स्वच्छ भारत मिशन: 50 ग्राम पंचायतों की अनोखी पहल, खुद की कमाई से कायम की मिसाल
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स्वच्छ भारत मिशन में सरकारी सिस्टम भले ही जनता की उम्मीदों पर खरा न उतरा हो। मगर, बरेली की 50 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने सरकारी सिस्टम को दरकिनार करते हुए अपनी आमदनी से गांव के प्राइमरी स्कूलों में सात से आठ लाख की लागत से मॉडल शौचालय बनाकर औरों के लिए मिसाल पेश की है। पंचायतों की इस पहल से आसपास के प्रधान भी प्रेरणा लेकर मॉडल शौचालय बनाने के प्रयासों में लगे हैं।
बिथरी चैनपुर, मोहनपुर ठिरिया, भोजीपुरा का अटापट्टी सुनाली, भमौरा, फरीदपुर की पंचायत नगरिया कला समेत जनपद की 50 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने अपने प्राइमरी स्कूलों में खुद की आमदनी से सात से आठ लाख का बजट इकट्ठा कराकर मॉडल शौचालय बनाए। स्कूलों में इन शौचालयों को बाल मित्र शौचालय के नाम से जाना जाता है।
इन शौचालयों का इस्तेमाल प्राइमरी या जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ही करते हैं। खास बात यह कि बाल मित्र शौचालयों की सफाई के लिए प्रधानाध्यापक और प्रधान से लेकर अभिभावकों की कमेटी सजग भी रहती है।
पंचायत के सफाई कर्मचारी गांव की सफाई शुरू करने से पहले स्कूलों में जाकर इन शौचालयों की सफाई करते हैं। ऐसे शौचालयों से बच्चे और ग्रामीण दोनों ‘फील गुड’ महसूस कर रहे हैं।
हमारी पंचायत ने अपनी आमदनी से आठ से नौ लाख रुपये लगाकर उसे मॉडल के रूप में बनाया है। हर उम्र के बच्चों के लिए अलग से यूरिनल है। लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय बने हैं। बाकी पंचायतें भी हमसे कंपटीशन करके बेहतर काम कर सकती हैं। - बबली देवी, प्रधान भुता
50 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने अपना फंड इकट्ठा करके प्राइमरी स्कूलों में इतने शानदार शौचालय बनाए हैं कि ऐसे शौचालय शहरों में नहीं हैं। हम चाहते हैं कि जनपद की सभी 1193 पंचायतें पहल करके कम से एक मॉडल शौचालय बनाकर बरेली को नंबर एक पर लेकर आएं। - विनय कुमार, डीपीआरओ