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डरावने थे सऊदी की जेल में बीते चार साल

Fri, 01 Apr 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Fri, 01 Apr 2016 01:49 AM IST
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Were scary in the last four years in Saudi jail
जेल से छूटे रफीक
54 साल के मो. रफीक अहमद सऊदी अरब की जेद्दा जेल से चार साल बाद रिहा होकर  लौटे तो घर वालों में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लग गया। उन्होंने कहा कि जेल में चार साल कष्टकारी रहे। बात-बात पर बेरहमी से पिटाई होती थी और एक लीटर पानी की बोतल तीन दिन तक चलानी पड़ती थी। 
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मो. रफीक बताते हैं कि 15 जून 2012 को वे 12 लोगों के जत्थे के साथ दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट से उमरा करने जेद्दा सऊदी अरब गए थे। जेद्दा एयरपोर्ट पर सघन तलाशी के दौरान उनके साथियों के पास से 32 किलो खसखस (अफीम के बोंडे के दाने) बरामद हुए थे। सऊदी पुलिस ने सबके साथ शक के आधार पर रफीक को भी कैद कर लिया था। तब से वे और उनके साथी जेद्दा जेल में ही थे। जेल में मजदूरी के एवज में माहवार 150 रियाल (2550 रुपये) मिलते थे। जिसमें से काफी रकम पानी पर ही खर्च हो जाती थी। उनकी आंखों के सामने चार साल में कम से कम 120 कैदियों को जेल में ही सरेआम काटकर मौत के घाट उतार दिया गया। रफीक को छुड़वाने के लिए उनके छोटे भाई तहसीन अहमद ने मदद की गुहार लगाई थी। महीने भर पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सऊदी अरब सरकार के समक्ष सालों से सजा भुगत रहे भारतीय कैदियों का यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद रफीक के साथ लगभग 125 भारतीय कैदियों को 18 मार्च को जेद्दा जेल से रिहाई मिल गई है। 
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