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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Those who left the police station in ITBP burglary

आईटीबीपी में सेंधमारी करने वालों को थाने से ही छोड़ दिया

Sat, 14 May 2016 01:27 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Sat, 14 May 2016 01:27 AM IST
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अर्द्धसैनिक बलों में सेंधमारी करने वालों पर पुलिस बेहद मेहरबान है। आईटीबीपी के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को जिन तीन लड़कों को सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने के आरोप में पकड़कर पुलिस को सौंपा था, पुलिस ने उन्हें थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया। आरोपियों को जमानत देने के लिए पुलिस ने आईपीसी की धारा 467,468 हटा दी। उधर, बीएसएफ में सेंधमारी करने के आरोप में पकड़े गए चारों लड़कों के खिलाफ फतेहगंज पश्चिमी पुलिस ने तो मुकदमा ही नहीं लिखा।
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बृहस्पतिवार को आईटीबीपी की भर्ती में सॉल्वर बैठाकर लिखित परीक्षा पास करने के आरोप में अलीगढ़ निवासी केसी राम के बेटे नकुल कुमार, मथुरा के जराका निवासी बदन सिंह के बेटे सचिन और मथुरा के ही गोवर्धन निवासी रामकुमार पुत्र प्रभुदयाल को फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना था कि मेडिकल के दौरान न इनकी फोटो मैच हुई और न ही हस्ताक्षर मिले। पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी करने के आरोप में मुकदमा लिखने के बाद गिरफ्तारी दिखा दी। बाद में मुकदमे से 467 और 468 जालसाजी की धाराओं को हटाने के बाद इंस्पेक्टर ने थाने से ही जमानत दे दिया। सीओ चतुर्थ संतोष कुमार का इस मामले में यह तर्क है कि तीनों आरोपियों में से किसी से खिलाफ सुबूत नहीं हैं। इसलिए उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गई है। उधर, इसी दिन बीएसएफ भिटौरा 125वीं बटालियन में कांस्टेबल जीडी पदों पर भर्ती के लिए मेडिकल असेसमेंट टेस्ट के दौरान बृजेश कुमार पुत्र किशोरी दास निवासी बुधि पैमार थाना मुस्तकिल गया बिहार, दीनानाथ पटेल पुत्र तुलसीराम निवासी प्रानपुन थाना नवाबगंज इलाहाबाद, सुजीत कुमार पुत्र संतलाल पटेल निवासी नरायनपुर थाना सोरांव इलाहाबाद और निरंजन कुमार पुत्र विजय कुमार पथरा थाना करछना, इलाहाबाद को अधिकारियों ने दस्तावेज में फर्जीवाड़ा होने पर पकड़ने के बाद पुलिस को सौंप दिया था, लेकिन पुलिस ने इस मामले में मुकदमा लिखने के बजाए चार मुन्ना भाइयों को बीएसएफ अफसरों के हवाले कर दिया। एसओ अशोक कुमार यादव ने बताया कि  चयन बोर्ड प्रभारी बीएसएफ भर्ती संदिग्धों के खिलाफ की गई तहरीर में अभियोग का स्पष्ट उल्लेख नहीं कर रहे हैं। इसलिए अभी कोई मुकदमा नहीं लिखा गया है। स्पष्ट तहरीर आने पर ही मुकदमा लिखकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं बीएसएफ की 125वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट के राजन ने मामला चयन बोर्ड पर टाल दिया। उन्होंने कहा कि आरोपियों को हमें दिया जा रहा है और हम थाने दे रहे हैं। चयन बोर्ड के अपने निर्णय हैं उसमें हमारा हस्तक्षेप नहीं।
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एक ही जुर्म में सजा अलग-अलग क्यों ?
पुलिस एक ही जुर्म में सजा अलग-अलग तय करके सवाल खड़े कराती है। शुक्रवार को यही हुआ। बृहस्पतिवार को पकड़े गए सात मुन्ना भाईयों में कोई भी पुलिस की मेहरबानी की वजह से जेल नहीं गया। जबकि इससे पहले पकड़े गए सात मुन्ना भाईयों को पुलिस ने चालान करके अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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हस्तलिपि तो किसी की मेल नहीं खा रही है
-थाने से जमानत पर छोड़े गए अर्द्धसैनिक  बलों में सेंधमारी करने वाले किसी भी आरोपी की हस्तलिपि मेल नहीं खा रही है। फोटो री मिक्सिंग के जरिए प्रवेश पत्रों में खेल भी परीक्षा के दौरान होने की बात सामने आ रही है। इससे यह बात साफ हो रही है कि दस्तावेजों में गड़बड़ी हुई है। इसलिए यह अपराध आईपीसी की धारा 420,467, 468 का बनता है। यह अपराध गैर जमानती है। ऐसे में पुलिस ने थाने से किस आधार पर जमानत दे दी, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।

असली खेल तो परीक्षा केंद्रों पर हुआ
बीएसएफ और आईटीबीपी में सेंध लगाने वाले लड़कों के खिलाफ लिखे गए मुकदमों को उन्हीं जिलों में ट्रांसफर किया जाएगा, जहां के स्कूलों में आरोपियों ने परीक्षा दी है। 
आरोपियों ने जिस प्रवेश पत्र से परीक्षा दी है उसमें उन्हीं के फोटो लगे हैं। जबकि हस्तलिपि उनसे मेल नहीं खा रही है। ऐसे में पुलिस यही संभावना जता रही है कि असली खेल परीक्षा केंद्रों पर ही हुआ है। यह भी होने की संभावना है कि असली लड़कों का प्रवेश लेकर सॉल्वर बैठा लिए हों। यही वजह है कि सॉल्वरों के जरिए परीक्षा पास करने वाले लड़के अपने प्रवेश पत्र लेकर बेखौफ होकर मेडिकल कराने के लिए आ रहे हैं, लेकिन हस्तलिपि के मिलान में यह लोग फंस जाते हैं। पुलिस इन मुकदमों में स्कूलों की भूमिका की भी जांच करेगी। प्रभारी निरीक्षक कैंट ब्रजेश सिंह का कहना है कि असली अपराध तो स्कूल में ही हुआ है। इसलिए यह विवेचनाएं उन्हीं जिलों को भिजवाई जा रही हैं, जहां के केंद्रों में परीक्षा हुई है।    

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बीएसएफ भर्ती में धोखाधड़ी करने वाले जेल गए
बरेली। बीएसएफ लिखित परीक्षा में साल्वर बैठाकर भर्ती के प्रयास में बुधवार को जेल गए चार युवकों की ओर से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शक्ति सिंह के न्यायालय में जमानत अर्जी लगाई गई। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।  

थाना फतेहगंज पुलिस ने राजनरायन, संदीप कुमार, सतेन्द्र सिंह व श्रीकृष्ण को जेल भेजा था। इन चारों की ओर से जमानत का प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया। इनकी ओर से तर्क दिया गया कि वे निर्दोष हैं तथा उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता है तो वे साक्ष्य को प्रभावित नहीं करेंगे। कोर्ट ने अर्द्ध सैनिक बलों में अनाधिकृत से भर्ती को गंभीर मामला मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। 
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