फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Desi Ghee is being consumed in the market by name

बिना नाम से बाजार में खपाया जा रहा देसी घी

Sat, 15 Aug 2020 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2020 02:33 AM IST
विज्ञापन
Desi Ghee is being consumed in the market by name
पकड़े गए देशी देघी के पीपे। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

अफसर खुद चक्कर में.. 228 रुपये में एक किलो देसी घी कैसे

विज्ञापन
बरेली। यह जानकर कोई भी हैरान हो सकता है कि जिस शहर में पांच सौ रुपये के रेट में भी शुद्ध देसी घी के लाले हैं, वहां राजस्थान से सिर्फ 228 रुपये किलो के रेट में ‘देसी घी’ की सप्लाई हो रही थी। बिना लेबल और ब्रांड के टिन में आए इस घी की जांच होनी बाकी है लेकिन रेट ने ही सारा खेल साफ कर दिया है। लोकल ब्रांड का देसी घी बाजार में खपाने वाले तमाम कारोबारियों का धंधा राजस्थान से इसी घी की आपूर्ति पर चल रहा है। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि देसी घी के देसी ब्रांड इस्तेमाल करने वाले शहर के हजारों लोग देसी घी नहीं बल्कि धोखा खा रहे हैं।
वाणिज्य कर विभाग की छानबीन में शुक्रवार को पता चला कि राजस्थान के धौलपुर से आया ‘देसी घी’ बरेली की फर्म ने सिर्फ 228 रुपये किलो के रेट में मंगाया था। विभागीय अफसर बिलों से इसकी पुष्टि होने के बाद हैरान रह गए। यह भी साफ हो गया कि करोड़ों का धंधा करने वाले ‘देसी घी’ के तमाम कारोबारी न सिर्फ बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी कर रहे हैं बल्कि लोगों की सेहत से भी खेल रहे हैं। बता दें कि शुद्धता के नाम पर शहर में उच्चवर्गीय लोग दो हजार रुपये किलो तक के रेट में देसी घी खरीदते हैं। हालांकि देसी घी की शुद्धता का उसके ब्रांड से कोई लेना-देना नहीं होता है। धौलपुर से संदिग्ध देसी घी की बड़े पैमाने पर बरेली में आपूर्ति की अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद सैकड़ों ऐसे उपभोक्ता भी सकते में आ गए जो आमतौर पर देसी घी के देसी ब्रांड पर भरोसा करते हैं। कई लोगों ने अमर उजाला कार्यालय में फोन करके तक इस बारे में जानकारी ली।
विज्ञापन

बिना नाम के साथ दाम में भी खेल अब वाणिज्य कर ने की घेराबंदी

बरेली। बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी के लिए देसी घी समेत कई और खाद्य सामग्रियों कारोबार किस कदर कम कीमत दिखाकर हो रहा है, धौलपुर का ‘देसी घी’ पकड़े जाने के बाद यह भी खुलासा हो गया है। वाणिज्य कर विभाग ने कार्रवाई पर शुुरू करते हुए कागजात की पड़ताल शुरू कर दी है। उधर, एफएसडीए ने भी धौलपुर और बरेली के कारोबारियों को मिसब्रांड उत्पाद बेचने पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। टैक्स चोरी के मामले में भी घेराबंदी शुरू कर दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल शुरुआती छानबीन में ही यह साफ हुआ है कि संदिग्ध देसी घी 228 रुपये किलो के रेट में खरीदकर 450 से 500 रुपये के रेट में बेचा जा रहा था और इसके मुनाफे में भी हेराफेरी हो रही थी। हर दिन इस खेल से लाखों रुपये की टैक्स चोरी का अनुमान लगाया जा रहा है। मामला जानकारी में आने के बाद वाणिज्य कर के अधिकारियों धौलपुर से आए घी की बिलिंग की स्थिति की छानबीन की तो पता चला कि धौलपुर की ओमशंकर फूड इंडस्ट्री नाम की फर्म ने 228 रुपये किलो के रेट पर बरेली की फर्म को ‘देसी घी’ बेचा था। बिल में जीएसटी अलग से दिखाई गई है। वाणिज्य कर विभाग को छानबीन में पता चला कि बाजार में अलग-अलग ब्रांड का देसी घी 450 से 500 रुपये किलो के रेट में बेचा जा रहा है। अफसरों ने बताया कि बरेली के आलमगीरीगंज की फर्म रामगोपाल मुन्नालाल धौलपुर से सस्ता घी मंगाकर अपने ब्रांड के नाम से शहर के बाजार में उतारती है।
शुरुआती छानबीन में यह भी पता चला कि यही घी दोगुनी कीमत में बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है लेकिन टैक्स में हेराफेरी के लिए इसे रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता है। वाणिज्य कर अधिकारियों ने यह मामला सामने आने के बाद देसी घी के दूसरे कारोबारियों के कारोबार पर भी निगाहें जमा दी हैं। माना जा रहा है कि हर महीने करोड़ों का कारोबार करने वाली ज्यादातर फर्म कम रेट के बिल के हिसाब से ही मुनाफा और सेल दिखाती हैं।

एफएसडीए ने बरेली और धौलपुर की फर्म को जारी किए नोटिस

एफएसडीए ने ‘देसी घी’ प्रकरण में धौलपुर की ओमशंकर फूड इंडस्ट्री और बरेली के आलमगीरीगंज की फर्म रामगोपाल मुन्नालाल को नोटिस जारी किए हैं। दोनों फर्मों पर मिसब्रांड उत्पाद का कारोबार करने का आरोप है। एफएसडीए नियमों के तहत ऐसी गड़बड़ी पाए जाने पर फर्म से तीन लाख रुपये का जुर्माना वसूला जाता है। लैब की जांच में नमूना फेल होने पर अलग कानूनी कार्रवाई होती है। जिला अभिहित अधिकारी डीआर मिश्रा ने बताया कि मिसब्रांड उत्पाद बाजार में उतारना गैरकानूनी है। इसलिए दोनों फर्मों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। पकड़े गए घी के टिनों पर कोई लेबल नहीं पाया गया इसलिए कार्रवाई होना तय है। घी के नमूनों की लैब से रिपोर्ट आने पर आगे की विधिक कार्रवाई होगी।

धौलपुर से आए घी का बिल चेक कराया गया है जिसमें उसका रेट 228 रुपये किलो दिखाया गया है। विक्रेता और क्रेता फर्म विभाग में पंजीकृत हैं। बाजार में देसी घी का रेट 450 से 500 रुपये किलो होने की जानकारी मिली है। मुनाफे में बड़ा अंतर साफ है। इसलिए यह भी जांच कराई जा रही है कि अब तक बरेली की फर्म ने क्या मुनाफा दिखाकर टैक्स दिया है। दूसरे सेक्टरों में भी इस तरह के गोलमाल की आशंका है। अगर इसके प्रमाण मिले तो विभाग कार्रवाई करेगा। - गौरी शंकर, उपायुक्त प्रशासन वाणिज्य कर

सवा दो सौ रुपये के रेट में देसी घी मिलना असंभव है। जाहिर है कि देसी घी में बड़े पैमाने पर मिलावट है या फिर वह पूरी तरह नकली है। पामोलिन में एसेंस मिलाकर नकली देसी घी तैयार करने के पहले भी कई मामले सामने आए हैं। यह घी भी इसी तरह तैयार किया गया हो सकता है। सही स्थिति का पता घी की जांच के बाद ही लगेगा। - प्राची श्रीवास्तव, लैब वैज्ञानिक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed