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अग्रिम आदेश तक काउंसलिंग स्थगित, सैकड़ों एडमिशन फंसे
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बरेली। छात्रनेता और शिक्षक विवाद के चलते बरेली कॉलेज में एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह से चौपट हो गई है। इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ रहा है। शनिवार को कॉलेज में प्राचार्य की ओर से स्नातक, परास्नातक और एलएलबी की काउंसलिंग प्रक्रिया अग्रिम आदेशों तक स्थगित करने का नोटिस भी चस्पा कर दिया है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एडमिशन प्रक्रिया को 31 जुलाई तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते कॉलेज में छात्र-छात्राओं की जमकर भीड़ उमड़ रही है। मगर शनिवार को दूर-दराज से आए छात्र-छात्राओं को निराश होकर लौटना पड़ा। पहले तो विद्यार्थी कुछ समय तक माहौल शांत होने का इंतजार करते रहे, लेकिन फिर चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा ने उन्हें सोमवार को आने के लिए कह दिया। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत रुहेलखंड विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर दूसरे चरण में ऑनलाइन पंजीकरण कराने वालों को हुई। इन अभ्यर्थियों को शनिवार को अपने आवेदन कॉलेज में जमा करने थे ताकि एडमिशन प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी हो सके। मगर हंगामे के चलते बरेली कॉलेज में यह फार्म जमा ही नहीं किए गए।
शिक्षक पर रिपोर्ट वापस होनी चाहिए। कॉलेज में जब तक माहौल ठीक नहीं होगा, शिक्षक कैसे काम करेंगे? हमने डीएम और एसपी क्राइम से शिकायत की है। छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उनके एडमिशन हर हाल में कराए गए हैं। इसके लिए हम वीसी से मिलकर तिथि बढ़वाएंगे।
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- डॉ. वीपी सिंह, महासचिव, बरेली कॉलेज शिक्षक संघ
डीएम और एसपी क्राइम से मिले शिक्षक
बरेली। शनिवार को बरेली कॉलेज के शिक्षकों ने प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा के नेतृत्व में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से मिलकर घटना की जानकारी दी और एफआईआर निरस्त कर कार्रवाई की मांग की। डीएम ने एसपी सिटी को मामला देखने के लिए पत्र लिखवाया। साथ ही, सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार से मिलकर पूरे प्रकरण से अवगत कराने को कहा। इसके बाद वे लोग एसपी सिटी से मिलने पहुंचे तो वह नहीं मिले। इसके बाद वे लोग एसएसपी ऑफिस भी पहुंचे। एसएसपी के न मिलने पर एसपी क्राइम रमेश भारतीय से मुलाकात कर पुलिस पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाया। मुलाकात करने वालों में डॉ. पूर्णिमा अनिल, डॉ. स्वदेश सिंह, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. पीएन सक्सेना, डॉ. नीरजा अस्थाना, डॉ. विकास जैन आदि शामिल रहे।
वीडियो वायरल, एससी-एसटी आयोग के संज्ञान लेने की चर्चा
बरेली कॉलेज में हुई घटना का वीडियो सोशल साइट्स पर वायरल कर दिया गया है। इसको लेकर फेसबुक और व्हाट्सएप पर तमाम कमेंट्स किए जा रहे हैं। शनिवार को कॉलेज में इस मामले पर एससी-एसटी आयोग के संज्ञान लेने की भी चर्चा रही लेकिन कोई पुष्टि नहीं हुई।
मोहित के बाहरी होने का मुद्दा भी उठा
शिक्षक संघ ने कॉलेज का छात्र न होने के बावजूद मोहित कुमार सिंह के कॉलेज में आवागमन पर आपत्ति लगाई है। विवाद के बाद शनिवार को भी मोहित कॉलेज कैंपस में घूमता रहा। शिक्षकों का कहना है कि जब तक उस पर कार्रवाई नहीं होगी, प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया जाएगा। वहीं, मोहित ने समझौता के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की मांग की है।
शिक्षकों में दो फाड़, बीएससी में हुए एडमिशन
बरेली कॉलेज में हुए विवाद को लेकर शिक्षक भी दो फाड़ हैं। एक ओर तो शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार कर दिया हैं, वहीं बीएससी द्वितीय वर्ष में शनिवार को विवाद के बावजूद एडमिशन हुए। डॉ. सुंदर सिंह ने बताया कि तीन-चार बच्चे आए थे, जिनके फार्म पहले ही जमा थे। मगर उनके पास एडमिशन न करने का कोई आदेश नहीं था। ऐसे में उन्होंने बच्चों को लौटाने के बजाय उनके एडमिशन कर लिए हैं।
इंस्पेक्टर से कहा.. उंगली मत उठा देना
सोमवार को कॉलेज खुलने की सूचना देते हुए इंस्पेक्टर बारादरी राहुल सिंह ने छात्र-छात्राओं से जाने को कहा। इस पर कुछ छात्रों से उनकी बहस होने लगी। इंस्पेक्टर और दरोगा ने इस पर सख्ती दिखाई तो एबीवीपी के पदाधिकारी राहुल चौहान ने विरोध किया। बात बढ़ी तो इंस्पेक्टर उंगली उठाकर बात करने लगे। इस पर राहुल ने उंगली न उठाने की बात कही तो उनमें तीखी बहस हो गई।
पहले भी हुए हैं विवाद
- जून 2019 में अस्थाई कर्मचारियों को हटाने को लेकर करीब महीने भर तक बरेली कॉलेज में धरना प्रदर्शन और हंगामा हुआ था। यह हंगामा पिछले तीन साल से लगातार हो रहा है।
- 22 जुलाई 2019 को विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने एलएलबी की मेरिट पर आपत्ति उठाते हुए काफी हंगामा किया और काउंसलिंग बंद करा दी थी।
- जुलाई 2018 में एलएलबी की मेरिट पर विवाद होने के बाद प्राचार्य कक्ष में छात्रनेता मुस्तफा हैदर से मारपीट के बाद काफी हंगामा हुआ था।
- अगस्त 2018 में अस्थाई कर्मचारियों ने प्राचार्य के कार्यालय में हंगामा करके जमकर उत्पात मचाया था और प्राचार्य की मेज पर थूक दिया था। इसको लेकर कॉलेज में तालाबंदी भी हुई थी।
- वर्ष 2016 में सछास के छात्रनेता हृदेश यादव का एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्षमा द्विवेदी से विवाद हो गया था। इस मामले में भी काफी हंगामा हुआ था और हृदेश यादव पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एडमिशन प्रक्रिया को 31 जुलाई तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते कॉलेज में छात्र-छात्राओं की जमकर भीड़ उमड़ रही है। मगर शनिवार को दूर-दराज से आए छात्र-छात्राओं को निराश होकर लौटना पड़ा। पहले तो विद्यार्थी कुछ समय तक माहौल शांत होने का इंतजार करते रहे, लेकिन फिर चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा ने उन्हें सोमवार को आने के लिए कह दिया। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत रुहेलखंड विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर दूसरे चरण में ऑनलाइन पंजीकरण कराने वालों को हुई। इन अभ्यर्थियों को शनिवार को अपने आवेदन कॉलेज में जमा करने थे ताकि एडमिशन प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी हो सके। मगर हंगामे के चलते बरेली कॉलेज में यह फार्म जमा ही नहीं किए गए।
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शिक्षक पर रिपोर्ट वापस होनी चाहिए। कॉलेज में जब तक माहौल ठीक नहीं होगा, शिक्षक कैसे काम करेंगे? हमने डीएम और एसपी क्राइम से शिकायत की है। छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उनके एडमिशन हर हाल में कराए गए हैं। इसके लिए हम वीसी से मिलकर तिथि बढ़वाएंगे।
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- डॉ. वीपी सिंह, महासचिव, बरेली कॉलेज शिक्षक संघ
डीएम और एसपी क्राइम से मिले शिक्षक
बरेली। शनिवार को बरेली कॉलेज के शिक्षकों ने प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा के नेतृत्व में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से मिलकर घटना की जानकारी दी और एफआईआर निरस्त कर कार्रवाई की मांग की। डीएम ने एसपी सिटी को मामला देखने के लिए पत्र लिखवाया। साथ ही, सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार से मिलकर पूरे प्रकरण से अवगत कराने को कहा। इसके बाद वे लोग एसपी सिटी से मिलने पहुंचे तो वह नहीं मिले। इसके बाद वे लोग एसएसपी ऑफिस भी पहुंचे। एसएसपी के न मिलने पर एसपी क्राइम रमेश भारतीय से मुलाकात कर पुलिस पर एक पक्षीय कार्रवाई का आरोप लगाया। मुलाकात करने वालों में डॉ. पूर्णिमा अनिल, डॉ. स्वदेश सिंह, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. पीएन सक्सेना, डॉ. नीरजा अस्थाना, डॉ. विकास जैन आदि शामिल रहे।
वीडियो वायरल, एससी-एसटी आयोग के संज्ञान लेने की चर्चा
बरेली कॉलेज में हुई घटना का वीडियो सोशल साइट्स पर वायरल कर दिया गया है। इसको लेकर फेसबुक और व्हाट्सएप पर तमाम कमेंट्स किए जा रहे हैं। शनिवार को कॉलेज में इस मामले पर एससी-एसटी आयोग के संज्ञान लेने की भी चर्चा रही लेकिन कोई पुष्टि नहीं हुई।
मोहित के बाहरी होने का मुद्दा भी उठा
शिक्षक संघ ने कॉलेज का छात्र न होने के बावजूद मोहित कुमार सिंह के कॉलेज में आवागमन पर आपत्ति लगाई है। विवाद के बाद शनिवार को भी मोहित कॉलेज कैंपस में घूमता रहा। शिक्षकों का कहना है कि जब तक उस पर कार्रवाई नहीं होगी, प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया जाएगा। वहीं, मोहित ने समझौता के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की मांग की है।
शिक्षकों में दो फाड़, बीएससी में हुए एडमिशन
बरेली कॉलेज में हुए विवाद को लेकर शिक्षक भी दो फाड़ हैं। एक ओर तो शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार कर दिया हैं, वहीं बीएससी द्वितीय वर्ष में शनिवार को विवाद के बावजूद एडमिशन हुए। डॉ. सुंदर सिंह ने बताया कि तीन-चार बच्चे आए थे, जिनके फार्म पहले ही जमा थे। मगर उनके पास एडमिशन न करने का कोई आदेश नहीं था। ऐसे में उन्होंने बच्चों को लौटाने के बजाय उनके एडमिशन कर लिए हैं।
इंस्पेक्टर से कहा.. उंगली मत उठा देना
सोमवार को कॉलेज खुलने की सूचना देते हुए इंस्पेक्टर बारादरी राहुल सिंह ने छात्र-छात्राओं से जाने को कहा। इस पर कुछ छात्रों से उनकी बहस होने लगी। इंस्पेक्टर और दरोगा ने इस पर सख्ती दिखाई तो एबीवीपी के पदाधिकारी राहुल चौहान ने विरोध किया। बात बढ़ी तो इंस्पेक्टर उंगली उठाकर बात करने लगे। इस पर राहुल ने उंगली न उठाने की बात कही तो उनमें तीखी बहस हो गई।
पहले भी हुए हैं विवाद
- जून 2019 में अस्थाई कर्मचारियों को हटाने को लेकर करीब महीने भर तक बरेली कॉलेज में धरना प्रदर्शन और हंगामा हुआ था। यह हंगामा पिछले तीन साल से लगातार हो रहा है।
- 22 जुलाई 2019 को विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने एलएलबी की मेरिट पर आपत्ति उठाते हुए काफी हंगामा किया और काउंसलिंग बंद करा दी थी।
- जुलाई 2018 में एलएलबी की मेरिट पर विवाद होने के बाद प्राचार्य कक्ष में छात्रनेता मुस्तफा हैदर से मारपीट के बाद काफी हंगामा हुआ था।
- अगस्त 2018 में अस्थाई कर्मचारियों ने प्राचार्य के कार्यालय में हंगामा करके जमकर उत्पात मचाया था और प्राचार्य की मेज पर थूक दिया था। इसको लेकर कॉलेज में तालाबंदी भी हुई थी।
- वर्ष 2016 में सछास के छात्रनेता हृदेश यादव का एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. क्षमा द्विवेदी से विवाद हो गया था। इस मामले में भी काफी हंगामा हुआ था और हृदेश यादव पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।