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रात साढ़े बजे हुई धनतेरस की शुरुआत, मंदिर सजे
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धनतेरस पर बिकते सोने-चांदी के लक्ष्मी-गणेश।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली। कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष के दीपावली के दो दिन पहले मनाए जाने वाली धनतेरस बृहस्पतिवार रात साढ़े नौ बजे शुरू हुई। इसके साथ ही बाजार में भीड़ बढ़ गई। मंदिरों को भी दुल्हन की तरह सजाया गया। लोगों ने मंदिरों में भी पूजा अर्चना की।
मान्यता है कि धनतेरस के दिन देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था। असुरों को मन दूसरी ओर लगाने के लिए भगवान धनवंतरि अमृत का कलश लेकर उपस्थित हुए थे। इसलिए इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। चूंकि भगवान धनवंतरि सोने का घड़ा या कलश लेकर आए थे। इसलिए धनतेरस के दिन सोना, चांदी, स्टील, एल्युमीनियम आदि चीजें खरीदने की परंपरा है। पंडितों की माने तो धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु से घर में सृमद्धि आती है। धनतेरस पर मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया। धनतेरस का मुहूर्त लगने के बाद लोगों पूजा अर्चना की। इसके बाद लोगों ने घर के मुख्य द्वार, छत और आंगन में दीपक जलाया। हरि मंदिर कमेटी के सचिव रवि छाबड़ा ने बताया कि धनतेरस पर रोशनी के पीछे एक कहानी है। प्राचीन काल में राजा हेम के पुत्र की अकाल मृत्यु के बाद उसकी पत्नी ने कार्तिक महीने की त्रयोदशी पर दक्षिण दिशा में जलाया था। नीलम लुनियाल ने बताया कि धनतेरस पर कोई भी चीज खरीदने से पहले मंदिर जाने की परंपरा है। ऐसे में मंदिरों भी भक्तों की भीड़ रही।
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मान्यता है कि धनतेरस के दिन देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था। असुरों को मन दूसरी ओर लगाने के लिए भगवान धनवंतरि अमृत का कलश लेकर उपस्थित हुए थे। इसलिए इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। चूंकि भगवान धनवंतरि सोने का घड़ा या कलश लेकर आए थे। इसलिए धनतेरस के दिन सोना, चांदी, स्टील, एल्युमीनियम आदि चीजें खरीदने की परंपरा है। पंडितों की माने तो धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु से घर में सृमद्धि आती है। धनतेरस पर मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया गया। धनतेरस का मुहूर्त लगने के बाद लोगों पूजा अर्चना की। इसके बाद लोगों ने घर के मुख्य द्वार, छत और आंगन में दीपक जलाया। हरि मंदिर कमेटी के सचिव रवि छाबड़ा ने बताया कि धनतेरस पर रोशनी के पीछे एक कहानी है। प्राचीन काल में राजा हेम के पुत्र की अकाल मृत्यु के बाद उसकी पत्नी ने कार्तिक महीने की त्रयोदशी पर दक्षिण दिशा में जलाया था। नीलम लुनियाल ने बताया कि धनतेरस पर कोई भी चीज खरीदने से पहले मंदिर जाने की परंपरा है। ऐसे में मंदिरों भी भक्तों की भीड़ रही।
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