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डेथ सर्टिफिकेट मिला तो पता चला, बेटा नहीं रहा
बरेली
Updated Tue, 23 Feb 2016 02:15 AM IST
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बरेली। वह तो दो साल पहले बहनों की शादी के लिए कमाने गया था। सोचा था कि कुछ पैसे जमा कर लूंगा तो अच्छी शादी हो जाएगी...घरवालों को अब उसके लौटने का इंतजार था लेकिन अचानक रियाद से उसका डेथ सर्टिफिकेट पहुंच गया। 22 वर्षीय इकलौते बेटे शकील की मौत का सर्टिफिकेट लेकर मां और पिता रो रहे हैं। उन्हें शव मिलना तो दूर यह भी नहीं पता कि आखिर उनके बेटे की मौत हो कैसे हुई।
थाना प्रेमनगर के ब्रहम्पुरा के रहने वाले मोहम्मद शमीम खान की 24 वर्षीय यासमीन और 18 वर्षीय गुलफिशां दो बेटियां हैं जबकि शकील खान इकलौता बेटा था। दो साल पहले शमीम के पड़ोस में ही रहने वाले इकराम अहमद ने शकील को मुंबई के एक एजेंट के जरिए सऊदी अरब की राजधानी रियाद भिजवा दिया। भारतीय मुद्रा के मुताबिक शकील को वहां करीब 18000 रुपये वेतन मिलना तय हुआ था। शकील की मां शबनम तब भी नहीं चाहती थीं कि उनका जिगर का टुकड़ा विदेश जाकर उनसे दूर हो जाए, लेकिन किस्मत के आगे किसी की नहीं चली। रियाद में कदम पड़ते ही शकील को धोेखाधड़ी का एहसास हो गया। वीजा देते हुए तय हुआ था कि उसे सब्जी की दुकान पर रहना होगा। शबनम के मुताबिक उसका बेटा खालिद अब्दुल रहमान नाम के शेख के यहां काम करता था। शेख ने उसके बेटे को खेतीबाड़ी के काम में लगा दिया। तपती धूप में उससे इतनी मेहनत कराई गई कि हालत बिगड़ गई। फोन पर उसका बेटा दोस्तों को हकीकत बताता था, उसे सच्चाई इसलिए नहीं बताई कि दुख होगा। शबनम ने बताया कि उसे बेटे के घर वापस लौटने का इंतजार था। इसी बीच उसके बेटे का डेथ सर्टिफिकेट आ गया, लेकिन उसे यकीन नहीं हुआ। उसके साथ पाकिस्तान का मुकीम नाम का लड़का रहता था। उसका फोन आने पर उसे यकीन हो पाया। तब तीजा, दसवां और चालिसवां किया लेकिन उसकी मौत कैसे हुई यह छह अबतक नहीं जान पाए।
कर्ज लेकर भेजा था विदेश
-शबनम के मुताबिक उन्होंने 85 हजार रुपये का कर्ज लेकर बेटे को विदेश भेजा था। परिवार के लोगों से ही उन्होंने कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि बेटा कमाकर लाएगा तो लड़कियों की शादी हो जाएगी, लेकिन मेरा तो जवान बेटा ही चला गया। मुझे पता तो चले कि उसकी मौत कैसे हो गई।
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थाना प्रेमनगर के ब्रहम्पुरा के रहने वाले मोहम्मद शमीम खान की 24 वर्षीय यासमीन और 18 वर्षीय गुलफिशां दो बेटियां हैं जबकि शकील खान इकलौता बेटा था। दो साल पहले शमीम के पड़ोस में ही रहने वाले इकराम अहमद ने शकील को मुंबई के एक एजेंट के जरिए सऊदी अरब की राजधानी रियाद भिजवा दिया। भारतीय मुद्रा के मुताबिक शकील को वहां करीब 18000 रुपये वेतन मिलना तय हुआ था। शकील की मां शबनम तब भी नहीं चाहती थीं कि उनका जिगर का टुकड़ा विदेश जाकर उनसे दूर हो जाए, लेकिन किस्मत के आगे किसी की नहीं चली। रियाद में कदम पड़ते ही शकील को धोेखाधड़ी का एहसास हो गया। वीजा देते हुए तय हुआ था कि उसे सब्जी की दुकान पर रहना होगा। शबनम के मुताबिक उसका बेटा खालिद अब्दुल रहमान नाम के शेख के यहां काम करता था। शेख ने उसके बेटे को खेतीबाड़ी के काम में लगा दिया। तपती धूप में उससे इतनी मेहनत कराई गई कि हालत बिगड़ गई। फोन पर उसका बेटा दोस्तों को हकीकत बताता था, उसे सच्चाई इसलिए नहीं बताई कि दुख होगा। शबनम ने बताया कि उसे बेटे के घर वापस लौटने का इंतजार था। इसी बीच उसके बेटे का डेथ सर्टिफिकेट आ गया, लेकिन उसे यकीन नहीं हुआ। उसके साथ पाकिस्तान का मुकीम नाम का लड़का रहता था। उसका फोन आने पर उसे यकीन हो पाया। तब तीजा, दसवां और चालिसवां किया लेकिन उसकी मौत कैसे हुई यह छह अबतक नहीं जान पाए।
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कर्ज लेकर भेजा था विदेश
-शबनम के मुताबिक उन्होंने 85 हजार रुपये का कर्ज लेकर बेटे को विदेश भेजा था। परिवार के लोगों से ही उन्होंने कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि बेटा कमाकर लाएगा तो लड़कियों की शादी हो जाएगी, लेकिन मेरा तो जवान बेटा ही चला गया। मुझे पता तो चले कि उसकी मौत कैसे हो गई।
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