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इश्योरेंस कंपनियों के निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर रहे कर्मचारी

Thu, 05 Aug 2021 12:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 12:51 AM IST
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Employees on strike against privatization of insurance companies

ज्वाइंट फोरम ऑफ ट्रेड यूनियंस एंड एसोसिएशन के आह्वान पर किया प्रदर्शन
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कॉरपोरेट सेक्टर के कब्जा करने से लोगों को नुकसान होने की जताई आशंका

बरेली। नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। हड़ताल सरकार के इंश्योरेंस कंपनियों का निजीकरण करने की कोशिशों के विरोध में ज्वाइंट फोरम ऑफ ट्रेड यूनियंस एंड एसोसिएशन के आह्वान पर की गई। इस दौरान एफडीआई में 49 से 74 फीसदी वृद्धि और अगस्त, 2017 से लंबित वेतन पुनरीक्षण आदि मांगों को पूरा करने का भी मुद्दा उठाया गया।
हड़ताल के दौरान नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मंडल कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के मंडलीय प्रबंधक आरके सक्सेना, मनीष सक्सेना, मनोज वैश्य, सुनील सक्सेना, सुधीर गुप्ता, संजय कुमार, बरेली ट्रेड यूनियन के संजीव मेहरोत्रा, मोहम्मद फैजल आदि ने कर्मचारियों को संबोधित किया। कहा, चार सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों का गठन वर्ष 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। इंदिरा गांधी ने 107 निजी सामान्य बीमा कंपनियों, जो बड़े पैमाने पर दुर्भावना और अनियमितताओं में लिप्त थीं, का एक अध्यादेश पारित करके राष्ट्रीयकरण किया था।
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वक्ताओं ने कहा कि उस समय चार राष्ट्रीयकृत कंपनियों ने केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 19.5 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी और 1000 कर्मचारियों और 300 कार्यालयों के साथ अपना कारोबार शुरू किया था। वर्तमान में यही चार कंपनियां देश में करीब आठ हजार कार्यालयों के साथ काम कर 73,000 करोड़ रुपये का प्रीमियम अर्जित करती हैं। कंपनियों ने अत्यंत गरीब और सीमांत वर्गों को लाभान्वित करने के लिए अब तक 10 लाख करोड़ की बीमा पॉलिसी बेची हैं। इन कंपनियों के निजीकरण से कुछ बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भारत के वित्तीय और बीमा बाजार पर कब्जा कर लेंगी और आम आदमी को सस्ती प्रीमियम पर बीमा सेवाओं से वंचित करेंगी।
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