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Bareilly News: केंद्रीय जल बोर्ड के साथ ट्रेनिंग करेंगे पर्यावरण विज्ञान के विद्यार्थी
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बरेली कॉलेज के पर्यावरण विभाग व केंद्रीय जल बोर्ड के साथ जल्द साइन होगा एमओयू
बरेली। बरेली कॉलेज के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विद्यार्थी जल्द ही केंद्रीय जल बोर्ड के साथ तकनीकी प्रशिक्षण लेंगे। इससे छात्रों को कौशल प्रशिक्षण मिलेगा। नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे। पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द एमओयू (मैमोरेंडम ऑफ अंडर स्टैंडिंग) साइन कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण आज के समय में बढ़ती समस्या है। इस क्षेत्र में नौकरी के अवसर भी बहुत हैं। इसी माह एमओयू साइन करने की तैयारी है। इसके तहत छात्र-छात्राएं जीआईएस (ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) की ट्रेनिंग ऑनलाइन करेंगे। रिमोट सेंसिंग तकनीक के बारे में जानेंगे।
केंद्रीय जल बोर्ड के साथ ट्रेनिंग के दौरान मुख्य रूप से वाटर एनालिसिस ड्राइव प्रैक्टिकल इन हैंड दी जाएगी। विद्यार्थियों को किताबी बातें से इतर असली तकनीकें सिखाई जाएंगी। ट्रेनिंग के दौरान नदियों में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन, डिजॉल्व ऑक्सीजन, कार्बन व नाइट्रोजन का स्तर पानी के भीतर कितनी मात्रा में है इसका पूरी जानकारी दी जाएगी।
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उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग की ट्रेनिंग 10 दिन तक चलेगी। एक से छह हफ्ते तक का शोधकार्य भी सिखाया जाएगा। यदि छात्र-छात्राएं इस तरह की ट्रेनिंग करके निकलते हैं तो उन्हें नगर निगम, एनजीओ व जल बोर्ड में नौकरी के अवसर बढ़ेंगे।
आईवीआरआई व दिल्ली जल बोर्ड में नौकरी कर रहे विद्यार्थी
डॉ. जसवंत ने बताया कि बरेली कॉलेज से पर्यावरण से स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. रवि गंगवार ने आईवीआरआई में नौकरी शुरू की है। दिल्ली जलबोर्ड में अनिता बिष्ट व 2024 बैच की छात्रा रही मानसी और छात्र सुमित एनजीओ के साथ काम कर रहे हैं। संवाद
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बरेली। बरेली कॉलेज के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विद्यार्थी जल्द ही केंद्रीय जल बोर्ड के साथ तकनीकी प्रशिक्षण लेंगे। इससे छात्रों को कौशल प्रशिक्षण मिलेगा। नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे। पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द एमओयू (मैमोरेंडम ऑफ अंडर स्टैंडिंग) साइन कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण आज के समय में बढ़ती समस्या है। इस क्षेत्र में नौकरी के अवसर भी बहुत हैं। इसी माह एमओयू साइन करने की तैयारी है। इसके तहत छात्र-छात्राएं जीआईएस (ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) की ट्रेनिंग ऑनलाइन करेंगे। रिमोट सेंसिंग तकनीक के बारे में जानेंगे।
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केंद्रीय जल बोर्ड के साथ ट्रेनिंग के दौरान मुख्य रूप से वाटर एनालिसिस ड्राइव प्रैक्टिकल इन हैंड दी जाएगी। विद्यार्थियों को किताबी बातें से इतर असली तकनीकें सिखाई जाएंगी। ट्रेनिंग के दौरान नदियों में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन, डिजॉल्व ऑक्सीजन, कार्बन व नाइट्रोजन का स्तर पानी के भीतर कितनी मात्रा में है इसका पूरी जानकारी दी जाएगी।
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उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग की ट्रेनिंग 10 दिन तक चलेगी। एक से छह हफ्ते तक का शोधकार्य भी सिखाया जाएगा। यदि छात्र-छात्राएं इस तरह की ट्रेनिंग करके निकलते हैं तो उन्हें नगर निगम, एनजीओ व जल बोर्ड में नौकरी के अवसर बढ़ेंगे।
आईवीआरआई व दिल्ली जल बोर्ड में नौकरी कर रहे विद्यार्थी
डॉ. जसवंत ने बताया कि बरेली कॉलेज से पर्यावरण से स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. रवि गंगवार ने आईवीआरआई में नौकरी शुरू की है। दिल्ली जलबोर्ड में अनिता बिष्ट व 2024 बैच की छात्रा रही मानसी और छात्र सुमित एनजीओ के साथ काम कर रहे हैं। संवाद