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बिगड़ती जीवनशैली सूक्ष्मजीवियों के लिए मददगार : डाॅ. अलका
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बरेली। हजारों वर्षों से इंसान सूक्ष्मजीवियों के साथ रह रहा है, लेकिन इंसानी स्वार्थ से प्रकृति को होने वाला नुकसान वायरस में बदलाव ला रहा है। इंसान की बिगड़ती जीवनशैली उनके लिए मददगार साबित हो रही है। यही वजह है कि तमाम वायरसजनित बीमारियां आपदा बनती जा रही हैं। इससे बचाव के लिए हमें संतुलित जीवनशैली और संबंधित वैक्सीन को अपनाना चाहिए। ये बातें पद्मश्री डाॅ. अलका देशपांडेय ने वूमन फिजिशियंस ऑफ इंडिया की पहली कॉन्फ्रेंस में कहीं।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित कॉन्फ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन चार साइंटिफिक सत्र हुए। शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अलका देशपांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1970 में जब उन्होंने एमडी मेडिसिन में प्रवेश लिया, तब वह अपने बैच में इकलौती महिला थीं। धीरे-धीरे इस ब्रांच में महिलाओं की संख्या बढ़ी। पिछले वर्ष वुमन फिजिसियंस ऑफ इंडिया का गठन हुआ और आज इसकी पहली राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस हो रही है। उन्होंने अमेरिका की पहली महिला डॉ. एलिजाबेथ ब्लैकवेल के संघर्ष का भी जिक्र किया। इस दौरान संस्थान के चेयरमैन देव मूर्ति, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति, डाॅ. एमएस बुटोला, डाॅ.निर्मल यादव, डाॅ. आभा गुप्ता व अन्य लोग मौजूद रहे। संवाद
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एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित कॉन्फ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन चार साइंटिफिक सत्र हुए। शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अलका देशपांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1970 में जब उन्होंने एमडी मेडिसिन में प्रवेश लिया, तब वह अपने बैच में इकलौती महिला थीं। धीरे-धीरे इस ब्रांच में महिलाओं की संख्या बढ़ी। पिछले वर्ष वुमन फिजिसियंस ऑफ इंडिया का गठन हुआ और आज इसकी पहली राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस हो रही है। उन्होंने अमेरिका की पहली महिला डॉ. एलिजाबेथ ब्लैकवेल के संघर्ष का भी जिक्र किया। इस दौरान संस्थान के चेयरमैन देव मूर्ति, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति, डाॅ. एमएस बुटोला, डाॅ.निर्मल यादव, डाॅ. आभा गुप्ता व अन्य लोग मौजूद रहे। संवाद
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