वैकल्पिक प्रश्नों से विकल्प गायब
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बृहस्पतिवार को दोपहर की पाली में हुए इतिहास के द्वितीय प्रश्नपत्र के खंड- स में आए पांच वैकल्पिक सवालों में से तीन में विकल्प नहीं दिए गए थे। विवश होकर परीक्षार्थियों ने उक्त सवालों को छोड़ दिया। इसके अलावा खंड अ में आए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या एक के दोनों भाग के सवालों पर भी आपत्ति जताई गई। कहा गया कि ये सवाल यूरोप के इतिहास से संबंधित हैं, जो सिलेबस में नहीं है, फिर भी यूरोप का इतिहास 1871 से 1950 से संबंधित है लेकिन पेपर में सवाल आया कि 1848 का वर्ष यूरोप में क्रांति का वर्ष था, इसे समझाइए? इतिहास के पेपर में इस तरह की गलतियों पर परीक्षार्थियों ने नाराजगी जताई। पेपर के बाद विद्यार्थी परिषद के विश्वविद्यालय संयोजक सुमित गुर्जर के नेतृत्व में कुलसचिव कोे संबोधित ज्ञापन बरेली कॉलेज में दिया गया। इस मौके पर सिद्धार्थ, मोहित, ओमसागर, राजन वर्मा, राहुल पांडेय, शिवम आदि मौजूद रहे।
जुलाई में परीक्षा कराने का विरोध
बरेली। एलएलबी, बीबीए और बीसीए की परीक्षाएं जुलाई में प्रस्तावित हैं, इसका छात्र कड़ा विरोध कर रहे हैं। बरेली कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा के अध्यक्ष रोहित यादव के नेतृत्व मेें प्राचार्य से मिले छात्रों ने कहा कि जुलाई में परीक्षा होने पर सेशन दो महीने लेट हो जाएगा। हर हाल में जून में परीक्षा कराई जाए। बता दें कि प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव ने इसी महीने होने वाली यह परीक्षाएं कॉलेज की छुट्टियों में कराने से इंकार कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने इन्हें जुलाई में कराने का निर्णय लिया है। हालांकि परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है। आपत्ति जताने वाले छात्रों में राघव गुप्ता, अभिषेक यादव, विकास यादव, जितेंद्र यादव और शैलेश भास्कर आदि शामिल हैं।