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हाथ बंधे थे और फंदे पर लटकी थी लड़की की लाश
बरेली।
Updated Wed, 08 Mar 2017 01:11 AM IST
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The hands were tied and hanging on the trap was the body of the girl
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
उप कृषि निदेशक की बेटी का हाथ बंधा शव उसके ही कमरे में फंदे से लटकता पाया गया है। प्रथम दृष्टया तो यह सभी को हत्या का मामला लगा लेकिन शाम को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंका दिया है। पीएम रिपोर्ट के मतिाबिक लड़की मौत फंदे पर लटकने से हुई है जो आत्महत्या संकेत कर रही है। इधर डिप्टी डायरेक्टर भी बेटी की मौत की वजह बीमारी से तंग होकर आत्महत्या बता रहे हैं। पुलिस भी असमंजस में है कि आखिर हाथ बांधकर कोई आत्महत्या क्यों और कैसे करेगा ? अब इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए जांच चल रही है।
शहर कोतवाली क्षेत्र में सर्किट हाउस कॉलोनी के मकान नंबर 4/13 में रह रहे हरनाथ सिंह बरेली में ही उप कृषि निदेशक हैं। वह हमीरपुर जिले के मूल निवासी है। यहां वह अपनी 24 वर्षीय बेटी मंजूषा सिंह के साथ रहते थे पत्नी लखनऊ में रहती हैं। हरनाथ सिंह का बेटा दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है। जबकि एमसीए करने के बाद मंजूषा नेट की तैयारी कर रही थी। कई बार परीक्षा में बैठने के बाद भी उसे कामयाबी नहीं मिला थी। सोमवार की रात को मंजूषा पिता के कमरे के पास ही दूसरे कमरे में सोई थी। मंगलवार सुबह जब उप कृषि निदेशक बेटी के कमरे में गए तो मंजूषा का शव उसके ही दुपट्टे के फंदे पर पंखे से लटका था। सफेद रंग के रुमाल से उसके दोनों हाथ बंधे थे। हाथ आगे की तरफ थे। पैर भी जमीन से करीब एक फिट से ज्यादा ऊपर थे। पास में कुर्सी रखी हुई थी। बेटी को फांसी के फंदे पर लटकी देख उप कृषि निदेशक ने फोन करके पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने युवती के शव को फांसी के फंदे से उतरवाकर पोस्टमार्टम को भिजवा दिया। पोस्टमार्टम में मंजूषा की मौत हैंगिंग(लटकने) से होना पाया गया है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद युवती के शव परिवार वालों को सौंप दिया है। उप कृषि निदेशक हरनाथ सिंह का कहना है कि उनकी बेटी की मौत बीमारी से हुई है। बीमारी क्या थी, यह बताने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। मंजूषा के पास एक मोबाइल भी मिला है। पुलिस ने उसके मोबाइल को कब्जे में ले लिया है। मोबाइल में यह देखा जा रहा है कि उसकी आखिरी बार बात किससे हुई थी। यह भी देखा जा रहा है कि परिवार के किसी व्यक्ति या दोस्त से तो मंजूषा को फोन या सोशल साइट पर कोई विवाद तो नहीं हुआ है। फील्ड यूनिट का कहना है कि युवती के बंधे हाथों में काफी गैप था और पैर भी फर्श से करीब एक फिट ऊपर थे।
कोचिंग को दिल्ली जाना चाहती थी मंजूषा
उप कृषि निदेशक की बेटी मंजूषा नेट की तैयारी के लिए कोचिंग करने को काफी समय से दिल्ली जाना चाहती थी, लेकिन पिता की इसके लिए इजाजत नहीं मिल रही है। यहां तैयारी करके परीक्षा देने में वह हार चुकी थी, इसलिए डिप्रेशन में भी रहने लगी थी। कॉलोनी में रहने वाले लोगों से भी उसका ज्यादा मिलना-जुलना नहीं था। पढ़ लिखकर पिता की तरह अफसर बनने का सपना देखने वाली मंजूषा की मौत की मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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पुलिस के सामने हैं ये सवाल
- हाथ रुमाल से बंधे थे। बंधे हाथ मंजूषा कैसे फंदे पर लटक गई। अगर उसके किसी ने हाथ बांधे तो क्यों।
- अगर मंजूषा ने आत्महत्या की तो उसकी वजह क्या थी।
- पिता और बेटी के कमरे के बीच एक दरवाजा है। पिता को आहट क्यों नहीं हुई।
- मंजूषा कोचिंग करने के लिए दिल्ली जाना चाहती थी। आखिर किस वजह से कोचिंग करने नहीं भेज रहे थे।
- मंजूषा के पिता मंजूषा के कमरे से होकर ही शौचालय में जाते थे। तो वह रात 10.30 से सुबह सात बजे कमरे से निकले ही नहीं?
- आखिर मंजूषा ने अपने हाथ खुद ही कैसे बांद लिये।
पोस्टमार्टम में मंजूषा की मौत लटकने से होनी पाई गई है। इससे मामला आत्महत्या का पाया गया है। फिर भी पुलिस छानबीन कर रही है।
समीर सौरभ, एसपी सिटी
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शहर कोतवाली क्षेत्र में सर्किट हाउस कॉलोनी के मकान नंबर 4/13 में रह रहे हरनाथ सिंह बरेली में ही उप कृषि निदेशक हैं। वह हमीरपुर जिले के मूल निवासी है। यहां वह अपनी 24 वर्षीय बेटी मंजूषा सिंह के साथ रहते थे पत्नी लखनऊ में रहती हैं। हरनाथ सिंह का बेटा दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है। जबकि एमसीए करने के बाद मंजूषा नेट की तैयारी कर रही थी। कई बार परीक्षा में बैठने के बाद भी उसे कामयाबी नहीं मिला थी। सोमवार की रात को मंजूषा पिता के कमरे के पास ही दूसरे कमरे में सोई थी। मंगलवार सुबह जब उप कृषि निदेशक बेटी के कमरे में गए तो मंजूषा का शव उसके ही दुपट्टे के फंदे पर पंखे से लटका था। सफेद रंग के रुमाल से उसके दोनों हाथ बंधे थे। हाथ आगे की तरफ थे। पैर भी जमीन से करीब एक फिट से ज्यादा ऊपर थे। पास में कुर्सी रखी हुई थी। बेटी को फांसी के फंदे पर लटकी देख उप कृषि निदेशक ने फोन करके पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने युवती के शव को फांसी के फंदे से उतरवाकर पोस्टमार्टम को भिजवा दिया। पोस्टमार्टम में मंजूषा की मौत हैंगिंग(लटकने) से होना पाया गया है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद युवती के शव परिवार वालों को सौंप दिया है। उप कृषि निदेशक हरनाथ सिंह का कहना है कि उनकी बेटी की मौत बीमारी से हुई है। बीमारी क्या थी, यह बताने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। मंजूषा के पास एक मोबाइल भी मिला है। पुलिस ने उसके मोबाइल को कब्जे में ले लिया है। मोबाइल में यह देखा जा रहा है कि उसकी आखिरी बार बात किससे हुई थी। यह भी देखा जा रहा है कि परिवार के किसी व्यक्ति या दोस्त से तो मंजूषा को फोन या सोशल साइट पर कोई विवाद तो नहीं हुआ है। फील्ड यूनिट का कहना है कि युवती के बंधे हाथों में काफी गैप था और पैर भी फर्श से करीब एक फिट ऊपर थे।
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कोचिंग को दिल्ली जाना चाहती थी मंजूषा
उप कृषि निदेशक की बेटी मंजूषा नेट की तैयारी के लिए कोचिंग करने को काफी समय से दिल्ली जाना चाहती थी, लेकिन पिता की इसके लिए इजाजत नहीं मिल रही है। यहां तैयारी करके परीक्षा देने में वह हार चुकी थी, इसलिए डिप्रेशन में भी रहने लगी थी। कॉलोनी में रहने वाले लोगों से भी उसका ज्यादा मिलना-जुलना नहीं था। पढ़ लिखकर पिता की तरह अफसर बनने का सपना देखने वाली मंजूषा की मौत की मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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पुलिस के सामने हैं ये सवाल
- हाथ रुमाल से बंधे थे। बंधे हाथ मंजूषा कैसे फंदे पर लटक गई। अगर उसके किसी ने हाथ बांधे तो क्यों।
- अगर मंजूषा ने आत्महत्या की तो उसकी वजह क्या थी।
- पिता और बेटी के कमरे के बीच एक दरवाजा है। पिता को आहट क्यों नहीं हुई।
- मंजूषा कोचिंग करने के लिए दिल्ली जाना चाहती थी। आखिर किस वजह से कोचिंग करने नहीं भेज रहे थे।
- मंजूषा के पिता मंजूषा के कमरे से होकर ही शौचालय में जाते थे। तो वह रात 10.30 से सुबह सात बजे कमरे से निकले ही नहीं?
- आखिर मंजूषा ने अपने हाथ खुद ही कैसे बांद लिये।
पोस्टमार्टम में मंजूषा की मौत लटकने से होनी पाई गई है। इससे मामला आत्महत्या का पाया गया है। फिर भी पुलिस छानबीन कर रही है।
समीर सौरभ, एसपी सिटी