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Bareilly News: एनक्वॉस टीम की परीक्षा में जिला अस्पताल की बदइंतजामी उजागर
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बरेली। जिला अस्पताल के तीन दिवसीय मूल्यांकन के लिए आई नेशनल क्वॉलिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्वॉस) टीम का सामना परिसर में जलभराव से हुआ। पानी पाइप लाइन फटने से मोर्चरी, नेत्र विभाग, ओटी, पैथोलॉजी के सामने जलभराव रहा।
रुद्र प्रयाग की डॉ. मोनिका राणा, उदयपुर के डॉ. दिनेश गुज्जर, दिल्ली के डॉ. अरुण सक्सेना की टीम सुबह 11 बजे जिला अस्पताल पहुंची। एडी एसआईसी से मुलाकात के बाद टीम बच्चा वार्ड पहुंची। बच्चों के वार्ड में परिजन की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। सुरक्षाकर्मी ने भर्ती बच्चों की मां के अलावा मौजूद सभी को बाहर निकाला। वार्ड में 31 बच्चे भर्ती थे। एनआरसी में भर्ती बच्चों का हाल जाना और इलाज के बारे में जानकारी ली। फिर ओपीडी के बाहर पानी बहते देख पूछताछ की। स्टाफ ने सुबह ही पाइप लाइन फटने की जानकारी दी।
ओपीडी में हेल्थ एटीएम के संचालन और क्रियाशीलता की जांच की। प्रभारी डॉ. राहुल बाजपेई ने रक्त जांच के अलावा अन्य जांचें होने की जानकारी दी। एक सदस्य ने अपनी जांच कर व्यवस्था परखी। नेत्र जांच कक्ष पहुंचने पर ओपीडी 300 बेड अस्पताल में शिफ्ट होने का पता चला।
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खुले तार, अग्निशमन सिलिंडर के रखरखाव पर आपत्ति
फोटो
ओपीडी में खुली वायरिंग देख टीम ने आपत्ति जताई। सुधार के लिए कहा। हेपेटाइटिस जांच कक्ष बंद मिला। इसके बाहर टंगे अग्निशमन सिलिंडर पर एक्सपायरी और रिफिलिंग डेट देखने के लिए हाथ लगाया तो वह हिलने लगा। टीम ने दुर्घटना की आशंका जताते हुए तुरंत ठीक कराने के लिए कहा। जमीन पर बैठी महिला अपने बच्चों को खाना-पानी दे रही थी। इस पर आपत्ति जताई और पास के बेंच पर बिठाया।
स्तनपान कक्ष की खिड़की खुली मिली
फोटो
स्तपनपान कक्ष में पारदर्शी खिड़की पर पर्दा ना होने पर टीम ने प्राइवेसी पर सवाल उठाए। बैठने की उचित व्यवस्था नहीं मिली। फिर टीम ने क्रमवार जनरल फिजिशियन, चाइल्ड, डेंटल, ऑर्थो, प्लास्टर, एडोलसेंट, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, रेडियोलॉजी, ब्लड बैंक, नेत्र सर्जरी, ओएसटी सेंटर में व्यवस्थाओं को देखा। टीम के साथ एमएस डॉ. एलके सक्सेना, हॉस्पिटल मैनेजर पूजा चौहान, मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार, एनसीडी प्रभारी डॉ. मयंक समेत अन्य स्टाफ मौजूद रहा।
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रुद्र प्रयाग की डॉ. मोनिका राणा, उदयपुर के डॉ. दिनेश गुज्जर, दिल्ली के डॉ. अरुण सक्सेना की टीम सुबह 11 बजे जिला अस्पताल पहुंची। एडी एसआईसी से मुलाकात के बाद टीम बच्चा वार्ड पहुंची। बच्चों के वार्ड में परिजन की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। सुरक्षाकर्मी ने भर्ती बच्चों की मां के अलावा मौजूद सभी को बाहर निकाला। वार्ड में 31 बच्चे भर्ती थे। एनआरसी में भर्ती बच्चों का हाल जाना और इलाज के बारे में जानकारी ली। फिर ओपीडी के बाहर पानी बहते देख पूछताछ की। स्टाफ ने सुबह ही पाइप लाइन फटने की जानकारी दी।
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ओपीडी में हेल्थ एटीएम के संचालन और क्रियाशीलता की जांच की। प्रभारी डॉ. राहुल बाजपेई ने रक्त जांच के अलावा अन्य जांचें होने की जानकारी दी। एक सदस्य ने अपनी जांच कर व्यवस्था परखी। नेत्र जांच कक्ष पहुंचने पर ओपीडी 300 बेड अस्पताल में शिफ्ट होने का पता चला।
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खुले तार, अग्निशमन सिलिंडर के रखरखाव पर आपत्ति
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ओपीडी में खुली वायरिंग देख टीम ने आपत्ति जताई। सुधार के लिए कहा। हेपेटाइटिस जांच कक्ष बंद मिला। इसके बाहर टंगे अग्निशमन सिलिंडर पर एक्सपायरी और रिफिलिंग डेट देखने के लिए हाथ लगाया तो वह हिलने लगा। टीम ने दुर्घटना की आशंका जताते हुए तुरंत ठीक कराने के लिए कहा। जमीन पर बैठी महिला अपने बच्चों को खाना-पानी दे रही थी। इस पर आपत्ति जताई और पास के बेंच पर बिठाया।
स्तनपान कक्ष की खिड़की खुली मिली
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स्तपनपान कक्ष में पारदर्शी खिड़की पर पर्दा ना होने पर टीम ने प्राइवेसी पर सवाल उठाए। बैठने की उचित व्यवस्था नहीं मिली। फिर टीम ने क्रमवार जनरल फिजिशियन, चाइल्ड, डेंटल, ऑर्थो, प्लास्टर, एडोलसेंट, पैथोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, रेडियोलॉजी, ब्लड बैंक, नेत्र सर्जरी, ओएसटी सेंटर में व्यवस्थाओं को देखा। टीम के साथ एमएस डॉ. एलके सक्सेना, हॉस्पिटल मैनेजर पूजा चौहान, मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार, एनसीडी प्रभारी डॉ. मयंक समेत अन्य स्टाफ मौजूद रहा।