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फिजा में और बढ़ा ‘जहर’.. सेहत पर पड़ रहा असर

Wed, 30 Oct 2019 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Oct 2019 01:45 AM IST
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Environmental Pollution Essay
बरेली। दिल्ली की तरह बरेली में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुका है। सोमवार से मंगलवार को स्थिति ज्यादा खराब रही। पार्टीकुलेट मैटर (पीएम-2.5 और पीएम-10) में गिरावट आने के बजाए और बढ़ोत्तरी हुई है। मौसम वैज्ञानिक और पर्यावरणविदों के अनुसार 4-5 दिन ऐसी ही स्थिति बनी रह सकती है। डॉक्टरों ने प्रदूषण के इस स्तर को सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए एहतियात बरतने की सलाह दी है। खासतौर से दमा के मरीज खासी सावधानी बरतें। कुछ दिन मॉर्निंग वॉक से बचें। बाहर निकलें तो मास्क जरूर पहनें।
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पराली जलाने, दिवाली पर की गई आतिशबाजी के धुएं और कोहरा आने से ये हालात पैदा हुए हैं। मंगलवार को पूरे दिन धुंध छाई रही। धूप नहीं निकली। इससे मौसम भी ठंडा रहा। सोमवार को सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र इज्जतनगर रेलवे क्रॉसिंग रहा था। यहां पीएम-2.5 की मात्रा 297 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिली जो मंगलवार को 300 के ऊपर पहुंच गई। पीएम-10 सोमवार को 601 मिला था जो मंगलवार को 610 तक पहुंच गया। चौपुला में पीएम 2.5 की मात्रा 281 थी तो मंगलवार को 290 से ऊपर पहुंच गई। राजेंद्रनगर में 278 थी जो मंगलवार को 288 तक पहुंच गई। यहां पीएम 10 की मात्रा में भी काफी ज्यादा दर्ज की गई। पर्यावरणविद डॉ. डीके सक्सेना के अनुसार सोमवार के मुकाबले मंगलवार को स्थिति ज्यादा खराब रही। धुंध ज्यादा बढ़ी जिस कारण पीएम 2.5 और पीएम 10 बढ़ा है। उनका कहना है कि यह स्थिति खतरनाक है। अगर एक सप्ताह तक ऐसी स्थिति बनी रही तो स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी।
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बारिश की संभावना नहीं, चार-पांच दिन छाई रहेगी धुंध
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा का कहना है कि अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक बादल बने हुए हैं। इन दिनों पराली और पटाखों का धुआं भी बहुत है, जिसने स्मॉग का रूप लेकर आसमान में धुंध की चादर तान दी है। हल्के बादल भी हैं, लेकिन बारिश की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि अगले 4-5 दिन तक यही स्थिति बनी रह सकती है। सुबह और शाम के साथ ही दिन के तापमान में भी गिरावट आएगी।
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दबी बीमारियां पकड़ सकती हैं जोर
जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके धस्माना के अनुसार वातावरण में प्रदूषण बढ़ने से दमा और सांस संबंधी रोगियों को ज्यादा मुसीबत हो सकती है। ऐसे मौसम में दबी बीमारियों जोर पकड़ सकती हैं। इसलिए एहतियात बरतें। मौसम में नमी होने से प्रदूषण वातावरण की निचली सतह पर होता है। इसलिए सुबह मॉर्निंग वॉक से परहेज करें। छोटे बच्चों को ज्यादा समस्या हो सकती है। उनको घरों से बाहर न निकले दें। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य के अनुसार डस्ट पार्टीकल फेफड़ों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। पटाखों से निकलनेे वाले कार्बन के कण और जहरीली गैसें सांस से अंदर पहुंचती है जो सीधे फेफड़ों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने भी कुछ दिन मॉर्निंग वॉक से परहेज रखने की सलाह दी।

मंगलवार को भी होती रही आतिशबाजी
दिवाली की रात तो शहर में जमकर आतिशबाजी हुई ही, मंगलवार को भी इसका सिलसिला जारी रहा। सोमवार को भी खूब आतिशबाजी की गई थी। मंगलवार को भी पटाखों का शोर सुनाई देता रहा। पर्यावरणविद डॉ. डीके सक्सेना के अनुसार ज्यादा पटाखे दागने के कारण ही धुंध और पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा बढ़ी है।
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