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फिर शून्य हुआ एम फार्मा का सत्र
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बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मशक्कत के बाद शुरू हुआ एम फार्मा कोर्स लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। दो साल बीतने के बावजूद पाठ्यक्रम का प्रोफेसर न होने के चलते लगातार दूसरा सत्र भी शून्य हो गया है। इसके चलते बी फार्मा करने के बाद एम फार्मा करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को दूसरे कॉलेजों का रुख करना पड़ रहा है।
वर्ष 2018 में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की टीम ने निरीक्षण के बाद विश्वविद्यालय में एम फार्मा में एडमिशन पर रोक लगा दी थी। एआईसीटीई के मानकों के अनुसार विभाग में प्रोफेसर होने चाहिए थे, लेकिन यहां पर एसोसिएट प्रोफेसर और गेस्ट फैकल्टी के सहारे एम फार्मा चल रहा था। इस दौरान टीम ने डी फार्मा का आवेदन भी निरस्त किया था। वहीं, एम फार्मा में प्रोफेसर न होने को लेकर विश्वविद्यालय से जवाब-तलब किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का दावा किया, मगर शैक्षिक सत्र 2018-19 खाली चला गया। एक सत्र शून्य होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने अब तक किसी प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं की है और अब यह सत्र भी शून्य हो गया है। एआईसीटीई से अनुमति न मिलने के चलते इस बार भी एम फार्मा में कोई प्रवेश नहीं हुआ है। हालांकि पिछले दिनों विभागाध्यक्ष डॉ. एसबी तिवारी ने इसको लेकर पत्राचार किया था, लेकिन कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया है। इसके चलते विश्वविद्यालय में एम फार्मा की पढ़ाई करने की आस लगाए बैठे छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लगा है।
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वर्ष 2018 में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की टीम ने निरीक्षण के बाद विश्वविद्यालय में एम फार्मा में एडमिशन पर रोक लगा दी थी। एआईसीटीई के मानकों के अनुसार विभाग में प्रोफेसर होने चाहिए थे, लेकिन यहां पर एसोसिएट प्रोफेसर और गेस्ट फैकल्टी के सहारे एम फार्मा चल रहा था। इस दौरान टीम ने डी फार्मा का आवेदन भी निरस्त किया था। वहीं, एम फार्मा में प्रोफेसर न होने को लेकर विश्वविद्यालय से जवाब-तलब किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का दावा किया, मगर शैक्षिक सत्र 2018-19 खाली चला गया। एक सत्र शून्य होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने अब तक किसी प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं की है और अब यह सत्र भी शून्य हो गया है। एआईसीटीई से अनुमति न मिलने के चलते इस बार भी एम फार्मा में कोई प्रवेश नहीं हुआ है। हालांकि पिछले दिनों विभागाध्यक्ष डॉ. एसबी तिवारी ने इसको लेकर पत्राचार किया था, लेकिन कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया है। इसके चलते विश्वविद्यालय में एम फार्मा की पढ़ाई करने की आस लगाए बैठे छात्र-छात्राओं को तगड़ा झटका लगा है।
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