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यहां पढ़े हैं एनडी तिवारी और गोपाल स्वरूप पाठक
बरेली
Updated Sat, 22 Aug 2015 01:30 AM IST
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बरेली। बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि शहर के केडीईएम (कुंवर दयाशंकर एडवर्ड मेमोरियल) इंटर कॉलेज में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके पूर्व राज्यपाल नारायणदत्त तिवारी और भूतपूर्व उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक भी पढ़ चुके हैं। कोहाड़ापीर में स्थित यह 105 साल पुराना यूपी बोर्ड का विद्यालय शहर की प्रमुख और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में शुमार रहा है।
तिवारी यहां 1937-38 में दो साल तक पढ़े थे। कक्षा सात में उन्होंने प्रवेश लिया था और आठवीं तक पढ़ाई की, तब उनके पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे। शहर के गुलाबनगर के निवासी रहे पूर्व उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक ने इस विद्यालय में कक्षा छह से हाईस्कूल तक की पढ़ाई की थी। इसरो में वैज्ञानिक रहे देवेंद्र वर्मा भी इसी विद्यालय के छात्र थे। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र रस्तोगी बताते हैं कि एक दौर में बरेली से सफल होकर निकलने वाला हर तीसरा युवा केडीईएम कॉलेज का ही छात्र हुआ करता था। 1910 में इसका नाम- एडवर्ड हाईस्कूल हुआ करता था। 1940 में इसका विस्तार इंटर तक हुआ। कुंवर दयाशंकर ने इसके लिए अपनी जमीन दान में दी, जिसके बाद उनका नाम भी इस विद्यालय के साथ जुड़ गया और इसे केडीईएम के नाम से जाना जाने लगा। सौ साल से ज्यादा पुरानी इस विद्यालय की बिल्डिंग का एक चौथाई हिस्सा अब जर्जर है लेकिन इस विद्यालय की साख अभी भी कम नहीं हुई है। 14 कमरों में क्लास लगती है और 24 टीचर अध्यापन करते हैं। सभी वर्गों की मान्यता इस विद्यालय के पास है। छात्र संख्या लगभग छह सौ है।
कोट...
शिक्षा के मामले में केडीईएम पर कोई सवाल नहीं है। शैक्षिक गुणवत्ता के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। 40 साल से कटी बिजली भी जुड़वा दी है। टीचरों की कोई कमी नहीं है। हमारा प्रयास है कि कॉलेज फिर अपनी साख हासिल करे।
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-डॉ. हरीश चंद्र स्वामी, प्रधानाचार्य
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तिवारी यहां 1937-38 में दो साल तक पढ़े थे। कक्षा सात में उन्होंने प्रवेश लिया था और आठवीं तक पढ़ाई की, तब उनके पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे। शहर के गुलाबनगर के निवासी रहे पूर्व उपराष्ट्रपति गोपाल स्वरूप पाठक ने इस विद्यालय में कक्षा छह से हाईस्कूल तक की पढ़ाई की थी। इसरो में वैज्ञानिक रहे देवेंद्र वर्मा भी इसी विद्यालय के छात्र थे। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र रस्तोगी बताते हैं कि एक दौर में बरेली से सफल होकर निकलने वाला हर तीसरा युवा केडीईएम कॉलेज का ही छात्र हुआ करता था। 1910 में इसका नाम- एडवर्ड हाईस्कूल हुआ करता था। 1940 में इसका विस्तार इंटर तक हुआ। कुंवर दयाशंकर ने इसके लिए अपनी जमीन दान में दी, जिसके बाद उनका नाम भी इस विद्यालय के साथ जुड़ गया और इसे केडीईएम के नाम से जाना जाने लगा। सौ साल से ज्यादा पुरानी इस विद्यालय की बिल्डिंग का एक चौथाई हिस्सा अब जर्जर है लेकिन इस विद्यालय की साख अभी भी कम नहीं हुई है। 14 कमरों में क्लास लगती है और 24 टीचर अध्यापन करते हैं। सभी वर्गों की मान्यता इस विद्यालय के पास है। छात्र संख्या लगभग छह सौ है।
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कोट...
शिक्षा के मामले में केडीईएम पर कोई सवाल नहीं है। शैक्षिक गुणवत्ता के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। 40 साल से कटी बिजली भी जुड़वा दी है। टीचरों की कोई कमी नहीं है। हमारा प्रयास है कि कॉलेज फिर अपनी साख हासिल करे।
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-डॉ. हरीश चंद्र स्वामी, प्रधानाचार्य