यूपी: बीएएमएस में प्रवेश नहीं दे सकेंगे प्रदेश के आठ आयुर्वेदिक कॉलेज, इसी साल के लिए है रोक
नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन ने आठ निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों को सत्र 2026-27 में बीएएमएस प्रवेश से इन्कार किया है। फ्यूचर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज भी इनमें शामिल है।
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प्रदेश के आठ निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बीएएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है। नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) की अंतिम मान्यता सूची में फ्यूचर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज को ‘डिनायल ऑफ परमिशन’ की श्रेणी में रखा गया है।
एनसीआईएसएम के पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक, फ्यूचर इंस्टीट्यूट को 2022-23 में 60 बीएएमएस सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली थी। आयोग ने सत्र 2026-27 के लिए इन सीटों पर प्रवेश की अनुमति से इन्कार किया है।
अनुमति से इन्कार का आधार एनसीआईएसएम की धारा 28 और संबंधित नियमों के तहत दर्ज किया गया। सूची में झांसी का डॉ. कृष्णा गोपाल द्विवेदी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मेरठ का श्रीराम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अमरोहा का डब्ल्यूटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और आगरा का एसआरएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शामिल हैं।
वाराणसी के डॉ. विजय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, मथुरा के संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज व अस्पताल और कानपुर के महाराणा प्रताप आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज का नाम भी शामिल है। अलग-अलग कॉलेजों में बीएएमएस की 50 से 100 तक सीटों और कुछ संस्थानों में पीजी पाठ्यक्रमों की अनुमति पर भी निर्णय लिया गया है।
इसी सत्र के लिए है रोक
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय ने बताया कि निर्धारित सीटों पर रोक सिर्फ सत्र 2026-27 के लिए है। आयोग में अपील के बाद न्यायालय के रास्ते सभी के लिए खुले हैं। प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को काउंसलिंग, प्रवेश से पहले संबंधित कॉलेज की उस सत्र की वैध अनुमति, मान्यता और सीटों की स्थिति की पुष्टि करनी होगी। कॉलेज के पूर्व वर्षों में संचालित होने या पुराने अनुमति आदेश के आधार पर नए सत्र में प्रवेश को वैध नहीं माना जा सकता।