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देवबंद-बरेलवी मुद्दे पर जारी हुआ पोस्टर
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 17 May 2016 02:01 AM IST
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उस पोस्टर
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नबीरे आला हजरत मौलाना तसलीम रजा खां ने सोमवार को दरगाह आला हजरत स्थित कादरी हाउस पर देवबंद-बरेलवी मुद्दे पर एक पोस्टर जारी करते हुए कहा कि अक्सर यह बात कही जा रही है कि मौजूदा हालात को देखते हुए तमाम मुसलमानों को मसलकी विवाद एक तरफ रखते हुए एक हो जाना चाहिए। एक दूसरे के कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए मगर हक और बातिल (सच और झूठ) की पहचान भी जरूरी है।
इसमें उन्होंने पोस्टर के हवाले से देवबंदियों की किताबों पर सवाल उठाए हैं। इसमें किताबों के पेज नंबर सहित सात बिंदुओं का जिक्र किया गया है, जिसे उन्होंने कुफ्र इबारत बताते हुए कहा यह खुदा और रसूल की शान में गुस्ताखी है। इस पर लोग खुद सोचें और गौर करें कि हक क्या है बातिल क्या है। ऐसे में किसी भी तरह का इत्तेहाद कैसे मुमकिन है। इसी के साथ उन्होंने आला हजरत के फतवे और मुफ्ती आजम हिंद की तहरीर का जिक्र भी किया है।
तौकीर प्रकरण पर मुुफ्तियों का फैसला लटका
नहीं खुले बंद लिफाफे
आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां के देवबंद जाने के मुद्दे पर शरई फैसला फिलहाल लटक गया है। फैसले को लेकर दिन भर गहमा गहमी का माहौल रहा। शहर के लोग दरगाह से जुड़े लोगों से फैसले की जानकारी लेने के लिए उत्सुक रहे। अखबार के दफ्तरों में भी लोग फोन पर फैसले के बारे में पूछते रहे। दरगाह के सूत्रों से पता चला कि इस बारे में मुफ्तियों के फैसले के बंद लिफाफे अभी नहीं खोले गए हैं।
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दरगाह आला हजरत स्थित दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) के निवास पर मौलाना तौकीर के मुद्दे पर दो दिन पहले शरई मजलिस आयोजित की गई थी। इसके लिए दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां और सज्जादा नशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी की ओर से आठ मुफ्तियों का पैनल बनाया गया था। इसने मौलाना तौकीर से देवबंद जाने के मामले में पूछ ताछ की थी। मुफ्तियों के पैनल का फैसला सुरक्षित रखते हुए दो दिन बाद शरई हुक्म सुनाने की बात कही गई थी। तय हुआ था कि पैनल के सभी मुफ्ती शरई हुक्म लिखकर बंद लिफाफे में सुब्हानी मियां को दे देंगे। पता चला है कि पैनल के कुछ सदस्यों ने अपनी राय बंद लिफाफे में सुब्हानी मियां तक पहुंच दी और कुछ की राय अभी बाकी है।
शरई फैसला आने में अभी दो तीन और लग सकते हैं क्योंकि मुफ्तियों के पैनल के तीन सदस्य बाहर चले गए हैं। इसमें मुफ्ती सगीर अहमद जोखनपुरी, मौलाना मुख्तार अहमद कादरी और मुफ्ती शमशाद हुसैन हैं। इनके वापस आने और राय मिलने के बाद ही फैसले की बात सामने आएगी। - मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी, प्रवक्ता दरगाह आला हजरत बरेली।
देवबंद वाले आलिमों का पैनल बनाएं
दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता डा. सलीम नूरी ने कहा है कि वह देवबंद आलिमों की इस दलील से सहमत नहीं हैं कि उनकी किताबों से आपत्तिजनक बातों को हटा दिया है। उन्होंने दावा किया है कि अगर देवबंद उलमा अपने दावे को साबित कर दें तो वह 11 हजार रुपये इनाम देंगे। साथ ही यह भी कहा है कि अब बातों से मसला हल होने वाला है आमने सामने बैठ के बात हो। उनकी ओर से इस मुद्दे पर बहस के लिए आलिमों का पैनल बना दिया गया है। अब देवबंद मरकज को भी चाहिए कि वह विवाद को खत्म करना चाहते हैं तो अपने आलिमों का पैनल घोषित करें।
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इसमें उन्होंने पोस्टर के हवाले से देवबंदियों की किताबों पर सवाल उठाए हैं। इसमें किताबों के पेज नंबर सहित सात बिंदुओं का जिक्र किया गया है, जिसे उन्होंने कुफ्र इबारत बताते हुए कहा यह खुदा और रसूल की शान में गुस्ताखी है। इस पर लोग खुद सोचें और गौर करें कि हक क्या है बातिल क्या है। ऐसे में किसी भी तरह का इत्तेहाद कैसे मुमकिन है। इसी के साथ उन्होंने आला हजरत के फतवे और मुफ्ती आजम हिंद की तहरीर का जिक्र भी किया है।
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तौकीर प्रकरण पर मुुफ्तियों का फैसला लटका
नहीं खुले बंद लिफाफे
आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां के देवबंद जाने के मुद्दे पर शरई फैसला फिलहाल लटक गया है। फैसले को लेकर दिन भर गहमा गहमी का माहौल रहा। शहर के लोग दरगाह से जुड़े लोगों से फैसले की जानकारी लेने के लिए उत्सुक रहे। अखबार के दफ्तरों में भी लोग फोन पर फैसले के बारे में पूछते रहे। दरगाह के सूत्रों से पता चला कि इस बारे में मुफ्तियों के फैसले के बंद लिफाफे अभी नहीं खोले गए हैं।
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दरगाह आला हजरत स्थित दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) के निवास पर मौलाना तौकीर के मुद्दे पर दो दिन पहले शरई मजलिस आयोजित की गई थी। इसके लिए दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां और सज्जादा नशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी की ओर से आठ मुफ्तियों का पैनल बनाया गया था। इसने मौलाना तौकीर से देवबंद जाने के मामले में पूछ ताछ की थी। मुफ्तियों के पैनल का फैसला सुरक्षित रखते हुए दो दिन बाद शरई हुक्म सुनाने की बात कही गई थी। तय हुआ था कि पैनल के सभी मुफ्ती शरई हुक्म लिखकर बंद लिफाफे में सुब्हानी मियां को दे देंगे। पता चला है कि पैनल के कुछ सदस्यों ने अपनी राय बंद लिफाफे में सुब्हानी मियां तक पहुंच दी और कुछ की राय अभी बाकी है।
शरई फैसला आने में अभी दो तीन और लग सकते हैं क्योंकि मुफ्तियों के पैनल के तीन सदस्य बाहर चले गए हैं। इसमें मुफ्ती सगीर अहमद जोखनपुरी, मौलाना मुख्तार अहमद कादरी और मुफ्ती शमशाद हुसैन हैं। इनके वापस आने और राय मिलने के बाद ही फैसले की बात सामने आएगी। - मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी, प्रवक्ता दरगाह आला हजरत बरेली।
देवबंद वाले आलिमों का पैनल बनाएं
दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता डा. सलीम नूरी ने कहा है कि वह देवबंद आलिमों की इस दलील से सहमत नहीं हैं कि उनकी किताबों से आपत्तिजनक बातों को हटा दिया है। उन्होंने दावा किया है कि अगर देवबंद उलमा अपने दावे को साबित कर दें तो वह 11 हजार रुपये इनाम देंगे। साथ ही यह भी कहा है कि अब बातों से मसला हल होने वाला है आमने सामने बैठ के बात हो। उनकी ओर से इस मुद्दे पर बहस के लिए आलिमों का पैनल बना दिया गया है। अब देवबंद मरकज को भी चाहिए कि वह विवाद को खत्म करना चाहते हैं तो अपने आलिमों का पैनल घोषित करें।