निवासी मेहंदी अली जाफरी सीबीगंज के चंदपुर जोगियान में आकर बस गए थे। उनके तीन बेटे शेर अली जाफरी, असगर अली जाफरी, जबर अली जाफरी हैं। बताते हैं कि शुरुआत में इनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। जाफरी के पिता और भाई ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते थे। अमीर खुसरो के नाम पर एक प्राथमिक स्कूल से शुरुआत करने वाले जाफरी की पहचान अंजू अग्निहोत्री से हुई जो एकता पब्लिक स्कूल चलाती थीं।
अंजू की बदौलत जाफरी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संचालित योजनाओं से धन लिया। पहले खुसरो इंटर कॉलेज बनाया। काफी समय तक जाफरी ने इंटर काॅलेज की मान्यता लेकर छात्रों को पास कराने का ठेका लेने व उनकी मार्कशीट-टीसी बनाने का काम किया। नकल के लालच में अन्य कॉलेजों के छात्र भी खुसरो इंटर कॉलेज से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का फार्म भरने लगे। इससे अच्छी कमाई हुई तो जाफरी ने डिग्री कॉलेज खोल लिया।
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कई जिलों तक फैला है जाफरी का नेटवर्क
शेर अली ने कई कॉलेज और संस्थान खोले। वह ठगी की बुनियाद पर किले बनाता रहा। जाफरी का नेटवर्क कई जिलों में फैला हुआ है। पीलीभीत के जहानाबाद में जाफरी का काॅन्वेंट कॉलेज है। बदायूं के बगरैन में भी जाफरी का कॉलेज है। इसके अलावा भी कई जिलों में जाफरी की संपत्तियां हैं। एसआईटी को आशंका है कि शेर अली जाफरी ने बरेली के अलावा दूसरे जिलों के छात्रों को भी फर्जी डिग्री थमाई होगी। कार्रवाई के बाद और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। शेर अली जाफरी के अतीत के पन्ने पलटें तो बेहद स्याह तस्वीर सामने आती है। मुफलिसी के दौर में शुरुआती संघर्ष और फिर जुगाड़ व नेताओं के वरदहस्त से वह शिक्षा माफिया बन बैठा। अब उसके काले कारनामे सामने आ रहे हैं।
मीरगंज क्षेत्र के मूल निवासी मेहंदी अली जाफरी सीबीगंज के चंदपुर जोगियान में आकर बस गए थे। उनके तीन बेटे शेर अली जाफरी, असगर अली जाफरी, जबर अली जाफरी हैं। बताते हैं कि शुरुआत में इनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। जाफरी के पिता और भाई ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते थे। अमीर खुसरो के नाम पर एक प्राथमिक स्कूल से शुरुआत करने वाले जाफरी की पहचान अंजू अग्निहोत्री से हुई जो एकता पब्लिक स्कूल चलाती थीं।
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अंजू की बदौलत जाफरी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संचालित योजनाओं से धन लिया। पहले खुसरो इंटर कॉलेज बनाया। काफी समय तक जाफरी ने इंटर काॅलेज की मान्यता लेकर छात्रों को पास कराने का ठेका लेने व उनकी मार्कशीट-टीसी बनाने का काम किया। नकल के लालच में अन्य कॉलेजों के छात्र भी खुसरो इंटर कॉलेज से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का फार्म भरने लगे। इससे अच्छी कमाई हुई तो जाफरी ने डिग्री कॉलेज खोल लिया।
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कई जिलों तक फैला है जाफरी का नेटवर्क
शेर अली ने कई कॉलेज और संस्थान खोले। वह ठगी की बुनियाद पर किले बनाता रहा। जाफरी का नेटवर्क कई जिलों में फैला हुआ है। पीलीभीत के जहानाबाद में जाफरी का काॅन्वेंट कॉलेज है। बदायूं के बगरैन में भी जाफरी का कॉलेज है। इसके अलावा भी कई जिलों में जाफरी की संपत्तियां हैं। एसआईटी को आशंका है कि शेर अली जाफरी ने बरेली के अलावा दूसरे जिलों के छात्रों को भी फर्जी डिग्री थमाई होगी। कार्रवाई के बाद और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। अमर उजाला ब्यूरो