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मुरादाबाद की शिक्षिका के वरिष्ठता निर्णय से बरेली कॉलेज में खलबली
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बरेली। मुरादाबाद के डीएके डिग्री कॉलेज की शिक्षिका के वरिष्ठता विवाद में हाईकोर्ट से आए निर्णय को लेकर बरेली कॉलेज में खलबली मच गई है। शुक्रवार को इसको लेकर पूरे दिन कॉलेज में चर्चा बनी रही क्योंकि बरेली कॉलेज में इसी आधार पर बनाई गई वरिष्ठता सूची को दबा दिया गया है। अगर इसे लागू किया गया तो कॉलेज के कई विभागाध्यक्षों की कुर्सी जाना तय माना जा रहा है।
एक अगस्त को हाईकोर्ट ने डीएके कॉलेज मुरादाबाद की शिक्षिका डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा बनाम कुलपति और कुलाधिपति प्रकरण में आदेश दिया है कि वरिष्ठता की गणना नियमित होने की तिथि से ही की जाएगी, न कि अस्थाई नियुक्ति की तिथि से। बृहस्पतिवार को यह निर्णय आने के बाद शुक्रवार को बरेली कॉलेज में शिक्षकों में इसकी खासी चर्चा रही क्योंकि यहां भी लंबे समय से वरिष्ठता विवाद चल रहा है। इस नियम के आधार पर तय गई वरिष्ठता सूची को अगर लागू किया गया तो बरेली कॉलेज में कई विभागाध्यक्षों में बदलाव होना तय है। बता दें कि यहां के मामले को रूटा महामंत्री टीएस चौहान ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी। मगर इसका कोई असर न होने पर उन्होंने भी मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिसमें हाईकोर्ट ने वरिष्ठता लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन इसे लागू नहीं किया है।
साल भर में ही बदल गई वरिष्ठता सूची
बरेली कॉलेज में जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में तैयार की गई शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा अंतर है। जुलाई 2017 की सूची में जो शिक्षक ऊपरी पायदान पर हैं, वे जुलाई 2018 की सूची में नीचे खिसक गए हैं। ऐसे में जब जुलाई 2018 की वरिष्ठता सूची लागू की जाएगी तो तीन-चार विभागाध्यक्षों को हटना पड़ेगा।
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एक अगस्त को हाईकोर्ट ने डीएके कॉलेज मुरादाबाद की शिक्षिका डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा बनाम कुलपति और कुलाधिपति प्रकरण में आदेश दिया है कि वरिष्ठता की गणना नियमित होने की तिथि से ही की जाएगी, न कि अस्थाई नियुक्ति की तिथि से। बृहस्पतिवार को यह निर्णय आने के बाद शुक्रवार को बरेली कॉलेज में शिक्षकों में इसकी खासी चर्चा रही क्योंकि यहां भी लंबे समय से वरिष्ठता विवाद चल रहा है। इस नियम के आधार पर तय गई वरिष्ठता सूची को अगर लागू किया गया तो बरेली कॉलेज में कई विभागाध्यक्षों में बदलाव होना तय है। बता दें कि यहां के मामले को रूटा महामंत्री टीएस चौहान ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी। मगर इसका कोई असर न होने पर उन्होंने भी मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिसमें हाईकोर्ट ने वरिष्ठता लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन इसे लागू नहीं किया है।
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साल भर में ही बदल गई वरिष्ठता सूची
बरेली कॉलेज में जुलाई 2017 और जुलाई 2018 में तैयार की गई शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा अंतर है। जुलाई 2017 की सूची में जो शिक्षक ऊपरी पायदान पर हैं, वे जुलाई 2018 की सूची में नीचे खिसक गए हैं। ऐसे में जब जुलाई 2018 की वरिष्ठता सूची लागू की जाएगी तो तीन-चार विभागाध्यक्षों को हटना पड़ेगा।
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