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छह पूल पॉजिटिव आने के बाद महसूस हुआ खतरा
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कोरोना वायरस
- फोटो : self
कोई नहीं जानता.. जो सीधे गांव पहुंच गए उनमें कितने संक्रमित
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छह पूल में शामिल प्रवासी शहर के अलावा नवाबगंज, फरीदपुर और मीरगंज के
मंगलवार को क्वारंटीन किए गए लोगों समेत 18 संदिग्धों में कोरोना के लक्षण भी
बरेली। एक दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने अमर उजाला के जरिये जिस तरह की आशंका जताई थी, ठीक वैसा ही हुआ। इत्तफाक से जिन छह पूल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उनमें शामिल मुंबई और जयपुर से लौटे 24 लोगों को गांव पहुंचने से पहले ही रोककर प्रशासन ने क्वारंटीन कर दिया था लेकिन अब यह सवाल स्वास्थ्य विभाग को परेशान कर रहा है कि जो सैकड़ों लोग बगैर जांच कराए सीधे अपने घर पहुंच गए हैं, उनमें संक्रमितों की तलाश कैसे की जाए।
गंभीर पहलू यह है कि कोरोना से बुरी तरह प्रभावित राज्यों और शहरों से आ रहे ज्यादातर उन्हीं लोगों की जांच हो पा रही है जो सरकार की ओर से चलाई गई ट्रेनों और बसों से पहुंच रहे हैं। निजी साधनों और पैदल ही लंबा सफर तय कर पहुंचने वाले लोग जांच की सतर्कता बरतने के बजाय सीधे घर पहुंच रहे हैं। मंगलवार को जयपुर और मुंबई से लौटे 24 लोगों के सभी छह पूल पॉजिटिव मिलने का साफ इशारा यह है कि मुंबई-राजस्थान जैसे इलाकों से आ रहे लोगों में संक्रमित होने का प्रतिशत काफी ज्यादा है, लिहाजा ऐसे लोग पूरे जिले के लिए बड़ा खतरा हैं जो इन राज्यों से आकर सीधे अपने घर पहुंच गए हैं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर सोमवार को ही प्रवासियों से संक्रमण फैलने का भारी खतरा होने की आशंका जताई थी।
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उधर, पॉजिटिव मिले छह पूल में शामिल लोगों की जानकारी निकालने के लिए देर रात तक आईडीएसपी यूनिट प्रभारी डॉ. मीसम अब्बास के निर्देशन में टीम जुटी रही। डीटीओ संजय कुमार ने बताया कि छह पूल में शामिल 24 लोगों में जयपुर से आए छह प्रवासी फरदीपुर, महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित जागेश्वरी से चार लोग मीरगंज, आठ लोग नवाबगंज और छह लोग शहर के जोगीनवादा, एजाजनगर गौटिया, बमनपुरी गौटिया के रहने वाले हैं। जो अपने घर जा रहे थे। इसमें से छह व्यक्ति सिम्प्टोमैटिक यानी उनमें कोरोना के लक्षण भी हैं। फ्यूचर कॉलेज के क्वारंटीन सेंटर में पहुंचे 45 लोगों का मंगलवार को भी पूल सैंपल लिया गया है। एमएमयू प्रभारी अभिषेक त्यागी ने बताया कि लिए गए पूल सैंपल में 12 लोगों में कोरोना संक्रमण के लक्षण भी हैं।
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ईएमटी का फूटा आक्रोश.. संदिग्ध मरीज लाने पर होती है बदसलूकी
बरेली। मीरगंज के 108 एंबुलेंस में तैनात रहे इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन यानी ईएमटी में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अब एंबुलेंस चालक और ईएमटी का आक्रोश फूट पड़ा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर भेदभाव का आरोप लगाया है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक ईएमटी ने बताया कि एंबुलेंसकर्मी को कोरोना वॉरियर मानने के बजाय अफसर बदसलूकी करते हैं। कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच कराने या पुष्टि के बाद उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने के बाद वापस आने पर उन्हें कमरे में घुसने नहीं दिया जाता। रात में भी कमरे के बाहर ही बिना बिस्तर सोना पड़ता है। वहीं, अफसर एंबुलेंस चालक या ईएमटी को क्वारंटीन नहीं कर रहे हैं। मीरगंज के ईएमटी के कोरोना संक्रमित की पुष्टि होने से पहले जब वह संक्रमित के संपर्क में आया था तो नियमानुसार उसे होटल में क्वारंटीन करना था, मगर सीएचसी कंपाउंड के एक कमरे में क्वारंटीन किया गया। ब्यूरो
21 पूल समेत 56 संदिग्ध संक्रमितों के लिए गए सैंपल
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को तीन सौ बेड के अस्पताल में 363 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें संदिग्ध मिले 26 लोगों के सैंपल लिए गए। दूसरी ओर, एमएमयू टीम की ओर से विभिन्न इलाकों से 21 पूल सैंपल लिए गए। जिन्हें जांच के लिए बुधवार की सुबह आईवीआरआई भेजा जाएगा। हॉटस्पॉट एरिया मीरगंज, बानखाना, बिहारीपुर में चल रही सर्विलांस के तहत 29 टीमों ने 1872 घरों के 10244 लोगों की जांच की गई।
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छह पूल में शामिल प्रवासी शहर के अलावा नवाबगंज, फरीदपुर और मीरगंज के
मंगलवार को क्वारंटीन किए गए लोगों समेत 18 संदिग्धों में कोरोना के लक्षण भी बरेली। एक दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने अमर उजाला के जरिये जिस तरह की आशंका जताई थी, ठीक वैसा ही हुआ। इत्तफाक से जिन छह पूल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उनमें शामिल मुंबई और जयपुर से लौटे 24 लोगों को गांव पहुंचने से पहले ही रोककर प्रशासन ने क्वारंटीन कर दिया था लेकिन अब यह सवाल स्वास्थ्य विभाग को परेशान कर रहा है कि जो सैकड़ों लोग बगैर जांच कराए सीधे अपने घर पहुंच गए हैं, उनमें संक्रमितों की तलाश कैसे की जाए।
गंभीर पहलू यह है कि कोरोना से बुरी तरह प्रभावित राज्यों और शहरों से आ रहे ज्यादातर उन्हीं लोगों की जांच हो पा रही है जो सरकार की ओर से चलाई गई ट्रेनों और बसों से पहुंच रहे हैं। निजी साधनों और पैदल ही लंबा सफर तय कर पहुंचने वाले लोग जांच की सतर्कता बरतने के बजाय सीधे घर पहुंच रहे हैं। मंगलवार को जयपुर और मुंबई से लौटे 24 लोगों के सभी छह पूल पॉजिटिव मिलने का साफ इशारा यह है कि मुंबई-राजस्थान जैसे इलाकों से आ रहे लोगों में संक्रमित होने का प्रतिशत काफी ज्यादा है, लिहाजा ऐसे लोग पूरे जिले के लिए बड़ा खतरा हैं जो इन राज्यों से आकर सीधे अपने घर पहुंच गए हैं। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर सोमवार को ही प्रवासियों से संक्रमण फैलने का भारी खतरा होने की आशंका जताई थी।
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उधर, पॉजिटिव मिले छह पूल में शामिल लोगों की जानकारी निकालने के लिए देर रात तक आईडीएसपी यूनिट प्रभारी डॉ. मीसम अब्बास के निर्देशन में टीम जुटी रही। डीटीओ संजय कुमार ने बताया कि छह पूल में शामिल 24 लोगों में जयपुर से आए छह प्रवासी फरदीपुर, महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित जागेश्वरी से चार लोग मीरगंज, आठ लोग नवाबगंज और छह लोग शहर के जोगीनवादा, एजाजनगर गौटिया, बमनपुरी गौटिया के रहने वाले हैं। जो अपने घर जा रहे थे। इसमें से छह व्यक्ति सिम्प्टोमैटिक यानी उनमें कोरोना के लक्षण भी हैं। फ्यूचर कॉलेज के क्वारंटीन सेंटर में पहुंचे 45 लोगों का मंगलवार को भी पूल सैंपल लिया गया है। एमएमयू प्रभारी अभिषेक त्यागी ने बताया कि लिए गए पूल सैंपल में 12 लोगों में कोरोना संक्रमण के लक्षण भी हैं।
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