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स्वच्छ भारत मिशन-उज्ज्वला योजना अब पढ़ाई का हिस्सा
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बरेली। प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम लागू करने की कवायद चल रही है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने अर्थशास्त्र-शिक्षाशास्त्र का पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसमें अब स्वच्छ भारत मिशन और उज्ज्वला योजना अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे। वहीं, शिक्षाशास्त्र के पाठ्यक्रम में गतिविधियां और प्रैक्टिकल बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इस समय विश्वविद्यालयों में सबके अपने-अपने पाठ्यक्रम चल रहे हैं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत कुछ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम तो दस साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं। इसी वजह से सरकार ने प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम लागू करने का प्रयास शुरू किया है। इसमें अर्थशास्त्र और शिक्षाशास्त्र का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपी गई थी।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमके सिंह ने बताया, अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम में नए टैक्स जीएसटी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैक्स में हुए बदलावों को शामिल किया गया है। सरकार की नई योजनाएं जैसे कि स्वच्छ भारत मिशन और उज्ज्वला आदि का सामाजिक विश्लेषण भी अब पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा। अर्थशास्त्र के नोबेल से सम्मानित अमर्त्य सेन की विचारधारा, जेके मेहता और कौटिल्य का अर्थशास्त्र भी इसमें होगा। पाठ्यक्रम को इस तरह से तैयार किया गया है कि इसे साल या सेमेस्टर, दोनों रूप से लागू किया जा सकता है। शिक्षाशास्त्र का पाठ्यक्रम कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल के निर्देशन में तैयार हुआ है। प्रोफेसर रश्मि अग्रवाल ने बताया कि इसमें भारतीय सभ्यता के समावेश पर विशेष जोर दिया गया है।
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समान पाठ्यक्रम: आज हो सकता है अंतिम निर्णय
बरेली/गोरखपुर। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम को अंतिम स्वरूप देने के लिए सोमवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतिम निर्णय हो सकता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल भी इस बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। दो वर्ष पूर्व तत्कालीन कुलाधिपति एवं राज्यपाल रामनाईक की अध्यक्षता में कुलपति सम्मेलन में स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया गया था।
‘समान पाठ्यक्रम को लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय में सोमवार को बैठक बुलाई गई है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय को इकोनॉमिक्स और एजूकेशन का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।’
- प्रो. अनिल शुक्ला, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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इस समय विश्वविद्यालयों में सबके अपने-अपने पाठ्यक्रम चल रहे हैं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय समेत कुछ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम तो दस साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं। इसी वजह से सरकार ने प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम लागू करने का प्रयास शुरू किया है। इसमें अर्थशास्त्र और शिक्षाशास्त्र का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपी गई थी।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमके सिंह ने बताया, अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम में नए टैक्स जीएसटी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैक्स में हुए बदलावों को शामिल किया गया है। सरकार की नई योजनाएं जैसे कि स्वच्छ भारत मिशन और उज्ज्वला आदि का सामाजिक विश्लेषण भी अब पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा। अर्थशास्त्र के नोबेल से सम्मानित अमर्त्य सेन की विचारधारा, जेके मेहता और कौटिल्य का अर्थशास्त्र भी इसमें होगा। पाठ्यक्रम को इस तरह से तैयार किया गया है कि इसे साल या सेमेस्टर, दोनों रूप से लागू किया जा सकता है। शिक्षाशास्त्र का पाठ्यक्रम कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल के निर्देशन में तैयार हुआ है। प्रोफेसर रश्मि अग्रवाल ने बताया कि इसमें भारतीय सभ्यता के समावेश पर विशेष जोर दिया गया है।
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समान पाठ्यक्रम: आज हो सकता है अंतिम निर्णय
बरेली/गोरखपुर। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम को अंतिम स्वरूप देने के लिए सोमवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतिम निर्णय हो सकता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल भी इस बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। दो वर्ष पूर्व तत्कालीन कुलाधिपति एवं राज्यपाल रामनाईक की अध्यक्षता में कुलपति सम्मेलन में स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया गया था।
‘समान पाठ्यक्रम को लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय में सोमवार को बैठक बुलाई गई है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय को इकोनॉमिक्स और एजूकेशन का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।’
- प्रो. अनिल शुक्ला, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय