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लॉकडाउन में नहीं आ रहे दानदाता, अनाथालय में खाने का संकट

Thu, 26 Mar 2020 11:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2020 11:54 PM IST
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Donors not coming in lockdown, food crisis in orphanage
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो

प्रबंधन ने कुछ रोज का ही भंडार बचा होने की बात कहते हुए मांगी मदद

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बरेली। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद लॉकडाउन से आर्यसमाज अनाथालय में रह रहे बच्चों के सामने खाने का संकट पैदा हो रहा है। अनाथालय प्रबंधन ने जिलाधिकारी से मदद मांगी है। प्रबंधन का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से कई दिन से दानदाता नहीं आ रहे हैं। स्टॉक राशन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। डीएम ने एक समाजसेवी से कुछ राशन उपलब्ध भी कराया है, लेकिन वो भी दो-तीन दिनों के लिए ही है। प्रबंधन ने जनप्रतिनिधियों को भी सहयोग देने की अपील की है।
अनाथालय में करीब 40 बच्चों के साथ पांच लोगों का स्टाफ रहता है। यह अनाथालय बगैर किसी सरकारी फंड के पूरी तरह दानदाताओं की मदद से ही संचालित होता है। प्रबंधन का कहना है कि आम दिनों में लोग ज्यादातर बच्चों के लिए पका खाना ले आते हैँ। चावल, आटा, दाल सहित राशन के दूसरी खाद्य सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाती है। हफ्ते में 14 बार के बजाय बमुश्किल सात-आठ बार ही अनाथालय को खाना बनाने की जरूरत होती है। थोड़ा-बहुत बाकी खर्च अनाथालय की दुकानों से मिलने वाले किराए से पूरा हो जाता है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से अनाथालय में दानदाता ही नहीं आ रहे हैं। इससे यहां बच्चों और स्टाफ के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। अनाथालय के प्रबंधक हर्षवर्धन ने बुधवार को डीएम से मदद दिलाने की अपील की थी। इसके बाद क्रेडाई अध्यक्ष व समाजसेवी ने रमनदीप ने राशन का कुछ इंतजाम करा दिया है। प्रबंधक का कहना है कि प्रबंधन के पास उपलब्ध भंडार से तीन से चार दिन में ही खाने का संकट खड़ा हो जाएगा। इसे देखते हुए उन्हें विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पर्प्पू भरतौल से सहायता मांगी है। विधायक ने अनाथालय को जल्द ही राशन व अन्य मदद देने का आश्वासन दिया है।
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संप्रेक्षण गृह पहुंचकर देेखा ..खाने के चीजों की कमी तो नहीं

खाने की चीजों की उपलब्धता जांचने को गुरुवार को जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार ने गुरुवार को संप्रेक्षण गृह किशोर की व्यवस्थाएं चेक कीं। उन्होंने यहां आईसोलेशन रूम को भी देखा और सभी से मास्क और सैनिटाइजर को प्रयोग करने को कहा।
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‘अनाथालय का संचालन दानदाताओं की मदद से ही होता आ रहा है। लॉकडाउन की वजह से दानदाता नहीं आ पा रहे। जबकि अनाथालय के पास इतना राशन का इतना भंडार नहीं है कि वे इतने बच्चे और स्टाफ को दोनो वक्त का भोजन ज्यादा दिनों तक के लिए उपलब्ध करा सके। इसलिए मैंने डीएम और जनप्रतिनिधियों से मदद के लिए कहा है।’
- हर्षवर्धन, प्रबंधक, आर्यसमाज अनाथालय

‘अनाथालय ने मुझे दिक्कत बताई थी। मैंने राशन व अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करा दिया है। आगे भी प्रशासन अनाथालय की पूरी मदद करेगा।’
- नितीश कुमार, जिलाधिकारी
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