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मुस्लिमों की नुमाइंदगी नहीं उन्हें डराने का काम कर रहा है पर्सनल लॉ बोर्ड
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बरेली। दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन तंजीम उलमा इस्लाम ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर निशाना साधा है। बोर्ड के खिलाफ जारी बयान में कहा है कि वह अपने मकसद से भटक गया है। बोर्ड मुस्लिमों की नुमाइंदगी करने के बजाय उन्हें डराने का काम कर रहा है।
संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बोर्ड के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बोर्ड मुसलमानों को डराने की कोशिश कर रहा है। बोर्ड के पदाधिकारियों को यह ज्ञान होना चाहिए कि भारत लोकतांत्रिक देश है। यहां हर व्यक्ति को धार्मिक आजादी हासिल है। सरकार संविधान के दायरे में रहकर काम करती हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड का गठन मुस्लिमों के शरई मसलों के हल के लिए किया गया था, मगर बोर्ड अब सिर्फ राजनीति कर रहा है। बोर्ड शरीयत के मामले में कानूनी मदद पर बिल्कुल खामोश रहता है। जब चुनावी माहौल आता है तो बोर्ड मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने मेें लग जाता है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड ने हाल में बयान दिया कि देश के मुसलमान अपने धार्मिक रीति रिवाजों के मामले में वर्ष 1857 और 1947 से भी ज्यादा मुश्किल हालात में गुजर रहे हैं। बोर्ड ने महिलाओं से गुजारिश की है कि बोर्ड के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार के प्रभाव में न आएं। मौलाना ने कहा कि बोर्ड ने मुुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए भी कभी कोई आवाज बुलंद नहीं की है।
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संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बोर्ड के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बोर्ड मुसलमानों को डराने की कोशिश कर रहा है। बोर्ड के पदाधिकारियों को यह ज्ञान होना चाहिए कि भारत लोकतांत्रिक देश है। यहां हर व्यक्ति को धार्मिक आजादी हासिल है। सरकार संविधान के दायरे में रहकर काम करती हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड का गठन मुस्लिमों के शरई मसलों के हल के लिए किया गया था, मगर बोर्ड अब सिर्फ राजनीति कर रहा है। बोर्ड शरीयत के मामले में कानूनी मदद पर बिल्कुल खामोश रहता है। जब चुनावी माहौल आता है तो बोर्ड मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने मेें लग जाता है।
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उन्होंने कहा कि बोर्ड ने हाल में बयान दिया कि देश के मुसलमान अपने धार्मिक रीति रिवाजों के मामले में वर्ष 1857 और 1947 से भी ज्यादा मुश्किल हालात में गुजर रहे हैं। बोर्ड ने महिलाओं से गुजारिश की है कि बोर्ड के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार के प्रभाव में न आएं। मौलाना ने कहा कि बोर्ड ने मुुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए भी कभी कोई आवाज बुलंद नहीं की है।
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