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Bareilly News: खाने की तलाश, पिल्लों की निगरानी, प्रजनन काल में हमलावर हो जाते हैं कुत्ते
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ ने कुत्तों के हमले बढ़ने की कई वजह बताई है। भोजन की तलाश, पिल्लाें की निगरानी, प्रजनन काल में खतरे की आशंका भांपकर ये हमलावर हो जाते हैं। किसी व्यक्ति के डरने पर होने वाले हार्मोनल बदलावों को सूंघकर ये स्थिति को भांप लेते हैं और हमला बोल देते हैं।
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक, खानपान में बदलाव की वजह से कुत्तों के प्रजनन काल में भी बदलाव आया है। फिलहाल, इनका प्रजनन काल जुलाई और अगस्त हो गया है। फीमेल डॉग के हीट में आने पर कई नर कुत्ते उसके पीछे घूमते हैं। उनके बीच प्रतिस्पर्धा, लड़ाई, चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
बारिश में भोजन की कमी भी कुत्तों के व्यवहार को प्रभावित करती है। पहले सड़क के किनारे फेके गए मांस के अवशेष से ये पेट भर लेते थे। सावन में मांस के अवशेष नहीं मिलने से कुत्तों को भोजन की तलाश में अधिक भटकना पड़ रहा है। भोजन की प्रतिस्पर्धा उन्हें अधिक आक्रामक बना सकती है। समाधान कुत्तों को भगाने या मारने में नहीं, बल्कि बधियाकरण-टीकाकरण, वैज्ञानिक फीडिंग व्यवस्था, खुले कचरे पर नियंत्रण, घायल कुत्तों के इलाज, लोगों को कुत्तों के व्यवहार के प्रति जागरूक करने में है।
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पिल्लों के पास न जाएं बच्चे, नोच लेते हैं कुत्ते
डॉ. पावड़े के मुताबिक, पिल्लों को खतरा महसूस होने पर फीमेल डॉग किसी पर भी हमला कर सकती है। किसी कुत्ते के पास हड्डी, मांस या भोजन पड़ा हो, कोई बच्चा उसे हटाने या छीनने की कोशिश करे तो वे हमला कर सकते हैं। आसपास मौजूद कुत्ते भी प्रतिक्रिया में शामिल हो सकते हैं। पांच साल तक के बच्चे भागने में सक्षम नहीं होते। गिरने पर कई कुत्ते घेर सकते हैं। छोटे बच्चों को अकेले कुत्तों के पास न जाने दें।
कमजोरों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
कुत्ते इंसान की शारीरिक भाषा और व्यवहार को काफी हद तक पहचानते हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, कमजोर, बुजुर्ग या जमीन पर बैठकर खाना बीनने वाले व्यक्ति के आसपास कई कुत्ते एक साथ जमा हो सकते हैं। बरातघरों या ऐसे स्थानों के आसपास जहां भोजन के अवशेष रहते हैं, उसे खाने के लिए वहां कुत्ते झुंड के रूप में मौजूद रहते हैं। वे जमीन पर बैठे व्यक्ति को घेरकर हमला कर देते हैं।
घायल कुत्ते हो सकते हैं चिड़चिड़े
घायल कुत्ता शरीर में दर्द और डर के कारण ज्यादा आक्रामक हो सकता है। विशेषज्ञ ने बताया कि घायल या बीमार कुत्तों को डंडे से भगाना अथवा पत्थर मारना खतरनाक हो सकता है। कुत्तों के घाव में कीड़े पड़ने पर फिनाइल जैसे रसायन डालने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। कहा, जलन और ऊतक क्षतिग्रस्त होने पर कुत्तों के हमलावर होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे कुत्तों का पशु चिकित्सक से उपचार कराया जाना चाहिए।
फीडिंग प्वाइंट से मिलेगी राहत
कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट बनाने की योजना पर कहा कि इससे राहत मिलेगी या नहीं, यह निर्भर होगा कि वहां किस तरह का भोजन दिया जाता है, व्यवस्था कैसी रहती है। किसी स्थान पर खाना डाल देना समाधान नहीं है। कुत्तों को भोजन देने के लिए निर्धारित स्थान, समय, सफाई जरूरी है। भोजन वहां नहीं देना चाहिए, जहां बच्चों की आवाजाही हो।
बधियाकरण और टीकाकरण दोनों जरूरी
विशेषज्ञ ने मौजूदा बधियाकरण अभियान को कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए अपर्याप्त बताया। कहा कि शहर में हजारों कुत्ते हैं। इनमें से कुछ के बधियाकरण का असर सीमित रहेगा। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर एआरवी टीकाकरण, कुत्तों की पहचान, नियमित निगरानी, प्रभावी कचरा प्रबंधन जरूरी है। सिर्फ कुत्तों की संख्या कम करना पर्याप्त नहीं, सभी पहलू देखने होंगे।
कुत्ता दौड़ाए तो भागें नहीं
डॉ. पावड़े के मुताबिक, कुत्ता पीछे पड़ जाए तो घबराकर भागने के बजाय शांत रहने की कोशिश करें। अचानक हाथ-पैर चलाने, कुत्ते को मारने की कोशिश न करें। लगातार आंखों में घूरने से बचें और संभव हो तो धीरे-धीरे दूरी बनाएं। बच्चों को विशेष रूप से कुत्तों को छेड़ने, उसकी पूंछ खींचने, उसके पिल्लों के पास जाने या भोजन करते कुत्ते को परेशान करने से रोकना चाहिए। पालतू कुत्ते का व्यवहार बदले तो जांच कराएं।
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बचाव के उपाय
- छोटे बच्चों को गली के कुत्तों, अनजान जानवरों के साथ न छोड़ें।
- पालतू पशु का एंटी रेबीज टीकाकरण कराएं। व्यवहार में बदलाव दिखे तो पशुचिकित्सक को बताएं।
- बेवजह आक्रामकता, असामान्य आवाज, लगातार लार आए, लड़खड़ाए तो पशु से दूरी बनाएं।
- काटने, खरोंचने के तुरंत बाद घाव को 15 मिनट तक धोएं। पोविडोन-आयोडीन एंटीसेप्टिक लगाएं।
- मिर्च, हल्दी, तेल, चूना, मिट्टी आदि न लगाएं। घाव को कसकर न बांधें। खुद से टांके न लगाएं।
- काटने के बाद लक्षण का इंतजार न करें। खरोंच, छिलने पर खून न निकले तो भी वैक्सीन लगवाएं।
- काटने से गंभीर जख्म होने, पहले से हुए जख्म पर पशु के काटने या खरोंचने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन लगाएं।
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संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक, खानपान में बदलाव की वजह से कुत्तों के प्रजनन काल में भी बदलाव आया है। फिलहाल, इनका प्रजनन काल जुलाई और अगस्त हो गया है। फीमेल डॉग के हीट में आने पर कई नर कुत्ते उसके पीछे घूमते हैं। उनके बीच प्रतिस्पर्धा, लड़ाई, चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
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बारिश में भोजन की कमी भी कुत्तों के व्यवहार को प्रभावित करती है। पहले सड़क के किनारे फेके गए मांस के अवशेष से ये पेट भर लेते थे। सावन में मांस के अवशेष नहीं मिलने से कुत्तों को भोजन की तलाश में अधिक भटकना पड़ रहा है। भोजन की प्रतिस्पर्धा उन्हें अधिक आक्रामक बना सकती है। समाधान कुत्तों को भगाने या मारने में नहीं, बल्कि बधियाकरण-टीकाकरण, वैज्ञानिक फीडिंग व्यवस्था, खुले कचरे पर नियंत्रण, घायल कुत्तों के इलाज, लोगों को कुत्तों के व्यवहार के प्रति जागरूक करने में है।
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पिल्लों के पास न जाएं बच्चे, नोच लेते हैं कुत्ते
डॉ. पावड़े के मुताबिक, पिल्लों को खतरा महसूस होने पर फीमेल डॉग किसी पर भी हमला कर सकती है। किसी कुत्ते के पास हड्डी, मांस या भोजन पड़ा हो, कोई बच्चा उसे हटाने या छीनने की कोशिश करे तो वे हमला कर सकते हैं। आसपास मौजूद कुत्ते भी प्रतिक्रिया में शामिल हो सकते हैं। पांच साल तक के बच्चे भागने में सक्षम नहीं होते। गिरने पर कई कुत्ते घेर सकते हैं। छोटे बच्चों को अकेले कुत्तों के पास न जाने दें।
कमजोरों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरा
कुत्ते इंसान की शारीरिक भाषा और व्यवहार को काफी हद तक पहचानते हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, कमजोर, बुजुर्ग या जमीन पर बैठकर खाना बीनने वाले व्यक्ति के आसपास कई कुत्ते एक साथ जमा हो सकते हैं। बरातघरों या ऐसे स्थानों के आसपास जहां भोजन के अवशेष रहते हैं, उसे खाने के लिए वहां कुत्ते झुंड के रूप में मौजूद रहते हैं। वे जमीन पर बैठे व्यक्ति को घेरकर हमला कर देते हैं।
घायल कुत्ते हो सकते हैं चिड़चिड़े
घायल कुत्ता शरीर में दर्द और डर के कारण ज्यादा आक्रामक हो सकता है। विशेषज्ञ ने बताया कि घायल या बीमार कुत्तों को डंडे से भगाना अथवा पत्थर मारना खतरनाक हो सकता है। कुत्तों के घाव में कीड़े पड़ने पर फिनाइल जैसे रसायन डालने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। कहा, जलन और ऊतक क्षतिग्रस्त होने पर कुत्तों के हमलावर होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे कुत्तों का पशु चिकित्सक से उपचार कराया जाना चाहिए।
फीडिंग प्वाइंट से मिलेगी राहत
कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट बनाने की योजना पर कहा कि इससे राहत मिलेगी या नहीं, यह निर्भर होगा कि वहां किस तरह का भोजन दिया जाता है, व्यवस्था कैसी रहती है। किसी स्थान पर खाना डाल देना समाधान नहीं है। कुत्तों को भोजन देने के लिए निर्धारित स्थान, समय, सफाई जरूरी है। भोजन वहां नहीं देना चाहिए, जहां बच्चों की आवाजाही हो।
बधियाकरण और टीकाकरण दोनों जरूरी
विशेषज्ञ ने मौजूदा बधियाकरण अभियान को कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए अपर्याप्त बताया। कहा कि शहर में हजारों कुत्ते हैं। इनमें से कुछ के बधियाकरण का असर सीमित रहेगा। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर एआरवी टीकाकरण, कुत्तों की पहचान, नियमित निगरानी, प्रभावी कचरा प्रबंधन जरूरी है। सिर्फ कुत्तों की संख्या कम करना पर्याप्त नहीं, सभी पहलू देखने होंगे।
कुत्ता दौड़ाए तो भागें नहीं
डॉ. पावड़े के मुताबिक, कुत्ता पीछे पड़ जाए तो घबराकर भागने के बजाय शांत रहने की कोशिश करें। अचानक हाथ-पैर चलाने, कुत्ते को मारने की कोशिश न करें। लगातार आंखों में घूरने से बचें और संभव हो तो धीरे-धीरे दूरी बनाएं। बच्चों को विशेष रूप से कुत्तों को छेड़ने, उसकी पूंछ खींचने, उसके पिल्लों के पास जाने या भोजन करते कुत्ते को परेशान करने से रोकना चाहिए। पालतू कुत्ते का व्यवहार बदले तो जांच कराएं।
बचाव के उपाय
- छोटे बच्चों को गली के कुत्तों, अनजान जानवरों के साथ न छोड़ें।
- पालतू पशु का एंटी रेबीज टीकाकरण कराएं। व्यवहार में बदलाव दिखे तो पशुचिकित्सक को बताएं।
- बेवजह आक्रामकता, असामान्य आवाज, लगातार लार आए, लड़खड़ाए तो पशु से दूरी बनाएं।
- काटने, खरोंचने के तुरंत बाद घाव को 15 मिनट तक धोएं। पोविडोन-आयोडीन एंटीसेप्टिक लगाएं।
- मिर्च, हल्दी, तेल, चूना, मिट्टी आदि न लगाएं। घाव को कसकर न बांधें। खुद से टांके न लगाएं।
- काटने के बाद लक्षण का इंतजार न करें। खरोंच, छिलने पर खून न निकले तो भी वैक्सीन लगवाएं।
- काटने से गंभीर जख्म होने, पहले से हुए जख्म पर पशु के काटने या खरोंचने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन लगाएं।