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डीएम ने देखे जिला अस्पताल के मर्ज
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 11 Sep 2016 01:26 AM IST
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शनिवार को जिलाधिकारी पंकज यादव ने तीन घंटे तक जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। जिस विभाग में गए वहां छोटी- छोटी चीजाें को चेक करते दिखे। पहली बार कोई डीएम मरीजाें को बंटने वाले भोजन की रसोई में भी पहुंचे। उन्हाेंने डॉक्टराें की उपस्थिति चेक की। पांच डॉक्टराें समेत 12 लोग अनुपस्थित व देर से आए। इनका एक दिन का वेतन काटने को कहा है। साथ ही जो कमियां दिखीं उन्हें दुरुस्त करने के निर्देश देते रहे।
सुबह करीब साढ़े नौ बजे डीएम पंकज यादव की गाड़ी रुकी तो अस्पताल में सभी अलर्ट हो गए। सबसे पहले ओपीडी पहुंचे। फरीदपुर के मरीज हरचरन को सर्जन डॉ. एके गुप्ता ने बाहर की दवा लिखी थी। डॉक्टर से जवाब मांगा गया है। उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो डॉ. वागीश वैश्य, डॉ. ब्रह्मजीत कौर, डॉ. अजय मोहन अग्रवाल, डॉ. शशि कटियार और डॉ. ललित कु मार सुबह साढे़ दस बजे तक ओपीडी में नहीं मिले। उन्हाेंने इनकी अनुपस्थिति चढ़ाने को कहा और जवाब मांगा। हालांकि डॉ. वागीश वैश्य और डॉ. एएम अग्रवाल तुरंत पहुंच गए और बताया कि वे राउंड पर थे। डीएम बोले, जाएं पहले मरीज देखें। इमरजेंसी और पेईंग वार्ड की हालत देखी। यहां मरीज कम थे। न्यू ओटी व सर्जिकल वार्ड में अग्निशमन यंत्र की वैधता चेक की। रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन कराने आए सेंट्रल जेल के कैदी को साथ लाए सिपाही को पकड़ लिया। उससे काफी पूछताछ की। कैदी के पर्चे पर किसी डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं थे। जगह- जगह परेशान तीमारदार और मरीज मिलते रहे। उनकी समस्या दूर की। नसबंदी के बाद बच्चा होने की शिकायत पर जांच को कहा है। डीएम के साथ सीएमएस परवीन जहां भी थीं। सीएमओ डॉ. विजय यादव और एडीएम सिटी आलोक कुमार आखिर में पहुंचे।
बासी सी रोटी थोड़ी सी दाल...
किसी डीएम ने मरीजाें की रसोई में पहुंचे तो दोपहर का भोजन बन रहा था। रोटी देखकर बोले कि यह कल की है क्या? कर्मचारियों ने सफाई देते हुए कहा कि आज की है टोकरी में नहीं रख पाए थे। दस लीटर के कुकर में दाल पक रही थी, उसे चम्मच से निकाल कर देखा। बोले इतने छोटे कुकर में दाल कैसे बंटेगी। बताया गया कि आधे मरीजों को बंट चुकी है।
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एक बेड पर तीन-तीन बच्चे
बच्चा वार्ड में हालत खराब है। यहां एक बेड पर तीन- तीन बच्चे बुखार के भर्ती थे। डीएम पहुंचे तो तुरंत कुछ बच्चाें को बेड से उतार दिया लेकिन अभिभावकाें ने पोल खोल दी। डीएम बोले तीन घंटे में सुधार लिया किसी दिन अचानक आना पड़ेगा।
घर में ऐसी गंदगी पर रह लेंगे
डीएम ने अस्पताल इमरजेंसी व आयुष विंग के पास पानी और गंदगी देखी। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि ऐसी गंदगी में क्या आप रह लेंगे। इसे ठीक कराया जाए। सफाई कर्मचारी से नहीं बल्कि उसके ठेकेदार से सफाई व्यवस्था को कहें। अगर सुधार न हो तो कार्रवाई करें।
ये इलाज सुझाए
- खराब मशीनों को ठीक कराएं
- सफाई कर्मी ड्रेस में आएंगे
- ओपीडी वार्ड का दायरा बढ़े, कुर्सियां लगवाएं
- दवा वितरण काउंटर पर टीन शेड डाली जाए
- बच्चा और डेंगू वार्ड में बेड बढ़वाएं
- न्यू सर्जिकल ओटी जल्द शुरू हो
- टूटे दरवाजे ठीक करवाएं
- न्यू भवन की सीलन जल्द दूर हो
- दवाआें की बराबर सैंपलिंग कराएं
- मरीजों का भोजन सफाई से परोसें
- डॉक्टर सही समय पर पहुंचें
- न्यू बिल्डिंग की खराब रोड ठीक हो
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सुबह करीब साढ़े नौ बजे डीएम पंकज यादव की गाड़ी रुकी तो अस्पताल में सभी अलर्ट हो गए। सबसे पहले ओपीडी पहुंचे। फरीदपुर के मरीज हरचरन को सर्जन डॉ. एके गुप्ता ने बाहर की दवा लिखी थी। डॉक्टर से जवाब मांगा गया है। उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो डॉ. वागीश वैश्य, डॉ. ब्रह्मजीत कौर, डॉ. अजय मोहन अग्रवाल, डॉ. शशि कटियार और डॉ. ललित कु मार सुबह साढे़ दस बजे तक ओपीडी में नहीं मिले। उन्हाेंने इनकी अनुपस्थिति चढ़ाने को कहा और जवाब मांगा। हालांकि डॉ. वागीश वैश्य और डॉ. एएम अग्रवाल तुरंत पहुंच गए और बताया कि वे राउंड पर थे। डीएम बोले, जाएं पहले मरीज देखें। इमरजेंसी और पेईंग वार्ड की हालत देखी। यहां मरीज कम थे। न्यू ओटी व सर्जिकल वार्ड में अग्निशमन यंत्र की वैधता चेक की। रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन कराने आए सेंट्रल जेल के कैदी को साथ लाए सिपाही को पकड़ लिया। उससे काफी पूछताछ की। कैदी के पर्चे पर किसी डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं थे। जगह- जगह परेशान तीमारदार और मरीज मिलते रहे। उनकी समस्या दूर की। नसबंदी के बाद बच्चा होने की शिकायत पर जांच को कहा है। डीएम के साथ सीएमएस परवीन जहां भी थीं। सीएमओ डॉ. विजय यादव और एडीएम सिटी आलोक कुमार आखिर में पहुंचे।
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बासी सी रोटी थोड़ी सी दाल...
किसी डीएम ने मरीजाें की रसोई में पहुंचे तो दोपहर का भोजन बन रहा था। रोटी देखकर बोले कि यह कल की है क्या? कर्मचारियों ने सफाई देते हुए कहा कि आज की है टोकरी में नहीं रख पाए थे। दस लीटर के कुकर में दाल पक रही थी, उसे चम्मच से निकाल कर देखा। बोले इतने छोटे कुकर में दाल कैसे बंटेगी। बताया गया कि आधे मरीजों को बंट चुकी है।
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एक बेड पर तीन-तीन बच्चे
बच्चा वार्ड में हालत खराब है। यहां एक बेड पर तीन- तीन बच्चे बुखार के भर्ती थे। डीएम पहुंचे तो तुरंत कुछ बच्चाें को बेड से उतार दिया लेकिन अभिभावकाें ने पोल खोल दी। डीएम बोले तीन घंटे में सुधार लिया किसी दिन अचानक आना पड़ेगा।
घर में ऐसी गंदगी पर रह लेंगे
डीएम ने अस्पताल इमरजेंसी व आयुष विंग के पास पानी और गंदगी देखी। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि ऐसी गंदगी में क्या आप रह लेंगे। इसे ठीक कराया जाए। सफाई कर्मचारी से नहीं बल्कि उसके ठेकेदार से सफाई व्यवस्था को कहें। अगर सुधार न हो तो कार्रवाई करें।
ये इलाज सुझाए
- खराब मशीनों को ठीक कराएं
- सफाई कर्मी ड्रेस में आएंगे
- ओपीडी वार्ड का दायरा बढ़े, कुर्सियां लगवाएं
- दवा वितरण काउंटर पर टीन शेड डाली जाए
- बच्चा और डेंगू वार्ड में बेड बढ़वाएं
- न्यू सर्जिकल ओटी जल्द शुरू हो
- टूटे दरवाजे ठीक करवाएं
- न्यू भवन की सीलन जल्द दूर हो
- दवाआें की बराबर सैंपलिंग कराएं
- मरीजों का भोजन सफाई से परोसें
- डॉक्टर सही समय पर पहुंचें
- न्यू बिल्डिंग की खराब रोड ठीक हो