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आईएमए गोद लेगी 15 टीबीग्रस्त बच्चे
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बरेली। दीक्षांत समारोह संपन्न होने के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सीएमओ, सीटीओ और आईएमए पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने जिले में टीबी पीड़ितों के आंकड़े पूछे और 2025 तक जिले को टीबी मुक्त करने को लेकर सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला और सीटीओ सुधीर गर्ग से बात की। राज्यपाल ने जिले में 322 बच्चों को टीबी रोग से छुटकारा दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सक्रियता और बढ़ाने को कहा। आईएमए पदाधिकारियों को बच्चों को गोद लेकर उन्हें टीबी मुक्त कराने का सुझाव दिया। इस पर आईएमए ने 15 बच्चों को गोद लेकर उनका इलाज करने और पौष्टिक आहार मुहैया कराने का संकल्प लिया। आईएमए सचिव डॉ. विनोद पागरानी ने बताया कि राज्यपाल ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों से 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के पीएम मोदी के संकल्प को मुकाम तक पहुंचाने में सहयोग करने को कहा है। यहां डॉ. अनीता अजय, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. हिमांशु अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि, कुर्सियां खाली
पिछले साल कुलपति से नाराज जनप्रतिनिधियोें ने दीक्षांत समारोह का बहिष्कार किया था। इस बार भी जनप्रतिनिधि दीक्षांत समारोह में नहीं पहुंचे। हालांकि इसकी वजह कोई नाराजगी नहीं, क्षेत्रीय संगठन की महत्वपूर्ण बैठक थी। इसको लेकर वहां चर्चा भी होती रही।
बिना आधार कार्ड नहीं मिला प्रवेश
समारोह में उपाधि से नवाजे जाने वाले कुछ छात्र किन्हीं कारणों से नहीं पहुंच सके। उनके स्थान पर परिजन पहुंचे तो प्रवेश द्वार पर निमंत्रण पत्र के साथ आधार कार्ड भी मांगा गया। जिन्होंने आधार कार्ड दिखाया, उन्हें प्रवेश मिला। लेकिन जो आधार कार्ड नहीं दिखा सके, उन्हें मना कर दिया। इसे लेकर अभिभावकों की कर्मियों से नोंकझोंक भी हुई, क्योंकि निमंत्रण पत्र में आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं बताई गई थी।
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कैमरे में कैद नहीं हुए ‘अनमोल पल’
मोबाइल लेक र आने पर प्रतिबंध के बावजूद कई छात्र-छात्राएं और अभिभावक मोबाइल लेकर समारोह स्थल पर पहुंचे थे। सघन चेकिंग के दौरान उनके पास मोबाइल मिलने पर उसे बाहर रखने के बाद ही परिसर में प्रवेश मिला। इसके चलते विद्यार्थी और अभिभावक बार-बार मोबाइल के लिए आवाजाही करते रहे। छात्रों के मुताबिक पंडाल में समारोह के अनमोल पलों को यादगार बनाने की उनकी मंशा अधूरी रह गई।
उमस से बेहाल रहे छात्र और अतिथि
दीक्षांत समारोह के लिए सजाए गए लाखों रुपये के पंडाल और तमाम इंतजाम के बावजूद अतिथियों और छात्रों को उमस ने बेहाल कर दिया। सीधी धूप से राहत मिली लेकिन धूप से पंडाल गर्म होने पर लोग पसीने से तरबतर हुए। पंडाल में लगे बड़े पंखों के पास बैठे लोगों को राहत मिली लेकिन पीछे की ओर बैठे लोग परेशान हुए। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पेयजल की उचित व्यवस्था कराई गई थी।
महिला पुलिस ने छात्राओं की लगाई क्लास
पंडाल में उमस से बचने के लिए पंखे के करीब बैठने को लेकर एक महाविद्यालय की छात्राओं में नोंकझोंक हो गई। उन्हें शांत कराने के लिए तत्काल महिला पुलिसकर्मी पहुंची और उनकी जमकर क्लास लगाई। बता दें कि मंच के निकट मीडिया पैनल में पीछे खाली पड़ी कुर्सियों पर वे छात्राएं आकर बैठ गईं थीं। लेकिन बड़े पंखे के ठीक सामने बैठने को लेक र उनमें कहासुनी हो गई थी।
प्रशासन के रवैये से शिक्षामित्र आक्रोशित
अपने मांगों के समर्थन में राज्यपाल को मांगपत्र सौंपने के लिए दीक्षांत समारोह में पहुंचे शिक्षामित्रों को प्रशासन ने आयोजन संपन्न होेने तक प्रशासनिक भवन में बिठाए रखा। जिलाध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने बताया कि पिछले दिनों राज्यपाल से मुलाकात क राने का आश्वासन प्रशासन ने दिया था। सोमवार को वह सुबह 11 बजे पहुंचे थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें मिलने नहीं दिया।
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नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि, कुर्सियां खाली
पिछले साल कुलपति से नाराज जनप्रतिनिधियोें ने दीक्षांत समारोह का बहिष्कार किया था। इस बार भी जनप्रतिनिधि दीक्षांत समारोह में नहीं पहुंचे। हालांकि इसकी वजह कोई नाराजगी नहीं, क्षेत्रीय संगठन की महत्वपूर्ण बैठक थी। इसको लेकर वहां चर्चा भी होती रही।
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बिना आधार कार्ड नहीं मिला प्रवेश
समारोह में उपाधि से नवाजे जाने वाले कुछ छात्र किन्हीं कारणों से नहीं पहुंच सके। उनके स्थान पर परिजन पहुंचे तो प्रवेश द्वार पर निमंत्रण पत्र के साथ आधार कार्ड भी मांगा गया। जिन्होंने आधार कार्ड दिखाया, उन्हें प्रवेश मिला। लेकिन जो आधार कार्ड नहीं दिखा सके, उन्हें मना कर दिया। इसे लेकर अभिभावकों की कर्मियों से नोंकझोंक भी हुई, क्योंकि निमंत्रण पत्र में आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं बताई गई थी।
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कैमरे में कैद नहीं हुए ‘अनमोल पल’
मोबाइल लेक र आने पर प्रतिबंध के बावजूद कई छात्र-छात्राएं और अभिभावक मोबाइल लेकर समारोह स्थल पर पहुंचे थे। सघन चेकिंग के दौरान उनके पास मोबाइल मिलने पर उसे बाहर रखने के बाद ही परिसर में प्रवेश मिला। इसके चलते विद्यार्थी और अभिभावक बार-बार मोबाइल के लिए आवाजाही करते रहे। छात्रों के मुताबिक पंडाल में समारोह के अनमोल पलों को यादगार बनाने की उनकी मंशा अधूरी रह गई।
उमस से बेहाल रहे छात्र और अतिथि
दीक्षांत समारोह के लिए सजाए गए लाखों रुपये के पंडाल और तमाम इंतजाम के बावजूद अतिथियों और छात्रों को उमस ने बेहाल कर दिया। सीधी धूप से राहत मिली लेकिन धूप से पंडाल गर्म होने पर लोग पसीने से तरबतर हुए। पंडाल में लगे बड़े पंखों के पास बैठे लोगों को राहत मिली लेकिन पीछे की ओर बैठे लोग परेशान हुए। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पेयजल की उचित व्यवस्था कराई गई थी।
महिला पुलिस ने छात्राओं की लगाई क्लास
पंडाल में उमस से बचने के लिए पंखे के करीब बैठने को लेकर एक महाविद्यालय की छात्राओं में नोंकझोंक हो गई। उन्हें शांत कराने के लिए तत्काल महिला पुलिसकर्मी पहुंची और उनकी जमकर क्लास लगाई। बता दें कि मंच के निकट मीडिया पैनल में पीछे खाली पड़ी कुर्सियों पर वे छात्राएं आकर बैठ गईं थीं। लेकिन बड़े पंखे के ठीक सामने बैठने को लेक र उनमें कहासुनी हो गई थी।
प्रशासन के रवैये से शिक्षामित्र आक्रोशित
अपने मांगों के समर्थन में राज्यपाल को मांगपत्र सौंपने के लिए दीक्षांत समारोह में पहुंचे शिक्षामित्रों को प्रशासन ने आयोजन संपन्न होेने तक प्रशासनिक भवन में बिठाए रखा। जिलाध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने बताया कि पिछले दिनों राज्यपाल से मुलाकात क राने का आश्वासन प्रशासन ने दिया था। सोमवार को वह सुबह 11 बजे पहुंचे थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें मिलने नहीं दिया।