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मानवता का संदेश देता है ‘मेघदूतम्’ नाटक
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अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में विशेष प्रस्तुति के रूप हुआ मंचन
बरेली। अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में अखिल भारतीय नाटक प्रतियोगिता हुई, जिसमें विशेष प्रस्तुति के रूप में शून्य संस्था दिल्ली की ओर से मंचित ‘मेघदूतम्’ नाटक की प्रस्तुति मानवता का संदेश दे गई।
यहां संजय कम्युनिटी हाल में महाकवि कालीदास के नाटक ‘मेघदूतम्’ का मंचन किया गया। डॉ. रमा यादव के निर्देशन में संस्कृति नाट्य शास्त्र की उस दृष्टि को उजागर किया गया जो वर्ग, वर्ण और जाति भेद से ऊपर उठकर केवल मानवता को केंद्र में रखकर चलता है। मेघदूत को जिस तरह से पेश किया गया उसमें हिंदी और संस्कृत का मिलाजुला प्रयोग उभर कर सामने आता है। इस नाटक में मेघ, यक्ष, कालीदास एक दूसरे से घुले मिले होने के कारण प्रस्तुति के केंद्र में कोई एक चरित्र न होकर सभी चरित्र प्रमुख हो गए हैं। मूल पात्र यक्ष की भूमिका में मयंक गुप्ता प्रमुख रूप से उभरे। इसके अलावा श्वेता, आदित्य, अरबाज ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया। कल्चरल एसोसिएशन की ओर से मनाए जा रहे महोत्सव में उक्त प्रस्तुति के अलावा बांग्लादेश के चंद्रकला थिएटर ढाका की प्रस्तुत ‘शेख सादी’ और शाहजहांपुर की संस्था टेलेंट मेकर ‘पार्क’ का देर रात तक मंचन होना बाकी था। इससे पूर्व दिवस रविवार को जयपुर के बावरिए काले, दुंदुभी थिएटर दिल्ली के नटरंग, सांगली महाराष्ट्र के डिंडा जुलूस नाटकों का मंचन किया गया। अतिथि डॉ. अनीस बेग रहे। अध्यक्षता जेसी पालीवाल ने की। निर्णायक मंडल में देवेंद्र रावत, विनायक श्रीवास्तव, राजीव शर्मा, हरजीत कौर, नाहिद बेग रहे।
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बरेली। अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में अखिल भारतीय नाटक प्रतियोगिता हुई, जिसमें विशेष प्रस्तुति के रूप में शून्य संस्था दिल्ली की ओर से मंचित ‘मेघदूतम्’ नाटक की प्रस्तुति मानवता का संदेश दे गई।
यहां संजय कम्युनिटी हाल में महाकवि कालीदास के नाटक ‘मेघदूतम्’ का मंचन किया गया। डॉ. रमा यादव के निर्देशन में संस्कृति नाट्य शास्त्र की उस दृष्टि को उजागर किया गया जो वर्ग, वर्ण और जाति भेद से ऊपर उठकर केवल मानवता को केंद्र में रखकर चलता है। मेघदूत को जिस तरह से पेश किया गया उसमें हिंदी और संस्कृत का मिलाजुला प्रयोग उभर कर सामने आता है। इस नाटक में मेघ, यक्ष, कालीदास एक दूसरे से घुले मिले होने के कारण प्रस्तुति के केंद्र में कोई एक चरित्र न होकर सभी चरित्र प्रमुख हो गए हैं। मूल पात्र यक्ष की भूमिका में मयंक गुप्ता प्रमुख रूप से उभरे। इसके अलावा श्वेता, आदित्य, अरबाज ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया। कल्चरल एसोसिएशन की ओर से मनाए जा रहे महोत्सव में उक्त प्रस्तुति के अलावा बांग्लादेश के चंद्रकला थिएटर ढाका की प्रस्तुत ‘शेख सादी’ और शाहजहांपुर की संस्था टेलेंट मेकर ‘पार्क’ का देर रात तक मंचन होना बाकी था। इससे पूर्व दिवस रविवार को जयपुर के बावरिए काले, दुंदुभी थिएटर दिल्ली के नटरंग, सांगली महाराष्ट्र के डिंडा जुलूस नाटकों का मंचन किया गया। अतिथि डॉ. अनीस बेग रहे। अध्यक्षता जेसी पालीवाल ने की। निर्णायक मंडल में देवेंद्र रावत, विनायक श्रीवास्तव, राजीव शर्मा, हरजीत कौर, नाहिद बेग रहे।
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