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Bareilly News: सहूलियत और सुरक्षा के बावजूद ई-बसों को नहीं मिल रहीं सवारियां

Thu, 04 Dec 2025 02:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 04 Dec 2025 02:37 AM IST
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Despite convenience and safety, e-buses are not getting passengers
यात्री बोले- पता ही नहीं चलता बस कब आएगी और कब जाएगी, ऑटो पहुंचा देते हैं घर तक
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बरेली। सीसी कैमरे, एसी, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस और प्राथमिक उपचार की सुविधा से लैस होने के बावजूद शहर में चल रहीं 25 ई-बसों को पर्याप्त संख्या में यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में संचालन शुरू होने के बाद से ये बसें घाटे में जा रही हैं। इसका कारण जानने के लिए बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की रिपोर्टर अनुष्का अग्रवाल और शब्या सिंह ने ई-बस से शहर में यात्रा की। सफर के दौरान उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि आखिर ई-बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ क्यों नहीं रही है?
सेटेलाइट से झुमका चौराहा तक केवल दो यात्री


दोपहर करीब 12 बजे सेटेलाइट बस अड्डे पर ई-बस खाली मिली। 17 किलोमीटर के सफर में करीब 17 स्टाॅप पर बस दो-दो सेकंड के लिए रुकती रही। हालांकि स्टॉपेज पर रुकने पर कोई सवारी नहीं चढ़ी। परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की तरफ बस में कुछ खराबी भी आई। ड्राइवर व कंडक्टर ने बताया कि देर तक चलने से बस में फॉल्ट आता है। पांच मिनट तक बस बंद करने के बाद फॉल्ट ठीक होता है। झुमका तिराहा पर पहुंचने पर एक विभागीय कर्मचारी ने बस का मुआयना किया। झुमका तिराहा से वापस आने पर एक महिला व एक पुरुष चढ़े। ड्राइवर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि बस सुबह चार बजे से रात नौ बजे तक चलती है। महिलाओं को लगता कि बस खाली है, जैसे ही बस उनके पास रुकती है वे मुंह घुमा कर खड़ी हो जाती हैं। कंडक्टर देवेंद्र ने बताया कि हमारा कर्तव्य सवारी को सही गंतव्य तक पहुंचाना है। बस में लगे कैमरों की मॉनिटरिंग ऑनलाइन होती है, जीपीएस भी लगा है। परसाखेड़ा की कांति देवी ने कहा कि वह इसी बस से यात्रा करती हैं। अभी इसकी सुविधा के बारे में महिलाओं को ज्यादा जानकारी नहीं है। पांच रुपये बचाने के लिए महिलाएं ऑटो के इंतजार में समय गंवा देती हैं। सीबीगंज के जीएल वर्मा ने कहा कि यह बस ऑटो से अधिक आरामदायक है। अभी लोगों को बस के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। पहले लगता था, घूमकर जाती होगी, लेकिन आने-जाने लगा तो बस अच्छी लगने लगी।
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मिनी बाइपास से सेटेलाइट तक छह सवारियां ही हुईं सवार

दोपहर करीब 12:35 बजे मिनी बाइपास से सेटेलाइट के सफर में छह यात्री ई-बस में सवार हुए। रिठौरा की अंजली ने कहा कि ई-बसें अक्सर खाली आती हैं। ई-रिक्शा या ऑटो जल्दी पहुंचा देते हैं, बस में समय ज्यादा लगता है। अक्सर पता नहीं चलता कि ई-बस कब और कहां से उपलब्ध होगी। महिलाएं तो खाली बस देखकर उतर जाती हैं। सुषमा ने कहा कि हमें पता ही नहीं चलता बस कब आएगी। किराया भी ज्यादा लगता है। खाली बस देखकर मैं इसकी जगह ऑटो या ई-रिक्शा से आना-जाना पसंद करती हूं। संवाद
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ऑटो और ई-रिक्शा के मुकाबले ई-बस ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक हैं। किराया भी लगभग समान है। शहर में 60 स्टॉपेज पर हर 10-15 मिनट में बस उपलब्ध है। लोगों को ई-बसों में यात्रा के लिए जागरूक भीकिया जा रहा है। - मनीषा दीक्षित, प्रबंध संचालक सिटी बस सर्विसेज
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