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नकली कीटनाशक लागत भी डकार रहे किसानों की
बरेली
Updated Sun, 16 Jul 2017 01:15 AM IST
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शहर और ग्रामीण इलाकों में नकली कीटनाशक की बिक्री से किसान तबाह हो रहे हैं। कृषि विभाग जानबूझकर भी अनजान है। शासन की सख्ती से तीन महीनों में दो बार 88 दुकानों पर टीम बनाकर छापेमारी की गई। इसमें 15 से ज्यादा खाद और कीटनाशक संदिग्ध मिले। इन दुकानदारों के लाइसेंस निलंबित भी किए गए, मगर दुकानें तो फिर भी खुल रही हैं। अक्सर छापेमारी में कमियां मिलने पर दुकानदारों के लाइसेंस निलंबित कर दिए जाते हैं। माहौल शांत होते ही रासायनिक और कीटनाशक विक्रेता जुगाड़ लगाकर लाइसेंस फिर बहाल करा लेते हैं। नकली खाद बीज बेचने वाले किसी भी दुकानदार पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
किसानों की आय दो गुनी करने के नाम पर कृषि विभाग ने इस साल 16 किसान गोष्ठियां कराने का दावा किया। हकीकत में ज्यादातर किसान गोष्ठियों में गिने चुने किसानों को बुलाकर खानापूरी कर प्रति गोष्ठी 15 हजार रुपये का खर्च दर्शा दिया गया। कृषि रक्षा इकायों से किसानों को सब्सिडी पर सीजन की सब्जियों, फलों के बीच उपलब्ध नहीं होते। जिला योजना की बैठक में प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक ने जब कृषि विभाग के अफसरों से सरकारी अनुदान पाने वाले किसानों की सूची मांगी थी तो वह सूची उनको उपलब्ध नहीं कराई गई। कीटनाशक कंपनी के अफसर सत्येंद्र सिंह के अलावा दूर दराज के किसान भी स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि बाजार में नकली खाद और कीटनाशक लाइसेंस धारक दुकानदार खुलेआम बेचते हैं, लेकिन छापामार कार्रवाई में उनको जानबूझकर छोड़ दिया जाता है।
नकली कीटनाशक की कहानी, किसानों की जुबानी
फोटो--
हम सिंघाई मोड़ की दुकान से एमेडा, एसीटा और एम-45 खरीदकर लाए। उसका वैसे स्प्रे किया जैसे दुकानदार ने बताया था। मगर, फसल को कोई फायदा नहीं हुआ। सात हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। कपिल सिंह, किसान फैजनगर
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गन्ना और धान की फसल में लगाने के लिए नवाबगंज से मशेटी और कीटनाशक खरीदकर लाए। स्प्रे करने के बाद भी पौधे की पत्तियां पीली पड़ती रहीं। शिकायत भी की लेकिन दुकानदार बोला- गलत तरीके से स्प्रे किया होगा- सर्वेश गंगवार, किसान बरखन
फोटो--
सब्जी में बरसाती कीड़ा लग गया था। इससे पौधे सूखने लगे थे। हम बाजार से दुकानदार से पूछकर छिड़ने के लिए कीटनाशक खरीदकर लाए। स्प्रे करने के बाद भी फायदा नहीं मिला। पता नहीं चलता कि कौन सी दवा असली है कौन सी नकली- श्याम बिहारी लाल, किसान केलाखाड़ी
फोटो--
हम लोग खेती में रबी और खरीफ में लगने वाले रोगों के बारे में अगर कृषि रक्षा इकाई गोदाम से संपर्क करते हैं तो वहां ठीक से बात नहीं की जाती। कम पढ़े लिखे किसानों को दुकानदार अपना नकली माल बेचकर फायदा उठाते हैं। दुकानों पर ठीक से छापेमारी नहीं होती- राजपाल, किसान गांव चेना
अमर उजाला इंपैक्ट (आज का पीडीएफ)
कृषि विभाग की टीम जानेगी ‘गुमना’ रोग की वजह
पेठा की खेती प्रभावित होने की खबर का लिया संज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। पेठा (कुम्हड़ा) की खेती में ‘गुमना’ रोग लगने की वजह से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से लंबे समय से सो रहा कृषि विभाग भी आखिरकार हरकत में आ ही गया। कृषि विभाग के स्टाफ ने फैज नगर के पीड़ित किसान कपिल सिंह चौधरी से इस रोग के बारे में फोन से जानकारी ली। साथ ही ये भी कहा कि वह ‘गुमना’ रोग से फसल को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग की टीम गांव भेजेंगे।
अमर उजाला ने 15 जुलाई के अंक में ‘पेठे की मिठास गुम न कर दे गुमना’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर पेठा (कुम्हड़ा) की फसल में ये रोग लगने का मामला उठाया था। जिसमें ये बताया गया था कि आगरा को हर साल सप्लाई होने वाले कच्चे पेठे में इस बार गुमना रोग लगने से फसल उत्पादन आधे से भी कम रहने की आशंका है। इस समाचार का संज्ञान लेते हुए जिला कृषि अधिकारी डा. रामतेज यादव ने फरीदपुर, भुता और बिथरी ब्लाकों में कच्चे पेठे (कुम्हड़ा) की खेती करने वाले किसानों से मिलकर उनकी समस्या जानने के लिए कृषि रक्षा इकाईयों के गोदाम इंचार्जों के अलावा कृषि वैज्ञानिकों को भी मौके पर भेजने के निर्देश दिए। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि वह जिले से बाहर हैं लेकिन पेठे में ये रोग फैल रहा है तो चिंता की बात है। जिन किसानों की फसल ‘गुमना’ रोग से प्रभावित है, वह स्थानीय स्तर पर कृषि रक्षा इकाइयों से संपर्क करें और विशेषज्ञों की सलाह पर ही कीटनाशक खरीदें। ग्रामीण इलाकोें में अनजाने दुकानदारों से कीटनाशक या बीज न खरीदें। अगर किसानों को कहीं कोई दिक्कत आए तो विकास भवन मुख्यालय पर आकर सीधे उनसे या सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। उसमें किसानों की पूरी सहायता की जाएगी।
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किसानों की आय दो गुनी करने के नाम पर कृषि विभाग ने इस साल 16 किसान गोष्ठियां कराने का दावा किया। हकीकत में ज्यादातर किसान गोष्ठियों में गिने चुने किसानों को बुलाकर खानापूरी कर प्रति गोष्ठी 15 हजार रुपये का खर्च दर्शा दिया गया। कृषि रक्षा इकायों से किसानों को सब्सिडी पर सीजन की सब्जियों, फलों के बीच उपलब्ध नहीं होते। जिला योजना की बैठक में प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक ने जब कृषि विभाग के अफसरों से सरकारी अनुदान पाने वाले किसानों की सूची मांगी थी तो वह सूची उनको उपलब्ध नहीं कराई गई। कीटनाशक कंपनी के अफसर सत्येंद्र सिंह के अलावा दूर दराज के किसान भी स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि बाजार में नकली खाद और कीटनाशक लाइसेंस धारक दुकानदार खुलेआम बेचते हैं, लेकिन छापामार कार्रवाई में उनको जानबूझकर छोड़ दिया जाता है।
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नकली कीटनाशक की कहानी, किसानों की जुबानी
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हम सिंघाई मोड़ की दुकान से एमेडा, एसीटा और एम-45 खरीदकर लाए। उसका वैसे स्प्रे किया जैसे दुकानदार ने बताया था। मगर, फसल को कोई फायदा नहीं हुआ। सात हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो गए। कपिल सिंह, किसान फैजनगर
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गन्ना और धान की फसल में लगाने के लिए नवाबगंज से मशेटी और कीटनाशक खरीदकर लाए। स्प्रे करने के बाद भी पौधे की पत्तियां पीली पड़ती रहीं। शिकायत भी की लेकिन दुकानदार बोला- गलत तरीके से स्प्रे किया होगा- सर्वेश गंगवार, किसान बरखन
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सब्जी में बरसाती कीड़ा लग गया था। इससे पौधे सूखने लगे थे। हम बाजार से दुकानदार से पूछकर छिड़ने के लिए कीटनाशक खरीदकर लाए। स्प्रे करने के बाद भी फायदा नहीं मिला। पता नहीं चलता कि कौन सी दवा असली है कौन सी नकली- श्याम बिहारी लाल, किसान केलाखाड़ी
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हम लोग खेती में रबी और खरीफ में लगने वाले रोगों के बारे में अगर कृषि रक्षा इकाई गोदाम से संपर्क करते हैं तो वहां ठीक से बात नहीं की जाती। कम पढ़े लिखे किसानों को दुकानदार अपना नकली माल बेचकर फायदा उठाते हैं। दुकानों पर ठीक से छापेमारी नहीं होती- राजपाल, किसान गांव चेना
अमर उजाला इंपैक्ट (आज का पीडीएफ)
कृषि विभाग की टीम जानेगी ‘गुमना’ रोग की वजह
पेठा की खेती प्रभावित होने की खबर का लिया संज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। पेठा (कुम्हड़ा) की खेती में ‘गुमना’ रोग लगने की वजह से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से लंबे समय से सो रहा कृषि विभाग भी आखिरकार हरकत में आ ही गया। कृषि विभाग के स्टाफ ने फैज नगर के पीड़ित किसान कपिल सिंह चौधरी से इस रोग के बारे में फोन से जानकारी ली। साथ ही ये भी कहा कि वह ‘गुमना’ रोग से फसल को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग की टीम गांव भेजेंगे।
अमर उजाला ने 15 जुलाई के अंक में ‘पेठे की मिठास गुम न कर दे गुमना’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर पेठा (कुम्हड़ा) की फसल में ये रोग लगने का मामला उठाया था। जिसमें ये बताया गया था कि आगरा को हर साल सप्लाई होने वाले कच्चे पेठे में इस बार गुमना रोग लगने से फसल उत्पादन आधे से भी कम रहने की आशंका है। इस समाचार का संज्ञान लेते हुए जिला कृषि अधिकारी डा. रामतेज यादव ने फरीदपुर, भुता और बिथरी ब्लाकों में कच्चे पेठे (कुम्हड़ा) की खेती करने वाले किसानों से मिलकर उनकी समस्या जानने के लिए कृषि रक्षा इकाईयों के गोदाम इंचार्जों के अलावा कृषि वैज्ञानिकों को भी मौके पर भेजने के निर्देश दिए। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि वह जिले से बाहर हैं लेकिन पेठे में ये रोग फैल रहा है तो चिंता की बात है। जिन किसानों की फसल ‘गुमना’ रोग से प्रभावित है, वह स्थानीय स्तर पर कृषि रक्षा इकाइयों से संपर्क करें और विशेषज्ञों की सलाह पर ही कीटनाशक खरीदें। ग्रामीण इलाकोें में अनजाने दुकानदारों से कीटनाशक या बीज न खरीदें। अगर किसानों को कहीं कोई दिक्कत आए तो विकास भवन मुख्यालय पर आकर सीधे उनसे या सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। उसमें किसानों की पूरी सहायता की जाएगी।