{"_id":"5d910e4c8ebc3e93b147c634","slug":"education-bareilly-news-bly378145279","type":"story","status":"publish","title_hn":"वित्त अधिकारी आज देंगे निवेश का हिसाब कर्मचारियों के निर्णय से वापस होंगे रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वित्त अधिकारी आज देंगे निवेश का हिसाब कर्मचारियों के निर्णय से वापस होंगे रुपये
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की अधिशेष धनराशि निजी कंपनी में निवेश करने को लेकर घमासान मचा है। विश्वविद्यालय में मिनिस्ट्रियल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन ने इसको लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने यह रुपये कंपनी से निकालकर वापस विश्वविद्यालय के बैंक खाते में जमा करने की मांग की है। इस संबंध में वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय सोमवार को पूरी स्थिति कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल के सामने रखेंगे और वह उससे कर्मचारियों को अवगत कराएंगे। फिर भी कर्मचारी रुपये वापस लेने को कहेंगे तो ले लिए जाएंगे।
पिछले सप्ताह मंगलवार को यह खुलासा हुआ था कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैंक में जमा डेढ़ सौ करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर की कंपनी में निवेश किए गए हैं। इसमें आरोप लगाए गए कि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने नियमों को ताक पर रखकर अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए यह धनराशि फाइनेंस कंपनी में निवेश की है। हंगामा मचा तो वित्त अधिकारी ने इस धनराशि को सिर्फ 35 करोड़ रुपये बताया और कहा कि यह राशि पांच साल के लिए आठ प्रतिशत से अधिक वार्षिक ब्याज की दर पर निवेश की गई है। यह ब्याज बैंक की तुलना में अधिक है। इस पर विश्वविद्यालय की मिनिस्ट्रियल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन ने कुलपति को चार बिंदुओं पर ज्ञापन देकर 27 सितंबर तक सूचना मांगी थी और 30 सितंबर तक यह धनराशि विश्वविद्यालय के खाते में वापस लाने को कहा था। कुलपति और वित्त अधिकारी के विश्वविद्यालय में मौजूद न होने के चलते कर्मचारियों को 27 सितंबर को यह सूचना नहीं दी गई है। अब सोमवार (आज) को इस संबंध में कर्मचारियों को सारी जानकारी दी जाएगी। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि निर्धारित समय से पहले फिक्स डिपोजिट तोड़ने से विश्वविद्यालय को नुकसान होगा। इस पर भी अगर कर्मचारी यह राशि वापस लेने को कहेंगे तो फिक्स डिपोजिट तोड़ दी जाएगी।
विज्ञापन
पिछले सप्ताह मंगलवार को यह खुलासा हुआ था कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैंक में जमा डेढ़ सौ करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर की कंपनी में निवेश किए गए हैं। इसमें आरोप लगाए गए कि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने नियमों को ताक पर रखकर अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए यह धनराशि फाइनेंस कंपनी में निवेश की है। हंगामा मचा तो वित्त अधिकारी ने इस धनराशि को सिर्फ 35 करोड़ रुपये बताया और कहा कि यह राशि पांच साल के लिए आठ प्रतिशत से अधिक वार्षिक ब्याज की दर पर निवेश की गई है। यह ब्याज बैंक की तुलना में अधिक है। इस पर विश्वविद्यालय की मिनिस्ट्रियल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन ने कुलपति को चार बिंदुओं पर ज्ञापन देकर 27 सितंबर तक सूचना मांगी थी और 30 सितंबर तक यह धनराशि विश्वविद्यालय के खाते में वापस लाने को कहा था। कुलपति और वित्त अधिकारी के विश्वविद्यालय में मौजूद न होने के चलते कर्मचारियों को 27 सितंबर को यह सूचना नहीं दी गई है। अब सोमवार (आज) को इस संबंध में कर्मचारियों को सारी जानकारी दी जाएगी। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि निर्धारित समय से पहले फिक्स डिपोजिट तोड़ने से विश्वविद्यालय को नुकसान होगा। इस पर भी अगर कर्मचारी यह राशि वापस लेने को कहेंगे तो फिक्स डिपोजिट तोड़ दी जाएगी।
विज्ञापन