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Bareilly News: टीबी से बेटे की मौत पर नहीं चेते, अब बेटी भी रोग की चपेट में
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बरेली। बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों के प्रति सुरक्षा कवच प्रदान करने वाले नियमित टीकाकरण को दरकिनार करना एक परिवार को भारी पड़ गया। करीब दो साल पहले टीबी की चपेट में आने से भाई की मौत हुई। अब बेटी भी टीबी रोगी है। जांच में सामने आया कि परिवार ने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया था।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बाकरगंज निवासी एक परिवार कुछ दिन पूर्व बेटी की तबीयत खराब होने पर उसे लेकर उपचार कराने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचा। बेटी को खांसी और तेज बुखार था। चिकित्सक ने पूछताछ की तो पता चला कि वो निजी मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिला रहे थे।
बुखार उतर जाता और खांसी भी कम हो जाती। जैसे-जैसे हालत बिगड़ रही थी, दवा की डोज बढ़ा रहे थे। पर जब सांस फूलने लगी तो वे इलाज के लिए पहुंचे। लक्षण के आधार पर जांच की गई तो टीबी की पुष्टि हुई। बेटी को बीसीजी का टीका नहीं लगवाया था।
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शासनादेश के तहत टीबी रोगी की केस हिस्ट्री दर्ज करने पर पता चला कि दो साल पूर्व परिवार दिल्ली में रहता था। वहीं, बेटे में टीबी रोग का पता चला। शुरुआत में जांच नहीं कराई। हालत बिगड़ी अस्पताल पहुंचे पर बेटा नहीं बचा। साल भर पहले परिवार बरेली लौट आया।
अगर टीका लग जाता तो बच सकती थी जान
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक टीबी से बचाव के लिए जन्म के बाद नवजात को बैसिलस कैलमेट गुएरिन (बीसीजी) का टीका लगता है। जो टीबी से बचाव के प्रति प्रतिरोधी क्षमता बनाता है। जिन्हें टीका लगता है वे चपेट में आ जाएं तो भी जोखिम कम रहता है। किन्हीं वजहों से शुरूआत में टीका नहीं लगा तो अधिकतम 12 माह में टीका लगता है। साल भर की आयु के बाद टीका नहीं लगता।
इलाज शुरू पर नहीं लग सकता टीका
चिकित्साधिकारी डॉ. अताउर रहमान के मुताबिक, आठ वर्षीय बच्ची के टीबी के चपेट में मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क इलाज शुरू किया गया है। बीसीजी टीकाकरण अब नहीं हो सकता। मरीज के परिजन को उन परिवारों को जागरूक करने की अपील की है जो टीके के विरोध में हैं। परिवार ने विभाग के सहयोग का भरोसा दिया है।
पांच सौ से ज्यादा परिवार टीकाकरण के विरोधी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के करीब 530 परिवार नियमित टीकाकरण के विरोधी हैं। इन परिवार के बच्चे खतरे में हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीका निशुल्क है। शून्य से पांच वर्ष की आयु तक टीबी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो, खसरा, रूबेला, काली खांसी, गलघोंटू, टिटनेस, डायरिया, इन्फ्लूएंजा, निमोनिया, जापानी इन्सिफेलाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगता है। ब्यूरो
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स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बाकरगंज निवासी एक परिवार कुछ दिन पूर्व बेटी की तबीयत खराब होने पर उसे लेकर उपचार कराने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचा। बेटी को खांसी और तेज बुखार था। चिकित्सक ने पूछताछ की तो पता चला कि वो निजी मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिला रहे थे।
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बुखार उतर जाता और खांसी भी कम हो जाती। जैसे-जैसे हालत बिगड़ रही थी, दवा की डोज बढ़ा रहे थे। पर जब सांस फूलने लगी तो वे इलाज के लिए पहुंचे। लक्षण के आधार पर जांच की गई तो टीबी की पुष्टि हुई। बेटी को बीसीजी का टीका नहीं लगवाया था।
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शासनादेश के तहत टीबी रोगी की केस हिस्ट्री दर्ज करने पर पता चला कि दो साल पूर्व परिवार दिल्ली में रहता था। वहीं, बेटे में टीबी रोग का पता चला। शुरुआत में जांच नहीं कराई। हालत बिगड़ी अस्पताल पहुंचे पर बेटा नहीं बचा। साल भर पहले परिवार बरेली लौट आया।
अगर टीका लग जाता तो बच सकती थी जान
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक टीबी से बचाव के लिए जन्म के बाद नवजात को बैसिलस कैलमेट गुएरिन (बीसीजी) का टीका लगता है। जो टीबी से बचाव के प्रति प्रतिरोधी क्षमता बनाता है। जिन्हें टीका लगता है वे चपेट में आ जाएं तो भी जोखिम कम रहता है। किन्हीं वजहों से शुरूआत में टीका नहीं लगा तो अधिकतम 12 माह में टीका लगता है। साल भर की आयु के बाद टीका नहीं लगता।
इलाज शुरू पर नहीं लग सकता टीका
चिकित्साधिकारी डॉ. अताउर रहमान के मुताबिक, आठ वर्षीय बच्ची के टीबी के चपेट में मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क इलाज शुरू किया गया है। बीसीजी टीकाकरण अब नहीं हो सकता। मरीज के परिजन को उन परिवारों को जागरूक करने की अपील की है जो टीके के विरोध में हैं। परिवार ने विभाग के सहयोग का भरोसा दिया है।
पांच सौ से ज्यादा परिवार टीकाकरण के विरोधी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के करीब 530 परिवार नियमित टीकाकरण के विरोधी हैं। इन परिवार के बच्चे खतरे में हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीका निशुल्क है। शून्य से पांच वर्ष की आयु तक टीबी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो, खसरा, रूबेला, काली खांसी, गलघोंटू, टिटनेस, डायरिया, इन्फ्लूएंजा, निमोनिया, जापानी इन्सिफेलाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगता है। ब्यूरो