फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Farmers are not accepting the compensation rate, the ball is in the government's court.

Bareilly News: किसानों को मंजूर नहीं मुआवजे की दर, शासन के पाले में गेंद

Sat, 22 Aug 2026 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 01:18 AM IST
विज्ञापन
Farmers are not accepting the compensation rate, the ball is in the government's court.
बरेली। आवास विकास परिषद की परसाखेड़ा आवासीय योजना आगे नहीं बढ़ पा रही। जिला प्रशासन की ओर से तय की गई मुआवजे की दर सात गांवों के किसानों को मंजूर नहीं है। अब शासन ने संबंधित गांवों में वर्ष 2011 से 2013 तक हुई रजिस्टि्रयों का ब्योरा तलब किया है। इसी के आधार पर औसत दर का आंकलन कर चार हजार काश्तकारों को शहरी क्षेत्र में दोगुना व ग्रामीण में चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।
विज्ञापन

वर्ष 2011 से चल रही परसाखेड़ा आवासीय योजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया काफी समय से विवादों में उलझी हुई है। गांव धंतिया, ट्यूलिया, हमीरपुर, मिलक इमामगंज, बोहित, बल्लियां, फरीदापुर के चार हजार काश्तकारों से 520 हेक्टेयर भूमि ली जानी है। प्रशासन की ओर से तय दरों पर काश्तकार जमीन देने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
विज्ञापन

जिलाधिकारी की ओर से मुआवजे की दर तय कर 22 अप्रैल को शासन को भेजी गई थी। वहां आवास विकास परिषद के बोर्ड की बैठक में तय किया गया कि वर्ष 2011 से 2013 तक इन सात गांवों में हुई रजिस्टि्रयों का मिलान कर औसत दर का निर्धारण किया जाए। वर्तमान में प्रशासन की ओर से ट्यूलिया में 36 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा तय किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसानों ने जताई असहमति
डीएम की तरफ से तय दरों से असहमत हूं। आबादी से सटी जमीन की श्रेणी को खत्म कर दिया गया है। चकरोड के किनारे की भूमि का भी रेट अलग होता है। इसका भी पालन नहीं किया जा रहा है। - गेंदनलाल, ट्यूलिया
डीएम की तरफ से तय की गई दर से काश्तकारों को काफी नुकसान हो रहा है। इससे सहमत होने का सवाल ही नहीं उठता। शासन की ओर से भूमि अधिग्रहण की नई दर निर्धारित की जाए। - प्रेमपाल, धंतिया

वर्जन
जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई दरों पर आपत्ति करते हुए बोर्ड ने वर्ष 2011 से 2013 तक इन गांवों में हुई रजिस्टि्रयों का ब्योरा तलब किया है। इसके आधार पर औसत दर का आकलन कर किसानों को मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। - राजेंद्रनाथ राम, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed