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Bareilly News: संघर्षों की आग में तपकर एथलेटिक्स में निखर रहीं बेटियां

Wed, 06 Aug 2025 02:50 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 06 Aug 2025 02:50 AM IST
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Daughters are excelling in athletics after facing the fire of struggle
बरेली। जब हालात साथ नहीं देते तो हौसला काम आता है। यह कहावत शहर की होनहार बेटियों पर सटीक बैठती है। जिन घरों में सुबह की शुरुआत खेतों या घर के कामकाज से होती है, वहां की बेटियों ने न सिर्फ एथलेटिक्स ट्रैक पर दौड़ लगाई, बल्कि संघर्षों को पछाड़ते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी धाक जमाई है। किसी के पिता बस ड्राइवर हैं, किसी के कपड़ों पर प्रेस करने वाले है, लेकिन इन बेटियों ने कभी हालात के आगे हार नहीं मानी। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद इन्होंने जिला, मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपना नाम रोशन किया है। संवाद
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400 मीटर दौड़ व हर्डल की धाविका हैं अंजली
कुदेशिया फाटक के पास रहने वाली अंजलि के पिता बस चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हैं। बचपन से ही दौड़ में रुचि रखने वाली अंजलि 400 मीटर हर्डल और 400 मीटर रेस की खिलाड़ी हैं। अंजलि बताती हैं कि कई बार आर्थिक कठिनाइयों की वजह से उन्हें अभ्यास छोड़ना पड़ा, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। सीमित साधनों के बीच भी वह अपने खेल में निखार लाने का प्रयास करती रहीं। उनका सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करें। वह वर्ष 2023 में गोरखपुर में हुई प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकीं हैं। इसके साथ ही इंटर यूनिवर्सिटी खेलों में भी प्रतिभाग कर किया है।
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माता-पिता से नहीं मिला सहयोग, दादा-दादी ने दिया संबल
संजय नगर निवासी अनुष्का बताती हैं कि माता-पिता ने कभी खेल में दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन उनके दादा-दादी ने हमेशा प्रोत्साहित किया। अनुष्का के मुताबिक, तीसरी कक्षा में स्कूल की दौड़ प्रतियोगिता में जीतने के बाद, उनका खेल के प्रति रुझान बढ़ा। वर्ष 2018 से उन्होंने पेशेवर प्रशिक्षण लेना शुरू किया। तमाम कठिनाइयों के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मध्यप्रदेश में हुई विद्या भारती राष्ट्रीय प्रतियोगिता-2024 में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते। वर्ष 2025 में झारखंड में आयोजित स्कूल नेशनल गेम्स में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। उनका कहना है कि उनके दादा-दादी ही उनके सबसे बड़े समर्थक हैं।
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पिता हैं बीमार, फिर भी बनीं राष्ट्रीय खिलाड़ी
किले के पास रहने वाली इरम के पिता कपड़ों पर प्रेस करने का काम करते थे लेकिन अब बीमार रहने के कारण काम पर नहीं जा पाते। इरम को अपनी पढ़ाई पूरी करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी भी परिस्थिति के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने बताया कि बचपन में दोस्तों के साथ दौड़ते हुए ही खेल के प्रति रुझान आया। तब से उन्होंने ठान लिया कि दौड़ में ही कुछ कर दिखाना है। इरम कर्नाटक में हुई ऑल इंडिया क्रॉस कंट्री प्रतियोगिता में भाग ले चुकीं हैं। साथ ही भुवनेश्वर में 2023 में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में 800 मीटर और 1500 मीटर रेस में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकीं हैं।
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