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दरगाह आला हजरत से उठी आपसी भाईचारे की आवाज
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बरेली। दरगाह आला हजरत स्थित मदरसा मंजर-ए-इस्लाम के छात्रावास में बुधवार को छात्रों को राष्ट्रवाद की शिक्षा देने के लिए विषेश कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान उर्फ सुब्हानी मियां की सरपरस्ती और सज्जदानशीन मुफ्ती अहसन रजा खान उर्फ अहसन मियां की अध्यक्षता में मौजूदा हालात को लेकर भी चर्चा की गई।
मदरसे के वरिष्ठ शिक्षक मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी ने कहा कि विश्व भर में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां की मिट्टी में विविध संस्कृतियों, धर्मों और विचारधाराओं की खुशबू रची बसी है। भारत इतना उपकारी है कि उसने हर जमाने में अपने मूल निवासियों के अलावा दूसरे देशों से आने वालों को भी पनाह दी है। जातीय और धार्मिक भिन्नताओं के बावजूद राष्ट्रवाद के बिंदु पर यहां के सभी नागरिक हमेशा एकजुट रहे हैं।
इतिहास गवाह है कि जब भी किसी ने यहां नफरत और भेदभाव का माहौल बनाने का प्रयास किया तो देश की भाईचारे वाली माटी ने उसे अस्वीकार कर दिया। इस देश में हिंदू, मुस्लिमस, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध, जैन आदि ने हमेशा एक दूसरे का सहयोग किया है। एक दूसरे के धार्मिक स्थलों का निर्र्माण कराया है। उनकी सुरक्षा भी की है। इस दौरान मुफ्ती अफरोज आलम, मुफ्ती अयूब खां, मुफ्ती मोइनउद्दीन, मौलाना डॉ. एजाज अंजुम ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान नासिर कुरैशी, शाहिद खान नूरी, परवेज नूरी, हाजी जावेद खान, अजमल नूरी आदि मौजूद रहे।
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मदरसे के वरिष्ठ शिक्षक मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी ने कहा कि विश्व भर में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां की मिट्टी में विविध संस्कृतियों, धर्मों और विचारधाराओं की खुशबू रची बसी है। भारत इतना उपकारी है कि उसने हर जमाने में अपने मूल निवासियों के अलावा दूसरे देशों से आने वालों को भी पनाह दी है। जातीय और धार्मिक भिन्नताओं के बावजूद राष्ट्रवाद के बिंदु पर यहां के सभी नागरिक हमेशा एकजुट रहे हैं।
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इतिहास गवाह है कि जब भी किसी ने यहां नफरत और भेदभाव का माहौल बनाने का प्रयास किया तो देश की भाईचारे वाली माटी ने उसे अस्वीकार कर दिया। इस देश में हिंदू, मुस्लिमस, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध, जैन आदि ने हमेशा एक दूसरे का सहयोग किया है। एक दूसरे के धार्मिक स्थलों का निर्र्माण कराया है। उनकी सुरक्षा भी की है। इस दौरान मुफ्ती अफरोज आलम, मुफ्ती अयूब खां, मुफ्ती मोइनउद्दीन, मौलाना डॉ. एजाज अंजुम ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान नासिर कुरैशी, शाहिद खान नूरी, परवेज नूरी, हाजी जावेद खान, अजमल नूरी आदि मौजूद रहे।
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