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संवेदनाओं का दस्तावेज है ‘पापा मैं तारा बन गई’
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बरेली। रंग प्रवाह सांस्कृतिक समिति की ओर से रविवार को रामपुर गार्डन स्थित रामानुज दयाल अग्रवाल सरस्वती शिशु मंदिर में नाटक मंचन का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि संघ के विभाग प्रचारक आनंद भैया, महानगर प्रचारक विक्रांत मौजूद रहे।
गुडविन मसीह का लिखा नाटक ‘पापा मैं तारा बन गई’ भावनाओं, संवेदनाओं और मर्म का दस्तावेज है। जिसमें दर्शाया गया कि आर्यन और भूमिका दंपत्ति के सालों बाद भी कोई संतान नहीं होती। एक दिन कचरे के ढेर में आर्यन को एक बच्ची मिल जाती है, जिसे घर लाकर उसकी परवरिश की। बड़ा होने पर वह बाहर पढ़ने जाती है तो पिता की सांस अटक जाती है। पर जैसे तैसे खुद को मनाकर वह बच्ची को पढ़ने भेजते हैं, लेकिन जैसे ही चांदनी कॉलेज पहुंचती है वहां से फोन आता है कि वो सीढ़ियों से गिरकर मर गई। जिसके बाद आर्यन टूट जाता है। नाटक ने मौजूद लोगों को झकझोरने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी।
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गुडविन मसीह का लिखा नाटक ‘पापा मैं तारा बन गई’ भावनाओं, संवेदनाओं और मर्म का दस्तावेज है। जिसमें दर्शाया गया कि आर्यन और भूमिका दंपत्ति के सालों बाद भी कोई संतान नहीं होती। एक दिन कचरे के ढेर में आर्यन को एक बच्ची मिल जाती है, जिसे घर लाकर उसकी परवरिश की। बड़ा होने पर वह बाहर पढ़ने जाती है तो पिता की सांस अटक जाती है। पर जैसे तैसे खुद को मनाकर वह बच्ची को पढ़ने भेजते हैं, लेकिन जैसे ही चांदनी कॉलेज पहुंचती है वहां से फोन आता है कि वो सीढ़ियों से गिरकर मर गई। जिसके बाद आर्यन टूट जाता है। नाटक ने मौजूद लोगों को झकझोरने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी।
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