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Bareilly News: पश्चिम से निराश... दक्षिण-पूर्व एशिया में उजाले की तलाश
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बरेली। पश्चिम एशिया में युद्ध की आंच से परेशान इत्र और एसेंशियल ऑयल के कारोबारी अब पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में कारोबारी उजाला तलाश रहे हैं। खासतौर पर जापान, कोरिया, मलयेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया आदि देशों के कारोबारियों से संपर्क साध रहे हैं। उनको छोटे, लेकिन उम्मीद जगाने के लिए पर्याप्त ऑर्डर मिलने भी लगे हैं। उद्यमियों का कहना है कि पश्चिम एशिया का युद्ध भले ही दो सप्ताह के लिए थम गया है, लेकिन कारोबार को इससे कोई खास राहत नहीं मिलेगी।
बरेली के साथ ही बदायूं, उझानी, रामपुर में एसेंशियल ऑयल का बड़ा कारोबार है। बरेली में बने इत्र की पश्चिम एशिया में काफी मांग है। युद्ध के कारण 40 दिनों में एसेंशियल ऑयल और इत्र का करीब 300 का कारोबार प्रभावित हुआ है। युद्ध से पहले जिन उद्यमियों ने माल भेजा था, उनका करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान फंस गया है। युद्ध थमने के बाद सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात से ऑर्डर भी आए हैं, लेकिन उद्यमी दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।
उद्यमियों का कहना है कि सऊदी अरब तक माल पहुंचने में 20 दिन लगते हैं। 30 से 60 दिन की क्रेडिट अवधि होती है। यानी करीब तीन माह तक रकम फंसी रहती है। ऐसे में यदि 15 दिन बाद युद्ध फिर शुरू हो जाता है तो माल रास्ते में ही फंस जाएगा। ऐसे में मुनाफे से ज्यादा रकम डूबने का खतरा ज्यादा है।
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इसकी भरपाई के लिए उद्यमियों ने पूर्व व दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के कारोबारियों से संपर्क करना शुरू किया है। कुछ उद्यमी आस्ट्रेलिया के कारोबारियों के भी संपर्क में हैं। जैसमिन, ऊद, रोस, बखूर, मुखल्लत जैसे इत्रों के ऑर्डर भी कुछ देशों से मिले हैं।
उद्यमी बोले- और जोखिम नहीं उठा सकते
फोटो
पश्चिम एशिया में आने वाले दिनों में भी शांति बनी रहेगी, यह निश्चित नहीं है। बरेली रीजन के उद्यमियों की 100 करोड़ से ज्यादा की रकम फंसी हुई है। ऐसे में और जोखिम नहीं ले सकते। यही कारण है कि पूर्व व दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के कारोबारियों से संपर्क साध रहे हैं। कुछ देशों से ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। - गौरव मित्तल, इत्र कारोबारी
युद्ध के कारण एसेंशियल ऑयल के कारोबार को काफी नुकसान हुआ है। पश्चिम एशिया के देशों में ईद और इसके बाद सहालग होने के कारण ऑयल की मांग काफी होती थी, लेकिन युद्ध की वजह से माल तैयार होने के बाद भी भेजा नहीं जा सका। ऐसे करीब 20 उद्यमी ऐसे हैं, जिन्हें युद्ध के कारण बड़ा झटका लगा है। - मनीष जैन, एसेंशियल ऑयल कारोबारी
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बरेली के साथ ही बदायूं, उझानी, रामपुर में एसेंशियल ऑयल का बड़ा कारोबार है। बरेली में बने इत्र की पश्चिम एशिया में काफी मांग है। युद्ध के कारण 40 दिनों में एसेंशियल ऑयल और इत्र का करीब 300 का कारोबार प्रभावित हुआ है। युद्ध से पहले जिन उद्यमियों ने माल भेजा था, उनका करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान फंस गया है। युद्ध थमने के बाद सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात से ऑर्डर भी आए हैं, लेकिन उद्यमी दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।
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उद्यमियों का कहना है कि सऊदी अरब तक माल पहुंचने में 20 दिन लगते हैं। 30 से 60 दिन की क्रेडिट अवधि होती है। यानी करीब तीन माह तक रकम फंसी रहती है। ऐसे में यदि 15 दिन बाद युद्ध फिर शुरू हो जाता है तो माल रास्ते में ही फंस जाएगा। ऐसे में मुनाफे से ज्यादा रकम डूबने का खतरा ज्यादा है।
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इसकी भरपाई के लिए उद्यमियों ने पूर्व व दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के कारोबारियों से संपर्क करना शुरू किया है। कुछ उद्यमी आस्ट्रेलिया के कारोबारियों के भी संपर्क में हैं। जैसमिन, ऊद, रोस, बखूर, मुखल्लत जैसे इत्रों के ऑर्डर भी कुछ देशों से मिले हैं।
उद्यमी बोले- और जोखिम नहीं उठा सकते
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पश्चिम एशिया में आने वाले दिनों में भी शांति बनी रहेगी, यह निश्चित नहीं है। बरेली रीजन के उद्यमियों की 100 करोड़ से ज्यादा की रकम फंसी हुई है। ऐसे में और जोखिम नहीं ले सकते। यही कारण है कि पूर्व व दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के कारोबारियों से संपर्क साध रहे हैं। कुछ देशों से ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। - गौरव मित्तल, इत्र कारोबारी
युद्ध के कारण एसेंशियल ऑयल के कारोबार को काफी नुकसान हुआ है। पश्चिम एशिया के देशों में ईद और इसके बाद सहालग होने के कारण ऑयल की मांग काफी होती थी, लेकिन युद्ध की वजह से माल तैयार होने के बाद भी भेजा नहीं जा सका। ऐसे करीब 20 उद्यमी ऐसे हैं, जिन्हें युद्ध के कारण बड़ा झटका लगा है। - मनीष जैन, एसेंशियल ऑयल कारोबारी