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लखनऊ से सख्ती होने पर हरकत में आए अफसर
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बरेली। आला हजरत दरगाह की ओर से अजहरी मियां के नौ और 10 जुलाई को होने वाले पहले सालाना उर्स की बिना किसी ठोस जांच किए बिना परमीशन देना और फिर दोबारा पुलिस की आख्या मांगकर उसे रद्द करना प्रशासन की बड़ी चूक है। सावन शुरू होने सेे पहले अफसरों की इस चूक का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ सकता था। लखनऊ से सख्ती होने के बाद अफसर हरकत में आए और आनन-फानन में पुलिस से दोबारा आख्या मंगवाकर वह परमीशन रद्द की।
शासन से सावन में किसी भी तरह की नई धार्मिक परंपरा न पड़ने देने के निर्देश हैं। पिछले साल सावन में उमरिया से कांवड़ निकालने की प्रशासन ने अनुमति नई परंपरा पड़ने का हवाला देते हुए नहीं दी थी। कांवड़ निकालने को लेकर यहां से बड़ा विवाद हुआ था। मगर, प्रशासन ने आला हजरत के ताजुश्शरीया अजहरी मियां के पहले सालाना उर्स पर नई परंपरा पड़ने का पालन नहीं करते हुए परमीशन जारी कर दी। अब उर्स की तारीख नजदीक आई तो विहिप, शिवसेना और हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों की आपत्ति पर उर्स की परमीशन पुलिस से आनन-फानन में आख्या मांगकर कैंसिल कर दी। यह प्रशासनिक अफसरों की घोर लापरवाही का नमूना है। सूत्रों की माने ंतो हिंदूवादी संगठनों की आपत्ति के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर अफसर उर्स की परमीशन कैंसिल नहीं कर रहे थे, लेकिन जब लखनऊ से नई परंपरा न पड़ने देने की सख्त हिदायत दी गई तो प्रशासन हरकत में आया और सरकार की मंशा की अनुरूप सीओ सिटी प्रथम और कोतवाली पुलिस की दोबारा जांच रिपोर्ट मंगाने की औपचारिकता पूरी कर उर्स की परमीशन रद्द की। पहली बार नई परंपरा पड़ने की बात पता होने के बाद भी ताजुश्शरीया के पहली बार होने वाले उर्स की परमीशन किसके इशारे पर और क्यों दी गई और किसके इशारे पर कैंसिल हुई, इस बारे में देर रात तक अफसर चुप्पी साधे रहे। किसी भी अफसर ने इस बारे में टिप्पणी नहीं की।
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शासन से सावन में किसी भी तरह की नई धार्मिक परंपरा न पड़ने देने के निर्देश हैं। पिछले साल सावन में उमरिया से कांवड़ निकालने की प्रशासन ने अनुमति नई परंपरा पड़ने का हवाला देते हुए नहीं दी थी। कांवड़ निकालने को लेकर यहां से बड़ा विवाद हुआ था। मगर, प्रशासन ने आला हजरत के ताजुश्शरीया अजहरी मियां के पहले सालाना उर्स पर नई परंपरा पड़ने का पालन नहीं करते हुए परमीशन जारी कर दी। अब उर्स की तारीख नजदीक आई तो विहिप, शिवसेना और हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों की आपत्ति पर उर्स की परमीशन पुलिस से आनन-फानन में आख्या मांगकर कैंसिल कर दी। यह प्रशासनिक अफसरों की घोर लापरवाही का नमूना है। सूत्रों की माने ंतो हिंदूवादी संगठनों की आपत्ति के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर अफसर उर्स की परमीशन कैंसिल नहीं कर रहे थे, लेकिन जब लखनऊ से नई परंपरा न पड़ने देने की सख्त हिदायत दी गई तो प्रशासन हरकत में आया और सरकार की मंशा की अनुरूप सीओ सिटी प्रथम और कोतवाली पुलिस की दोबारा जांच रिपोर्ट मंगाने की औपचारिकता पूरी कर उर्स की परमीशन रद्द की। पहली बार नई परंपरा पड़ने की बात पता होने के बाद भी ताजुश्शरीया के पहली बार होने वाले उर्स की परमीशन किसके इशारे पर और क्यों दी गई और किसके इशारे पर कैंसिल हुई, इस बारे में देर रात तक अफसर चुप्पी साधे रहे। किसी भी अफसर ने इस बारे में टिप्पणी नहीं की।
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