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Bareilly News: डायबिटीज बढ़ा रही अवसाद और भूलने की बीमारी, डॉ. पीके माहेश्वरी बोले- समय रहते नियंत्रण जरूरी
Sun, 10 May 2026 02:38 PM IST
Mukesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: Mukesh Kumar
Updated Sun, 10 May 2026 02:38 PM IST
सार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने कहा कि अनियंत्रित डायबिटीज मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क को प्रभावित करती है। इससे मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन और भूलने की प्रवृत्ति बढ़ती है। उन्होंने डायबिटीज को नियंत्रित रखने पर जोर दिया।
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डॉ. पीके माहेश्वरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पीके माहेश्वरी ने कहा कि अनियंत्रित डायबिटीज अब केवल शुगर तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डाल रही है। लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहने से मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, भूलने की प्रवृत्ति और आक्रामक व्यवहार तेजी से बढ़ रहा है। इससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। डॉ. पीके माहेश्वरी ने रविवार को एसआरएमएस में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।
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उन्होंने कहा कि डायबिटीज को 'शरीर का चोर' कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते। कई बार मरीज हार्ट अटैक, किडनी फेल होने या मानसिक समस्या के बाद जांच कराते हैं, तब डायबिटीज का पता चलता है। रिसर्च में सामने आया है कि बढ़ी हुई शुगर मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं और रसायनों को प्रभावित करती है, जिससे दिमाग का संतुलन बिगड़ता है।
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डॉ. माहेश्वरी के अनुसार 50 वर्ष की उम्र के बाद ऐसे लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं। मरीज सामान्य बातें भूलने लगते हैं, व्यवहार में बदलाव आने लगता है और सामाजिक रूप से असहज हो जाते हैं। कई मामलों में नौकरी और पारिवारिक रिश्तों पर भी असर पड़ता है।
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डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी
उन्होंने कहा कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, समय पर दवा और जांच से शुगर सामान्य स्तर तक लाई जा सकती है। लोगों को रोजमर्रा की गतिविधियों को ही व्यायाम का हिस्सा बनाना चाहिए, जैसे पैदल चलना, घर के काम करना और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना।
डॉ. माहेश्वरी ने व्रत और त्योहारों में अधिक कार्बोहाइड्रेट व तले भोजन से बचने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने और हेलमेट सही तरीके से न पहनने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त दवाएं और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जागरूकता बढ़ने से अब अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
प्रमुख बातें
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उन्होंने कहा कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, समय पर दवा और जांच से शुगर सामान्य स्तर तक लाई जा सकती है। लोगों को रोजमर्रा की गतिविधियों को ही व्यायाम का हिस्सा बनाना चाहिए, जैसे पैदल चलना, घर के काम करना और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना।
डॉ. माहेश्वरी ने व्रत और त्योहारों में अधिक कार्बोहाइड्रेट व तले भोजन से बचने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने और हेलमेट सही तरीके से न पहनने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त दवाएं और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जागरूकता बढ़ने से अब अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
प्रमुख बातें
- अनियंत्रित डायबिटीज से अवसाद और भूलने की बीमारी का खतरा
- 50 वर्ष के बाद मानसिक लक्षण अधिक उभर रहे
- बढ़ी शुगर मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं को प्रभावित करती है
- नियमित व्यायाम और खानपान नियंत्रण बेहद जरूरी
- सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा और जांच उपलब्ध
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