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Bareilly News: मिर्गी का इलाज मुमकिन फिर भी मिथक बन रहे सबसे बड़ी बाधा
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बरेली। समय से इलाज हो तो मिर्गी का सौ फीसदी इलाज मुमकिन है। बावजूद रोगी समाज की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पा रहे हैं। इसकी वजह जागरूकता का अभाव और समाज में फैले मिथक हैं। मिर्गी ऊपरी चक्कर नहीं बल्कि न्यूरोलॉजिकल समस्या है।
जिला अस्पताल स्थित मन कक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, कई परिवार मरीज को छिपाने की कोशिश करते हैं। इससे उसका आत्मविश्वास प्रभावित होता है। वह सामाजिक गतिविधियों से दूर हो जाता है।
स्कूल में भी मिर्गी से पीड़ित बच्चों को अक्सर अलग नजर से देखा जाता है। जबकि शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना चाहिए ताकि ऐसे बच्चों को समान अवसर मिले। इसके अलावा कई कंपनियां भी मिर्गी मरीजों को नौकरी देने में हिचकिचाती हैं, जबकि नियमित दवा लेने वाले ज्यादातर मरीज सामान्य कार्य में सक्षम होते हैं।
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बताया कि परिवार और समाज की सकारात्मक भूमिका ही इस समस्या के समाधान की कुंजी है। मरीज को भावनात्मक समर्थन देना, उसे सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल करना और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तभी फैले डर और भ्रांतियों को खत्म कर सकते हैं।
मिर्गी आए तो सुरक्षित स्थान पर लिटाएं
मरीज को दौरे के समय सुरक्षित स्थान पर लिटाएं, मुंह में कुछ न डालें, सिर के नीचे तकिया या कोई आरामदायक सामान रखें। ताकि उसे चोट न लगे। गंभीर चोट लगने से स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉ. आशीष के मुताबिक, मिर्गी रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल, गांव, कार्यस्थलों पर जागरूकता अभियान चलें। परिवार या समाज मरीज को शर्मिंदा न करें। छिपाने के बजाय खुलकर सहयोग करें। वैवाहिक और सामाजिक कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की जाए। सही समय पर जांच, इलाज और नियमित दवा का सेवन जरूरी है।
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जिला अस्पताल स्थित मन कक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, कई परिवार मरीज को छिपाने की कोशिश करते हैं। इससे उसका आत्मविश्वास प्रभावित होता है। वह सामाजिक गतिविधियों से दूर हो जाता है।
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स्कूल में भी मिर्गी से पीड़ित बच्चों को अक्सर अलग नजर से देखा जाता है। जबकि शिक्षकों और विद्यार्थियों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना चाहिए ताकि ऐसे बच्चों को समान अवसर मिले। इसके अलावा कई कंपनियां भी मिर्गी मरीजों को नौकरी देने में हिचकिचाती हैं, जबकि नियमित दवा लेने वाले ज्यादातर मरीज सामान्य कार्य में सक्षम होते हैं।
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बताया कि परिवार और समाज की सकारात्मक भूमिका ही इस समस्या के समाधान की कुंजी है। मरीज को भावनात्मक समर्थन देना, उसे सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल करना और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तभी फैले डर और भ्रांतियों को खत्म कर सकते हैं।
मिर्गी आए तो सुरक्षित स्थान पर लिटाएं
मरीज को दौरे के समय सुरक्षित स्थान पर लिटाएं, मुंह में कुछ न डालें, सिर के नीचे तकिया या कोई आरामदायक सामान रखें। ताकि उसे चोट न लगे। गंभीर चोट लगने से स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉ. आशीष के मुताबिक, मिर्गी रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल, गांव, कार्यस्थलों पर जागरूकता अभियान चलें। परिवार या समाज मरीज को शर्मिंदा न करें। छिपाने के बजाय खुलकर सहयोग करें। वैवाहिक और सामाजिक कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की जाए। सही समय पर जांच, इलाज और नियमित दवा का सेवन जरूरी है।