फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Election equation changed in Badaun due to political move of BSP

Lok Sabha Election: बसपा की सियासी चाल से बदले बदायूं में चुनावी समीकरण, सपा-भाजपा की बढ़ी टेंशन!

Wed, 17 Apr 2024 05:45 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 17 Apr 2024 05:45 PM IST
सार

बदायूं में बसपा ने ऐसा सियासी दांव खेला है, जिससे चुनावी समीकरण बदल गए हैं। बसपा ने मुस्लिम खां को प्रत्याशी बनाया है। बसपा के इस दांव से मतों में बिखराव हो सकता है। ऐसे में सपा और भाजपा के रणनीतिकार समीकरण साधने में जुट गए हैं। 

विज्ञापन
Election equation changed in Badaun due to political move of BSP
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा ने मुस्लिम कार्ड के रूप में जो सियासी चाल चली है, उससे बदायूं लोकसभा सीट के समीकरण बदल गए हैं। सपा और भाजपा के रणनीतिकार नफा-नुकसान का आकलन कर नए सिरे से चुनाव प्रबंधन करने में जुट गए हैं। अनुसूचित जाति के मतों में बिखराव रोकने लिए भाजपा ने इसी बिरादरी के पार्टी विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी है। उधर, सपा के सामने मुस्लिम मतों को सहेजने की चुनौती है। बसपा भाईचारा कमेटियों को सक्रिय कर हर बिरादरी में पकड़ बनाने की तैयारी में है।

विज्ञापन


बदायूं लोकसभा क्षेत्र से सपा ने आदित्य यादव, भाजपा ने दुर्विजय सिंह शाक्य और बसपा ने पूर्व विधायक मुस्लिम खां को चुनावी रण में उतारा है। तीनों ही उम्मीदवार पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों ही अपनी पार्टियों के परंपरागत और स्वजातीय मतों के आधार पर बाजी मारने की जुगत में हैं। बसपा के दांव ने सबसे ज्यादा सपा के समीकरण प्रभावित किए हैं। बसपा से मुस्लिम खां के मैदान में आने से सपा को मुस्लिम मतों में बंटवारे का खतरा सता रहा है।
विज्ञापन


चार लाख मुस्लिम मतों पर है सपा-बसपा की नजर
बसपा का उम्मीदवार घोषित होने से पहले तक करीब चार लाख मुस्लिम मतों पर सपा की ही सबसे मजबूत दावेदारी थी। अब जबकि बसपा ने मुस्लिम खां को चुनाव मैदान में उतार दिया है तो मतों के बंटवारे का अंदेशा पैदा हो गया है। इसको देखते हुए सपा नेतृत्व ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी और पूर्व विधायक आबिद रजा को विभाजन रोकने के लिए सक्रिय कर दिया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

दोनों के चुनावी कार्यक्रम सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल उन स्थानों पर लगा रहे हैं, जहां मुस्लिमों की बहुलता है। सपा के प्रदेश महासचिव आशीष चौबे का कहना है कि मुस्लिम मतों में बिखराव नहीं होगा, क्योंकि बसपा को वोट देने का मतलब भाजपा को फायदा पहुंचाना है।

सवर्ण और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं में पैठ बनाना चुनौती
मुस्लिम खां को उम्मीदवार बनाने से बसपा मुस्लिम मतों में हिस्सेदारी होने की उम्मीद है, लेकिन सवर्ण और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं में पैठ बनाना उसके लिए चुनौती है। बसपा जिलाध्यक्ष आरपी त्यागी कहते हैं कि बसपा हर वर्ग को जोड़ने के लिए भाईचारा कमेटियों का पहले ही गठन कर चुकी है। कमेटियों के जरिए ही सवर्ण और पिछड़ों के मत हासिल किए जाएंगे। अनुसूचित जाति के साथ मुस्लिम मतों को जुड़ाव बसपा की मजबूती का आधार है। जातिगत समीकरण साधकर ही बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उम्मीदवार उतारे हैं।

अनुसूचित जाति के मतों को साधने में जुटी भाजपा
मोदी की गारंटी और हिंदुत्व को धार देकर चुनाव मैदान में उतरी भाजपा ने स्थानीय स्तर पर जातिगत समीकरणों को साधा है। पिछली बार भाजपा के टिकट पर संघमित्रा मौर्य चुनाव जीतीं थीं। अबकी बार इसी बिरादरी के दुर्विजय सिंह को उतारा गया है। शाक्य-मौर्य पिछड़ा वर्ग में आते हैं। 

पिछड़ी के साथ सवर्ण मतदाताओं का झुकाव जहां भाजपा की मजबूती का आधार बताया जा रहा है, वहीं पार्टी के चुनावी रणनीतिकारों ने अनुसूचित जाति वर्ग के मतों को साधने के लिए बिसौली के सपा विधायक आशुतोष मौर्या की पत्नी और बहन को पार्टी में शामिल किया है। अनुसूचित जाति के कुछ और असरदार नेताओं को भाजपा में शामिल करने की तैयारी चल रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed