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नगर निगम में घपले करो, दबाए जाओ
बरेली।
Updated Sat, 04 Mar 2017 01:06 AM IST
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Do leakages in municipal, go down
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नगर निगम में हो रहे घपले और उस पर नगर आयुक्त की चुप्पी के लिए वैसे तो कई मामले हैं, लेकिन समझाने के लिए सिर्फ एक उदाहरण ही काफी है। वर्ष 2015 में पीर बहोड़ा में करीब 350 मीटर नाला सफाई के लिए 17 लाख रुपए जारी किए गए थे लेकिन सफाई के लिए नाले में मशीन उतारना तो दूर एक झाडू् तक नहीं लगी। बरसात में पूरा इलाका नाले की वजह से जलभराव की चपेट में आ गया। स्थानीय पार्षद डॉ. अजय सक्सेना ने इसकी लिखित शिकायत नगर निगम में की। तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया। आज तक इस मामले की फाइल ही जांच अधिकारी को नहीं सौंपी नहीं गई। मामला दबा दिया गया।
डीजल चोरी का मामला हो या फिर निर्माण और सफाई का सारे मामलों की जांच दबा दी गई। नीम की मजार में टाइल्स की गुणवत्ता पर सनसिटी विस्तार के पार्षद ने शिकायत की तो जांच गठित हुई थी आज तक इसकी कोई रिपोर्ट नहीं आई। मुंशीनगर में नाला निर्माण की में चार इंच पर सरिया डाली जानी थी लेकिन 13- 13 इंच पर डाली गई। पार्षद ने दावा किया कि निर्माण तोड़कर इसकी पुष्टि आसानी से हो जाएगी। मौके पर जांच टीम भी गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।
होर्डिंग की गाढ़ी कमाई तो जेब में जा रही
नगर निगम में प्रशासनिक अधिकारियों की जिद का आलम ये है कि उन्होंने कार्यकारिणी के फैसले को भी दरकिनार कर दिया। पिछले साल शहर में लगी अवैध होर्डिंग को हटाने के लिए कार्यकारिणी ने अपनी मंजूरी दी लेकिन इसे आज तक नहीं हटाया गया है। इसका पैसा भी नगर निगम के खाते में नहीं जमा हो रहा है। होर्डिंग की जिम्मेदारी पहले सहायक मुहर्रिर रामसिंह जाटव पर थी, जब मामला सिर के ऊपर से निकलने लगा तो नगर आयुक्त शीलधर यादव ने पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा को यह काम सौंप दिया गया। उत्तम कुमार वर्मा भी होर्डिंग को हटाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं और न ही इसका कोई किराया नगर निगम में जमा करवाया जा रहा है।
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एक नजर इधर भी
ऑडिटर ने डोर टू डोर मामले में अधिक भुगतान की रिपोर्ट दी थी इस पर कोई जांच नहीं हुई।
नाला निर्माण में मिट्टी बेची जा रही थी, इसकी शिकायत की थी
डीजल से जुडे़ घोटाले और शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं
गांधी उद्यान में पेड़ काटकर बेच दिए गए, पर्यावरण अभियंता जिम्मेदार हैं, कोई जांच नहीं
14 गाटर नगर निगम परिसर से चोरी हो गए, एक कर्मी सस्पेंड, एफआईआर भी हुई थी। लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई
नगर निगम में जितने घपले और घोटालों की शिकायत हुई है अगर उसमें गंभीरता से जांच हो जाती तो जिम्मेदार लोगों के कारनामे सामने आते। प्रशासनिक अधिकारियों की हीलाहवाली है। जांच को दबाया जा रहा है। नाला सफाई में तो लाखों हड़प गए जांच तक नहीं हुई। हमारे इलाके के लोगों ने खुद नाला साफ किया।
डॉ. अजय सक्सेना, पार्षद, वार्ड 48
डोर टू डोर की जांच हो या फिर होर्डिंग हटाने का मामला अधिकारियाें की मिलीभगत से कुछ भी संभव नहीं है। नगर निगम का पैसा लुटाया जा रहा है। जिन जांचों की रिपोर्ट नहीं आई है वह भी सामने आनी चाहिए।
राजेश अग्रवाल, सपा पार्षद दल के नेता
नाला सफाई में 17 लाख रुपए के घोटाले की शिकायत थी, इसकी जांच मुझे सौंपी गई थी। लेकिन जब तक मैं स्वास्थ्य अधिकारी रहा तब तक मुझे जांच की फाइल ही नहीं दी गई।
डॉ. अशोक कुमार, पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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डीजल चोरी का मामला हो या फिर निर्माण और सफाई का सारे मामलों की जांच दबा दी गई। नीम की मजार में टाइल्स की गुणवत्ता पर सनसिटी विस्तार के पार्षद ने शिकायत की तो जांच गठित हुई थी आज तक इसकी कोई रिपोर्ट नहीं आई। मुंशीनगर में नाला निर्माण की में चार इंच पर सरिया डाली जानी थी लेकिन 13- 13 इंच पर डाली गई। पार्षद ने दावा किया कि निर्माण तोड़कर इसकी पुष्टि आसानी से हो जाएगी। मौके पर जांच टीम भी गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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होर्डिंग की गाढ़ी कमाई तो जेब में जा रही
नगर निगम में प्रशासनिक अधिकारियों की जिद का आलम ये है कि उन्होंने कार्यकारिणी के फैसले को भी दरकिनार कर दिया। पिछले साल शहर में लगी अवैध होर्डिंग को हटाने के लिए कार्यकारिणी ने अपनी मंजूरी दी लेकिन इसे आज तक नहीं हटाया गया है। इसका पैसा भी नगर निगम के खाते में नहीं जमा हो रहा है। होर्डिंग की जिम्मेदारी पहले सहायक मुहर्रिर रामसिंह जाटव पर थी, जब मामला सिर के ऊपर से निकलने लगा तो नगर आयुक्त शीलधर यादव ने पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा को यह काम सौंप दिया गया। उत्तम कुमार वर्मा भी होर्डिंग को हटाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं और न ही इसका कोई किराया नगर निगम में जमा करवाया जा रहा है।
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एक नजर इधर भी
ऑडिटर ने डोर टू डोर मामले में अधिक भुगतान की रिपोर्ट दी थी इस पर कोई जांच नहीं हुई।
नाला निर्माण में मिट्टी बेची जा रही थी, इसकी शिकायत की थी
डीजल से जुडे़ घोटाले और शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं
गांधी उद्यान में पेड़ काटकर बेच दिए गए, पर्यावरण अभियंता जिम्मेदार हैं, कोई जांच नहीं
14 गाटर नगर निगम परिसर से चोरी हो गए, एक कर्मी सस्पेंड, एफआईआर भी हुई थी। लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई
नगर निगम में जितने घपले और घोटालों की शिकायत हुई है अगर उसमें गंभीरता से जांच हो जाती तो जिम्मेदार लोगों के कारनामे सामने आते। प्रशासनिक अधिकारियों की हीलाहवाली है। जांच को दबाया जा रहा है। नाला सफाई में तो लाखों हड़प गए जांच तक नहीं हुई। हमारे इलाके के लोगों ने खुद नाला साफ किया।
डॉ. अजय सक्सेना, पार्षद, वार्ड 48
डोर टू डोर की जांच हो या फिर होर्डिंग हटाने का मामला अधिकारियाें की मिलीभगत से कुछ भी संभव नहीं है। नगर निगम का पैसा लुटाया जा रहा है। जिन जांचों की रिपोर्ट नहीं आई है वह भी सामने आनी चाहिए।
राजेश अग्रवाल, सपा पार्षद दल के नेता
नाला सफाई में 17 लाख रुपए के घोटाले की शिकायत थी, इसकी जांच मुझे सौंपी गई थी। लेकिन जब तक मैं स्वास्थ्य अधिकारी रहा तब तक मुझे जांच की फाइल ही नहीं दी गई।
डॉ. अशोक कुमार, पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी