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Bareilly News: पढ़ाई के साथ खेलों में धूम मचा रहीं बेटियां
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बरेली। पढ़ाई के साथ क्रिकेट, नेटबाल, वुशू, कुश्ती समेत अन्य खेलों में भाग लेकर बेटियां उम्दा प्रदर्शन करते हुए अपना कॅरिअर तलाश रही हैं। बेटियों का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना है। स्पोर्ट्स स्टेडियम के पंजीकरण आंकड़े इस बात की सच्चाई बयां कर रहे हैं। लंबे समय तक पुरुष खिलाड़ियों के दबदबे वाला खेल मैदान अब धीरे-धीरे लड़कियों की मजबूत उपस्थिति का गवाह बन रहा है। हालांकि अधिकतर खेलों में अब भी बेटों की संख्या अधिक है।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंचल मिश्रा ने बताया कि एथलेटिक्स में नौ बालिकाएं पंजीकृत हैं, जबकि बालकों की संख्या 30 है। बैडमिंटन में आठ बालिकाओं के मुकाबले 23 बालक पंजीकृत हैं। बास्केटबॉल में बालिकाओं की संख्या 19 तक पहुंच चुकी है, जबकि इसमें 22 बालक खिलाड़ी पंजीकृत हैं, जो दर्शाता है कि इस खेल में बेटियों लगभग बराबरी की स्थिति में पहुंच गई हैं।
वहीं अन्य खेलों की बात करें तो क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में छह बालिकाएं पंजीकृत हैं, जबकि बालकों की संख्या 80 है। फुटबॉल में चार बालिकाओं के मुकाबले 41 बालक पंजीकृत हैं। वॉलीबॉल में पांच बालिकाएं और 35 बालक पंजीकरण सूची में शामिल हैं। वेटलिफ्टिंग में जहां दो बालिकाएं पंजीकृत हैं, वहीं 30 बालक इस खेल में अभ्यास कर रहे हैं।
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सोच में आया है बदलाव
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों में बेटियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि समाज और अभिभावकों की सोच में बदलाव आ रहा है। पहले जहां बेटियों के लिए खेल सीमित माने जाते थे, अब अभिभावक उन्हें खेल के मैदान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कई परिवार खेल को केवल शौक तक सीमित न रखकर भविष्य के करियर विकल्प के रूप में भी देखने लगे हैं। संवाद
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क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंचल मिश्रा ने बताया कि एथलेटिक्स में नौ बालिकाएं पंजीकृत हैं, जबकि बालकों की संख्या 30 है। बैडमिंटन में आठ बालिकाओं के मुकाबले 23 बालक पंजीकृत हैं। बास्केटबॉल में बालिकाओं की संख्या 19 तक पहुंच चुकी है, जबकि इसमें 22 बालक खिलाड़ी पंजीकृत हैं, जो दर्शाता है कि इस खेल में बेटियों लगभग बराबरी की स्थिति में पहुंच गई हैं।
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वहीं अन्य खेलों की बात करें तो क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में छह बालिकाएं पंजीकृत हैं, जबकि बालकों की संख्या 80 है। फुटबॉल में चार बालिकाओं के मुकाबले 41 बालक पंजीकृत हैं। वॉलीबॉल में पांच बालिकाएं और 35 बालक पंजीकरण सूची में शामिल हैं। वेटलिफ्टिंग में जहां दो बालिकाएं पंजीकृत हैं, वहीं 30 बालक इस खेल में अभ्यास कर रहे हैं।
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सोच में आया है बदलाव
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों में बेटियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि समाज और अभिभावकों की सोच में बदलाव आ रहा है। पहले जहां बेटियों के लिए खेल सीमित माने जाते थे, अब अभिभावक उन्हें खेल के मैदान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कई परिवार खेल को केवल शौक तक सीमित न रखकर भविष्य के करियर विकल्प के रूप में भी देखने लगे हैं। संवाद